श्री पीतांबरा पीठ में सावन महोत्सव व महारुद्राभिषेक महायज्ञ जारी; शिवपूजन में पत्र-पुष्पों का विशेष महत्व

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सावन के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं से धर्म, कर्तव्य और सेवा का आह्वान

बिलासपुर सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में परमपूज्य गुरुदेव भगवान के पावन आशीर्वाद एवं पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सान्निध्य में सावन महोत्सव (चतुर्थ वर्ष) एवं श्री महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप भव्य रूप से जारी है। 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का महारुद्राभिषेक एवं आराधना कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का नमक-चमक वैदिक मंत्रों के साथ महारुद्राभिषेक किया जाता है। इसके उपरांत दोपहर 1:30 बजे महाआरती संपन्न होती है।

भगवान शिव को अत्यंत दयालु एवं आशुतोष माना गया है। वे भक्त द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए एक पत्र या पुष्प से भी प्रसन्न हो जाते हैं। शिव पूजा में विभिन्न पत्र-पुष्पों का अपना विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।

शिव पूजा में प्रयुक्त प्रमुख पत्र एवं उनके धार्मिक महत्व

बेलपत्र — भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेलपत्र अर्पित करने से तीन जन्मों के पापों के नाश, अखंड सौभाग्य तथा मोक्ष की प्राप्ति की धार्मिक मान्यता है।

शमी पत्र — शमी पत्र अर्पित करने से शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय तथा मानसिक परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है।

आंक/मदार पत्र — आंक या मदार का पत्र भगवान शिव को अर्पित करने से आरोग्य, शारीरिक शक्ति एवं तेज की प्राप्ति का धार्मिक महत्व बताया गया है।

धतूरे का पत्र — धतूरे का पत्र मन के विकारों, जैसे काम, क्रोध एवं मोह पर नियंत्रण तथा नकारात्मकता से मुक्ति की कामना से अर्पित किया जाता है।

भांग पत्र — भांग पत्र अर्पित करने से मानसिक तनाव एवं चिंताओं से मुक्ति तथा मन की शांति प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।

अपामार्ग पत्र — अपामार्ग का पत्र संतान सुख एवं कुल की वृद्धि की कामना से अर्पित किए जाने की परंपरा बताई गई है।

शिवलिंग पर अर्पित किए जाने वाले प्रमुख पुष्प एवं उनके धार्मिक फल

द्रोण पुष्प (गुमा) — धन-धान्य की वृद्धि तथा दरिद्रता के नाश की धार्मिक मान्यता है।

गुलाब — स्वास्थ्य, सुख एवं संपत्ति की प्राप्ति की कामना से गुलाब अर्पित किया जाता है।

कमल — सफेद, रक्त एवं नील कमल भगवान शिव को अर्पित करने से सुख-समृद्धि, लक्ष्मी की कृपा तथा मोक्ष की प्राप्ति का धार्मिक महत्व बताया गया है।

कनेर — कनेर के पुष्प को नए वस्त्र, आभूषण तथा जीवन में वैभव की प्राप्ति से जोड़ा गया है।

धतूरे का फूल — धतूरे का पुष्प भगवान शिव को प्रिय माना जाता है। इसे सुयोग्य संतान की प्राप्ति तथा भय से मुक्ति की कामना से अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है।

आंकड़ा/मदार का फूल — मदार का पुष्प मान-सम्मान, प्रतिष्ठा एवं दीर्घायु की कामना से अर्पित किए जाने का धार्मिक महत्व बताया गया है।

हरसिंगार/पारिजात — इसके पुष्प घर में सुख-शांति, समृद्धि एवं मानसिक स्थिरता की कामना से अर्पित किए जाते हैं।

अपराजिता (शंखपुष्पी) — नीले रंग की अपराजिता भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप को समर्पित की जाती है। इसे विजय एवं बाधाओं से मुक्ति की कामना के लिए अर्पित करने की परंपरा है।

जूही एवं मोगरा — इन पुष्पों को शिवलिंग पर अर्पित करने से घर में अन्न-धन की समृद्धि एवं सुख-शांति की धार्मिक मान्यता है।

चंपा पुष्प — चंपा पुष्प पवित्रता, मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। भक्त इसे भगवान शिव को समर्पित कर सुख-शांति, समृद्धि एवं शिवकृपा की कामना करते हैं।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने कहा—धर्म के साथ कर्तव्य का पालन ही शिव आराधना का सार

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव की आराधना केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि धर्म, सत्य, संयम, सेवा और कर्तव्य के पालन की प्रेरणा है। सावन में जल, पत्र एवं पुष्प अर्पित करने के साथ हमें अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह का भी त्याग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, जरूरतमंदों की सहायता, गौसेवा, प्रकृति की रक्षा और समाज में सद्भाव बनाए रखना भी सच्ची शिव आराधना है। सावन के अंतिम चरण में श्रद्धालु केवल मनोकामनाएं न मांगें, बल्कि जीवन को धर्म, सेवा और सदाचार से जोड़ने का संकल्प लें। शिवलिंग पर जल अर्पित करने का संदेश अपने भीतर की तपन को शांत करना और जीवन में शांति, करुणा एवं संयम धारण करना है। छोटे-छोटे सत्कर्म ही जीवन को सार्थक बनाते हैं और इन्हीं के माध्यम से शिवत्व को अपने आचरण में उतारा जा सकता है।

श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में सावन महोत्सव के अंतर्गत श्रद्धालुओं की आस्था एवं सहभागिता निरंतर बनी हुई है। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं से महोत्सव के शेष दिनों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी होकर भगवान श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का पूजन, महारुद्राभिषेक एवं महाआरती का पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।

भवदीय,
डॉ. अमिता दीपेश पाण्डेय
मीडिया प्रभारी
श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर
सुभाष चौक, सरकंडा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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