कूर्मि समाज लिखेगा अपनी वास्तविक इतिहास
12 सितम्बर को भोपाल में चार दिवसीय होगा मंथन, जुटेंगे भारत भर के इतिहासवेता
विशेष संवाददाता, रायपुर/ कूर्मि समाज के वास्तविक, वैज्ञानिक और तथ्यात्मक इतिहास को उजागर करने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में एक ऐतिहासिक चार दिवसीय द्वितीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कूर्मि इतिहास अनुसंधान परिषद के बैनर तले आयोजित इस संगोष्ठी में देश भर से प्रख्यात इतिहासकारों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवीगण हिस्सा लेंगे। चार दिवसीय चलने वाले इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में समाज की भ्रांतियों और विसंगतियों को दूर करने के लिए कूर्मि समाज के सम्यक इतिहास का पुर्नलेखन कार्य किया जाएगा।
पांच कालखंडों में बांटकर खंगाला जाएगा इतिहास
मानव सभ्यता के उद्भव से लेकर वर्तमान समय तक के इतिहास को वैज्ञानिक रूप से संकलित करने के लिए इसे पांच अलग-अलग कालखंडों में विभाजित किया गया है। इसके लिए विषय विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की गई है, जिन्हें लेखन की जिम्मेदारी सौंपी गई हैः-
प्रथम कालखण्ड (मानव उत्पत्ति से ताम्रपाषाण युग तक):-इसकी जिम्मेदारी पटना (बिहार) के आचार्य प्रवर निरंजन सिन्हा को दी गई है।
द्वितीय कालखण्ड (प्राक सैंधव सभ्यता से पहली ईसवी तक)ः- इसका पुर्नलेखन सागर (मध्य प्रदेश) के प्रसिद्ध इतिहासकार एडवोकेट राजेश मोहन चौधरी करेंगे।
तृतीय कालखण्ड (ईसाकाल से प्रतिहारवंश अर्थात् 1206 ई. तक):- सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के प्रसिद्ध इतिहासवेत्ता इंजी. शेषराज सिंह पंवार इस पर कार्य करेंगे।
चतुर्थ कालखण्ड (वर्ष 1206 से सन् 1766 तक):-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) के इंजी. चंद्रशेखर शिखरे एवं श्री गंगाधर बनबरे द्वारा इतिहास खंगाला जाएगा।
पंचम कालखण्ड (स्वतंत्रता संग्राम व सामाजिक नवजागरण – 1766 से 2024 तक):-इस खंड का संयुक्त संयोजन डॉ. सीमा पटेल (भभुआ), डॉ. एस. एन. वर्मा (वाराणसी) और डॉ. जीतेंद्र कुमार (पटना) करेंगे। इसके साथ ही सामाजिक न्याय खंड का पृथक पुर्नलेखन नागपुर और रांची के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में होगा।
पांच जोनों में बंटा देश, बुद्ध, शिवाजी और सरदार बने मार्गदर्शक
देश के विभिन्न राज्यों के महापुरुषों, सभ्यता और संस्कृति के गहन अध्ययन के लिए पूरे देश को पांच जोनों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य जोन) में विभाजित किया गया है। प्रारंभिक चरण में हिंदी भाषी राज्यों के लिए राज्यवार संयोजकों और समन्वयकों की नियुक्तियां कर दी गई हैं।
साहित्य का होगा डिजिटलीकरण, बनेगी ई-लाइब्रेरी
आधुनिक दौर को देखते हुए परिषद ने देश भर में बिखरे कूर्मि साहित्य और ऐतिहासिक दस्तावेजों के डिजिटलीकरण का भी बड़ा फैसला लिया है। रांची के श्री उपेन्द्र सिंह और वाराणसी निवासी डॉ. ओम प्रकाश चौधरी को इसकी मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से आईटी और मीडिया जगत के विशेषज्ञों को शामिल करके एक तकनीकी टीम बनाई जावेगी, जो सोशल मीडिया और ई-लाइब्रेरी के माध्यम से समाज के गौरवशाली इतिहास को घर-घर तक पहुंचाएगी। इस कार्य के लिए मुंबई के इंजीनियर जनार्दन पटेल, प्रयागराज निवासी श्री सौरभ पटेल, सिवनी निवासी इंजीनियर प्रशांत पटेल को आईटी एवं सोशल मीडिया की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है।
2024 में वाराणसी में प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ था आयोजन
आपको बताते चले कि वाराणसी के तेलियाबाग स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल स्मारक एवं अतिथि निवास में कूर्मि इतिहास अनुसंधान परिषद के बैनर तले प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजिन हुआ था। इस संगोष्ठी में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज की। त्रिदिवसीय आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में कूर्मि इतिहास अनुसंधान परिषद द्वारा सर्वसम्मति से समाज के लिए एक नया उद्घोष वाक्य स्वीकार किया गया है- ’’हमारे जीवन के शिल्पकार ! बुद्ध, शिवाजी और सरदार !!!
किसी भी समाज का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इतिहास कितना समृद्ध और स्पष्ट है। लंबे समय से हमारे गौरवशाली इतिहास को लेकर कई भ्रांतियाँ और विसंगतियाँ रही हैं, जिसके कारण हम आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक रूप से कहीं न कहीं पीछे छूट गए। इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कूर्मि इतिहास अनुसंधान परिषद द्वारा वास्तविक इतिहास के पुर्नलेखन का संकल्प लिया गया है। परिषद द्वारा समाज के प्राचीन साहित्य, पुस्तकों और दस्तावेजों को डिजिटल रूप दिया जा रहा है। एक अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी घर बैठे अपने गौरवशाली इतिहास को पढ़ सकेगी। – डॉ. जीतेन्द्र सिंगरौल, राष्ट्रीय महासचिव-कूर्मि इतिहास अनुसंधान परिषद
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