गुप्त नवरात्रि : श्री पीतांबरा पीठ में अष्टमी पर माँ बगलामुखी का विशेष महापूजन

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बिलासपुर।सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि महापर्व श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। महापर्व के दौरान प्रतिदिन विशेष पूजन, अभिषेक, हवनात्मक महायज्ञ एवं देवी आराधना का क्रम जारी है।गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर श्री ब्रह्मशक्ति माँ बगलामुखी देवी का विशेष पूजन, स्वर्ण-पीत श्रृंगार, गुप्त महाआराधना एवं हवनात्मक महायज्ञ आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन रात्रि 8:00 बजे से 12:30 बजे तक आयोजित होने वाले श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ में अष्टमी के अवसर पर विशेष आहुतियाँ अर्पित की जाएँगी, जिसके पश्चात भव्य महाआरती होगी।

हरिद्रा सरोवर में भगवान श्री हरि विष्णु ने की थी माँ बगलामुखी की प्रथम साधना

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि सतयुग में एक बार भीषण प्रलयंकारी तूफान से संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई थी। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान श्री हरि विष्णु ने सौराष्ट्र (वर्तमान गुजरात) स्थित हरिद्रा सरोवर के तट पर आदिशक्ति की कठोर तपस्या की।भगवान श्री हरि विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर महात्रिपुरसुंदरी के हृदय से पीतवर्ण, जलवेष्टित दिव्य स्वरूप में माँ बगलामुखी देवी प्रकट हुईं। माता ने अपनी दिव्य स्तंभन शक्ति से उस प्रलयंकारी तूफान को तत्काल शांत कर ब्रह्मांड की रक्षा की। इसी कारण जनमानस में यह मान्यता है कि माँ बगलामुखी की सर्वप्रथम आराधना स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु ने की तथा उनसे ब्रह्मास्त्र स्वरूप स्तंभन विद्या प्राप्त की।

ब्रह्मा जी से परशुराम और द्रोणाचार्य तक पहुँची महाविद्या

आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि भगवान श्री हरि विष्णु के पश्चात यह महाविद्या ब्रह्मा जी को प्राप्त हुई। ब्रह्मा जी से यह ज्ञान सनत्कुमारों, देवर्षि नारद तथा भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान परशुराम तक पहुँचा। महाभारत काल में आचार्य द्रोणाचार्य ने भी भगवान परशुराम से इस महाविद्या की साधना कर युद्धकौशल एवं शास्त्रबल में सिद्धि प्राप्त की।

माँ श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी की आराधना का महत्व

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि जनमानस में माँ श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी की सर्वाधिक मान्यता शत्रु बाधा, वाद-विवाद एवं संकटों के निवारण की अधिष्ठात्री देवी के रूप में है। उनकी उपासना विशेष रूप से वाद-विवाद, शास्त्रार्थ एवं न्यायालयीन मुकदमों में विजय प्राप्त करने, अकारण अत्याचार एवं शत्रुओं के षड्यंत्रों को रोकने, असाध्य रोगों से मुक्ति, बंधन-मुक्ति, ग्रह शांति एवं उपद्रवों के शमन के लिए की जाती है। इसके अतिरिक्त संतान प्राप्ति, जिनका वैवाहिक योग नहीं बन रहा हो उन्हें मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति, सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता तथा जीवन के प्रत्येक कार्य की सिद्धि एवं मनोकामना पूर्ति के लिए भी माँ श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी की आराधना अत्यंत फलदायी एवं कल्याणकारी मानी जाती है।

महापर्व के दौरान प्रतिदिन हो रहे हैं विशेष धार्मिक अनुष्ठान

महापर्व के दौरान प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे माँ श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन एवं अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। इसके पश्चात श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक तथा श्री महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती का श्रीसूक्त के षोडश मंत्रों द्वारा दुग्धाभिषेक संपन्न होता है। साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम एवं सिद्धिविनायक भगवान गणेश का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है। रात्रि 8:00 बजे से 12:30 बजे तक श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ एवं महाआरती का आयोजन निरंतर हो रहा है।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने समस्त श्रद्धालुओं से गुप्त नवरात्रि महापर्व में सहभागी बनकर माँ श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया है।

 

विनीत

डॉ. अमिता दीपेश पाण्डेय
मीडिया प्रभारी
श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर
सुभाष चौक, सरकंडा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) – 495006

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