जनहित सर्वोपरि: बिजली टावर लगाने के लिए भूमि स्वामी की सहमति आवश्यक नहीं—हाईकोर्ट

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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिजली ट्रांसमिशन लाइन और टावर निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के निर्माण को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिजली अधिनियम और टेलीग्राफ एक्ट के तहत सार्वजनिक हित में ट्रांसमिशन लाइन बिछाने या बिजली टावर खड़े करने के लिए जमीन मालिक की पहले से अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि बिजली पारेषण राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। ऐसे मामलों में जमीन मालिक को केवल नियमों के अनुसार मुआवजे का अधिकार प्राप्त है। वह केवल इस आधार पर निर्माण कार्य रोकने के लिए स्थगन आदेश की मांग नहीं कर सकता कि उसकी जमीन पर टावर लगाया गया है। यह आदेश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने ‘ए.एस. एसोसिएट्स’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया।

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