राष्ट्रीय खेल दिवस विशेष आलेख- डॉ जयशंकर यादव: गांव की मिट्टी से राष्ट्रीय मंच तक—छत्तीसगढ़ की कबड्डी, नई पहचान की ओर अग्रसर

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“छत्तीसगढ़ में कबड्डी के बढ़ते कदम : परंपरा से पहचान और उपलब्धियों की ओर”

बिलासपुर।राष्ट्रीय खेल दिवस भारत के महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष 29 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस केवल खेल प्रतिभाओं को सम्मान देने का अवसर नहीं, बल्कि देश और समाज में खेल संस्कृति को मजबूत करने का संकल्प लेने का दिन भी है। छत्तीसगढ़ की खेल परंपरा में कबड्डी का विशेष स्थान है। गांवों की मिट्टी से निकलकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली यह खेल विधा आज प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, सम्मान और पहचान का माध्यम बन रही है।


छत्तीसगढ़ और कबड्डी : मिट्टी से मैदान तक
कबड्डी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ा हुआ खेल है। प्रदेश के गांवों में लंबे समय से कबड्डी मनोरंजन के साथ-साथ शारीरिक क्षमता, साहस, अनुशासन और सामूहिक भावना का माध्यम रही है। पहले जहां कबड्डी सीमित संसाधनों में गांव के मैदानों तक केंद्रित थी, वहीं आज स्कूल, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, जिला एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के माध्यम से इसका व्यवस्थित विकास हो रहा है।
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियां कबड्डी के विकास के लिए अनुकूल हैं। कम संसाधनों में खेले जाने वाला यह खेल ग्रामीण और आर्थिक रूप से सामान्य परिवारों के बच्चों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देता है।

खेल अधोसंरचना और प्रशिक्षण से बढ़ता स्तर

प्रदेश में खेल मैदानों, प्रशिक्षण शिविरों, खेल अकादमियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में खेल सुविधाओं के विस्तार से कबड्डी को नई गति मिली है। प्रशिक्षित कोच, शारीरिक शिक्षा शिक्षक और खेल विशेषज्ञ खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

आज कबड्डी प्रशिक्षण में केवल ताकत और गति पर ही ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि फिटनेस, चपलता, प्रतिक्रिया समय, संतुलन, मानसिक दृढ़ता, रणनीति और खेल विश्लेषण जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिक

कबड्डी के विकास में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले 5-6 वर्षों से लगातार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में स्थान सुनिश्चित करते आ रहे हैं. खेलों इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पहले ही बार में सेमीफाइनल तक पहुंच कर कांस्य पदक हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाने में कामयाब हो चुके हैं. उच्च शिक्षा संस्थानों में आयोजित अंतरमहाविद्यालयीन, अंतरविश्वविद्यालयीन एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को उच्च स्तर का अनुभव प्रदान करती हैं।

छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में खेल विभागों द्वारा नियमित प्रशिक्षण, चयन प्रक्रिया, प्रतियोगिताओं में सहभागिता और प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलने से कबड्डी का आधार मजबूत हुआ है। विश्वविद्यालय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।

महिला कबड्डी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी

छत्तीसगढ़ में महिला कबड्डी का विस्तार विशेष रूप से उत्साहजनक है। पहले खेलों में लड़कियों की भागीदारी सीमित मानी जाती थी,*संजू देवी* का एशिया कप के लिए भारतीय टीम में चयन और पूरे मैच में जीत के मुख्य सूत्रधार के रूप में ख्याति बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब मिलने पर अब बड़ी संख्या में छात्राएं कबड्डी को अपने खेल करियर के रूप में अपना रही हैं। पुन: एशिया कप के लिए संजू देवी का चयन होने पर पूरा छत्तीसगढ़ गौरवांवित हैं. Women’s Ashiya league के लिए तीन खिलाडियों का चयन अभी हाल ही में हुआ. निश्चित रूप से अच्छा संकेत है.

