बिलासपुर अमन शांति का शहर है था और रहेगा : यहां की तासीर साम्प्रदायिक दंगे की कभी नहीं रही – अनिल टाह

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बिलासपुर – शहर में भाई बहनों की पवित्र त्यौहार रक्षा बंधन पर हुए पुराने वैमनस्यता के कारण दो समुदायों में हुए मारपीट और पत्थरबाजी की निंदा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व समाजसेवी अनिल टाह ने विचार जारी करते हुए कहा है कि बिलासपुर में कभी भी जाति और संप्रदाय के नाम पर हिंसा नहीं हुआ है जहां तक मुझे जानकारी है जब भारत के सबसे ताकतवर और प्रसिद्ध प्रधानमंत्री माननीय श्रीमती इंदिरा गांधी की निर्मम हत्या हुई थी । तब पूरे देश में सांप्रदायिकता भड़का था ऐसे समय में भी बिलासपुर ने भद्र और भाईचारा का परिचय देते हुए सम्पूर्ण बिलासपुर में अमन शांति के साथ वातावरण निर्मित किया था।
आज के समय में जब भारत का युवा वर्ग सबसे ज्यादा बुद्धिमान और संवेदनशीन है। बिलासपुर की फिजा में कुछ लोग जहर घोल रहे है जो बिलासपुर के लिए सही नहीं है। जिसके बकौल मै अनिल टाह निंदा करता हूं एवं शहर के सभी संप्रदाय के लोगों से अमन शांति के साथ रहने की विनम्र अपील करता हूं। विदित हो कि बिलासपुर शहर और अंचल की पहचान हमेशा से प्रेम, भाईचारे, आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता के लिए रही है। रक्षाबंधन पर्व की रात कोतवाली थाना क्षेत्र के खपरगंज में हुई घटना अत्यंत अशोभनीय बताते हुए शहरवासियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।

टाह ने कहा कि बिलासपुर को बिलासादाई, अरपा माई, न्यायधानी और संस्कृतिधानी के नाम से छत्तीसगढ़ और देश में जाना जाता है। यह शहर अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोगों के बीच प्रेम, भाईचारे और आपसी विश्वास की मिसाल रहा है। ऐसे में शुक्रवार रात खपरगंज में घटित घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है, जिसे किसी भी स्थिति में सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए।

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