कल्याण पत्रिका के संपादक राधेश्याम खेमका नही रहे : शंकराचार्य ने दी श्रद्धांजलि

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कल्याण पत्रिका के संपादक राधेश्याम खेमका नही रहे , शंकराचार्य ने दी श्रद्धांजलि

भुवन वर्मा बिलासपुर 4 अप्रैल 2020

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

वाराणसी — सनातन धर्म की अद्वितीय प्रसिद्ध पत्रिका कल्याण के संपादक और गीताप्रेस गोरखपुर के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका (87 वर्षीय) का आकस्मिक निधन हो गया है।उन्होंने केदारघाट अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे पुत्र राजाराम खेमका , पुत्री राज राजेश्वरी देवी चोखानी , भतीजे गोपाल राय खेमका , कृष्ण कुमार खेमका , गणेश खेमका सहित नाती-पोतों से भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। वे पिछले 15 दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। अस्वस्थता की अवस्था में उन्हें रवीन्द्रपुरी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले दो दिनों से उन्हें केदार घाट स्थित आवास लाया गया था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार हरिश्चंद्र घाट पर किया गया जहां उनके एकमात्र पुत्र राजाराम खेमका ने उन्हें मुखाग्नि दी। राधेश्याम खेमका ने 38 वर्षों से गीताप्रेस में अपनी भूमिका का निर्वाचन करते हुये कई धार्मिक संस्करणों का संपादन किया। म्रदुल वाणी के लिये प्रसिद्ध राधेश्याम खेमका के पिता सीताराम खेमका मूलत: बिहार के मुंगेर जिले से यहां आये थे। गीताप्रेस से कल्याण पत्रिका का प्रकाशन 1926 में शुरू हुआ। पत्रिका के प्रथम संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार थे। राधेश्याम खेमका ने सबसे पहले वर्ष 1982 में नवंबर व दिसंबर के कल्याण अंक का संपादन किया था।उसके बाद मार्च 1983 से वे लगातार संपादन का कार्य सम्हालते रहे। तबियत खराब होने के बावजूद भी उन्होंने अप्रैल 2021 तक के अंकों का पूरे उत्साह के साथ संपादन किया है। उनके संपादन में कल्याण के 38 वार्षिक विशेषांक, 460 सम्पादित अंक प्रकाशित हुये। इस दौरान कल्याण की 09 करोड़ 54 लाख 46 हजार प्रतियां प्रकाशित हुईं। कल्याण में पुराणों एवं लुप्त हो रहे संस्कारों व कर्मकांड की पुस्तकों का प्रामाणिक संस्करण भी उनके राधेश्याम खेमका के संपादन में ही प्रकाशित हुआ। वर्ष 1982 से राधेश्याम खेमका की देखरेख में कल्याण का प्रकाशन हो रहा है। दो पीढ़ियों से खेमका काशी निवासी रहे और सर्वभूतहृदय यतिचक्रचूड़ामणि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी , शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती , पुरी के पूर्व शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ और वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती , प्रसिद्ध कथा व्यास रामचंद्र जी डोंगरे जैसे संतों से विशेष संपर्क और सानिध्य रहा। खेमका वाराणसी की प्रसिद्ध संस्थायें मारवाड़ी सेवा संघ , मुमुक्षु भवन , श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल गोदौलिया , बिड़ला अस्पताल मोटरोडरी , काशी गोशाला ट्रस्ट से जुड़े रहे और वाराणसी कागज व्यवसाय से भी जुड़े रहे। उनके निधन से उनके केदारघाट स्थित आवास पर शोक श्रद्धाजंलि देने वालों का तांता लगा रहा। उनके निधन से गीताप्रेस समेत धर्म-कर्म से जुड़े क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद गीता प्रेस गोरखपुर में भी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया , जिसमें प्रेस के कर्मचारियों ने उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की।

जगद्गुरू शंकराचार्य ने दी श्रद्धांजलि

ज्योतिष एवं शारदा पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि राधेश्याम खेमका के काशीवास का समाचार सुनकर दुख हुआ , ये सीताराम खेमका के अनुयायी और पुत्र दोनों थे। इन्होंने अपने जीवन में काशीवास करते हुये कल्याण के माध्यम से धार्मिक जनता की सेवा की और अनकों धार्मिक कार्यों के आयोजन में उनकी रूचि थी। जो पूज्य स्वामी करपात्री जी के द्वारा नवीन विश्वनाथ जी की स्थापना हुई थी उसमें भी सेवा का भार ये उठाते थे। इनके निधन से धार्मिक जगत की क्षति हुई है । हम यह चाहेंगे कि उनके उत्तराधिकारी उनके कार्यों को आगे बढ़ायें और जैसे उनके पितामह और पिता धर्म की सेवा करते रहे वैसे ही आगे बढ़कर धर्म की सेवा करते रहें।

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