महिला खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी केवल खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक है। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां कबड्डी के माध्यम से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं।

प्रो कबड्डी लीग का प्रभाव

प्रो कबड्डी लीग ने भारत में कबड्डी को नई लोकप्रियता प्रदान की है। टेलीविजन और डिजिटल माध्यमों पर कबड्डी के प्रसारण ने युवाओं में इस खेल के प्रति आकर्षण बढ़ाया है। आधुनिक तकनीक, विश्लेषण और पेशेवर प्रशिक्षण ने कबड्डी को पारंपरिक खेल से एक उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों पर भी पड़ा है। प्रदेश के युवा अब कबड्डी को केवल शौक नहीं, बल्कि करियर और खेल उपलब्धि के अवसर के रूप में देखने लगे हैं। प्रथम प्रो कबड्डी में बंगाल वारियर्स टीम में हितेश पटेल का चयन फिर यू पी योद्धा में दुर्गेश नेताम उसके बाद हरियाणा स्टीलर टीम में चयन से युवाओं में कबड्डी के लिए आकर्षण बढ़ा है.

ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए कबड्डी बना अवसर

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। कबड्डी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे प्रारंभ करने के लिए अत्यधिक महंगे उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए भी यह खेल आगे बढ़ने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

यदि ग्राम पंचायत स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और राज्य स्तर तक नियमित प्रतियोगिताओं तथा प्रतिभा खोज कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए, तो प्रदेश के अनेक छिपे हुए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जा सकता है।
वैज्ञानिक प्रशिक्षण की आवश्यकता
आधुनिक कबड्डी में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। इसलिए खिलाड़ियों को केवल पारंपरिक अभ्यास तक सीमित न रखते हुए वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान करना आवश्यक है। इसमें-

. खेल-विशिष्ट फिटनेस प्रशिक्षण
– शक्ति एवं गति विकास
– चपलता और प्रतिक्रिया समय का प्रशिक्षण
– मानसिक कौशल प्रशिक्षण
– पोषण एवं रिकवरी
– खेल चोटों की रोकथाम
– वीडियो एवं प्रदर्शन विश्लेषण
– आधुनिक खेल विज्ञान और डेटा का उपयोग
को प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
कबड्डी और नई पीढ़ी
आज के डिजिटल युग में युवाओं को सक्रिय जीवनशैली से जोड़ना एक बड़ी चुनौती है। कबड्डी जैसे खेल युवाओं को शारीरिक रूप से सक्रिय बनाने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व, निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास और संघर्षशीलता जैसे जीवन कौशल विकसित करते हैं।

इसलिए स्कूल स्तर पर कबड्डी को अधिक प्रोत्साहित करना आवश्यक है। यदि विद्यालयों में नियमित खेल गतिविधियां, प्रशिक्षित शिक्षक और पर्याप्त मैदान उपलब्ध हों, तो कम उम्र में ही प्रतिभाओं की पहचान की जा सकती है।

आगे की राह

छत्तीसगढ़ में कबड्डी को राष्ट्रीय स्तर की मजबूत पहचान दिलाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं—

1. ग्राम स्तर पर नियमित कबड्डी प्रतियोगिताओं का आयोजन।
2. स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर प्रतिभा खोज अभियान।
3. महिला कबड्डी को विशेष प्रोत्साहन।
4. प्रशिक्षित कोच एवं रेफरी की संख्या बढ़ाना।
5. खिलाड़ियों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण एवं खेल विज्ञान की सुविधा।
6. ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदानों का विकास।
7. प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन।
8. विश्वविद्यालयों और खेल संस्थानों के बीच समन्वय।
9. खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक मूल्यांकन।
10. राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर।
इस तरह छत्तीसगढ़ में कबड्डी के बढ़ते कदम प्रदेश की खेल प्रतिभा, ग्रामीण संस्कृति और युवा ऊर्जा का प्रतीक हैं। मिट्टी के पारंपरिक मैदानों से निकलकर कबड्डी आज आधुनिक खेल मैदानों, विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है; आवश्यकता है उन्हें सही समय पर पहचानने, वैज्ञानिक प्रशिक्षण देने और निरंतर अवसर उपलब्ध कराने की।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि खेल केवल पदक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित, आत्मनिर्भर और सशक्त समाज के निर्माण का आधार बने। छत्तीसगढ़ की कबड्डी प्रतिभाओं को यदि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलते रहें, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के खिलाड़ी देश और दुनिया के कबड्डी मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकते हैं।
डॉ जय शंकर यादव
संचालक शारीरिक शिक्षा
सीवी रमन विश्व विद्यालय कोटा बिलासपुर छ.ग.

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