श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में गुरुपूर्णिमा पर गुरु पूजन सम्पन्न, सावन महोत्सव एवं महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ का शुभारंभ
बिलासपुर। सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में परम पूज्य गुरुदेव भगवान के पावन आशीर्वाद एवं पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सान्निध्य में गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पीतांबरा पीठ में गुरु पूजन का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने गुरुदेव का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर ही सावन महोत्सव (चतुर्थ वर्ष) एवं श्री महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। यह दिव्य आयोजन 30 जुलाई 2026 (श्रावण कृष्ण प्रतिपदा) से 28 अगस्त 2026 (श्रावण शुक्ल पूर्णिमा) तक आयोजित होगा। उल्लेखनीय है कि श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ का शुभारंभ 13 जुलाई 2026 से हो चुका है, जो प्रतिदिन वैदिक विधि-विधान के साथ निरंतर सम्पन्न हो रहा है। सावन महोत्सव के दौरान यह महायज्ञ महारुद्राभिषेक एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ नियमित रूप से जारी रहेगा।
प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का नमक-चमक वैदिक मंत्रों के साथ महारुद्राभिषेक सम्पन्न होगा तथा दोपहर 1:30 बजे महाआरती आयोजित की जाएगी। इसी प्रकार प्रतिदिन रात्रि 8:00 बजे से मध्यरात्रि 12:30 बजे तक श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ किया जा रहा , जिसके पश्चात रात्रि महाआरती की जाती हैं।
पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सर्वश्रेष्ठ काल माना गया है। इस पवित्र मास में श्रद्धा एवं विधि-विधान से भगवान शिव का रुद्राभिषेक, जप, तप एवं यज्ञ करने से समस्त प्रकार के कष्टों का निवारण होता है तथा साधक को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और शिवकृपा की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने लोककल्याण हेतु कालकूट विष का पान किया था। उनके कंठ की ज्वाला को शांत करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया, तभी से सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। वहीं माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए इसी मास में कठोर तपस्या की थी। इसी कारण श्रावण मास भगवान शिव की आराधना, रुद्राभिषेक एवं मनोकामना पूर्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि शास्त्रों में पारदेश्वर शिवलिंग को अत्यंत दिव्य एवं दुर्लभ माना गया है। रसरत्न समुच्चय, रुद्रयामल तंत्र तथा अन्य शैव ग्रंथों में संस्कारित पारद से निर्मित शिवलिंग को भगवान शिव का साक्षात् स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि श्री पीतांबरा पीठ में स्थापित श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का दर्शन, स्पर्श, पूजन एवं अभिषेक अत्यंत पुण्यदायी है। ऐसी मान्यता है कि पारदेश्वर शिवलिंग का श्रद्धापूर्वक अभिषेक एवं पूजन करने से साधक को अनेक यज्ञों के समान पुण्यफल प्राप्त होता है, जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है तथा भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रावण मास में नमक-चमक वैदिक मंत्रों के साथ सम्पन्न होने वाला महारुद्राभिषेक रोग, शोक, मानसिक तनाव तथा नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को दूर कर जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करता है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रतिदिन आयोजित होने वाला श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ, जो 13 जुलाई से निरंतर संचालित हो रहा है, साधकों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। रात्रिकाल में वैदिक मंत्रों के साथ सम्पन्न होने वाले इस महायज्ञ में आहुति अर्पित करने से वातावरण की शुद्धि होती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है तथा भगवान शिव एवं माँ पीतांबरा की कृपा प्राप्त होती है।
मंदिर समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे सावन महोत्सव, श्रीमहारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ, 13 जुलाई से निरंतर संचालित श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ में परिवार सहित सहभागी बनकर भगवान शिव, माँ पीतांबरा का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।
भवदीय,
डॉ. अमिता दीपेश पाण्डेय
मीडिया प्रभारी
श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर
सुभाष चौक, सरकंडा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
About The Author
