NEET-SS 2025 काउंसलिंग में देरी से संकट: अभ्यर्थियों ने उठाई ‘एक परीक्षा, एक मानक’ और तत्काल काउंसलिंग की मांग

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नई दिल्ली:देशभर के हजारों सुपर-स्पेशलिटी (DM और MCh) चिकित्सा अभ्यर्थी इस समय गहरे असमंजस और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। NEET-SS 2025 परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने के बावजूद, अभ्यर्थी महीनों से काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। इन-सर्विस आरक्षण, क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में छूट और सीट सरेंडर करने जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर अंतिम निर्णय न होने के कारण काउंसलिंग प्रक्रिया लगातार टल रही है।

अभ्यर्थियों ने अब एकजुट होकर ‘एक परीक्षा, एक मेरिट सूची और सभी के लिए एक समान मानक’ की मांग तेज कर दी है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और सीट सरेंडर का मामला
अभ्यर्थियों का कहना है कि 29 मई 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (WP(C) No. 53/2022 में) दिए गए अंतरिम निर्देशों के अनुसार, राज्य स्तरीय काउंसलिंग के बाद खाली बची सुपर-स्पेशलिटी सीटों को ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में वापस (सरेंडर) किया जाना अनिवार्य है। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि देश की बहुमूल्य सुपर-स्पेशलिटी सीटें खाली न रहें और उनका आवंटन पूरी तरह से राष्ट्रीय मेरिट के आधार पर हो सके।
अभ्यर्थियों ने तमिलनाडु सरकार से विशेष रूप से आग्रह किया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का पालन करते हुए संबंधित सीटों को जल्द से जल्द सरेंडर करे, ताकि महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवा (DGHS) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) बिना किसी देरी के काउंसलिंग प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर सकें।
एक परीक्षा में दोहरे मानदंड’ पर उठाए सवाल
विज्ञप्ति में इन-सर्विस (सरकारी सेवा में कार्यरत) डॉक्टरों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में ढील देने की कोशिशों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि NEET-SS एक समान राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। इसमें किसी विशेष वर्ग के लिए अलग या कम क्वालिफाइंग मानक तय करना निष्पक्षता, समानता और राष्ट्रीय मेरिट की मूल भावना के खिलाफ है।
> “हम सरकारी डॉक्टरों द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में दिए जा रहे योगदान का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन सुपर-स्पेशलिटी जैसे अत्यंत विशिष्ट चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश का आधार केवल और केवल योग्यता (मेरिट) तथा पारदर्शी मानदंड ही होने चाहिए।”
न्यायिक टिप्पणियों पर जताई चिंता
अभ्यर्थियों ने हाल ही में माननीय न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की उन टिप्पणियों पर भी चिंता जताई है, जिसमें संकेत दिया गया था कि इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए कम क्वालिफाइंग मानक उचित हो सकते हैं।
अभ्यर्थियों के अनुसार, ऐसी टिप्पणियाँ उन हजारों गैर-सरकारी डॉक्टरों के योगदान की अनदेखी करती हैं जो निजी, शैक्षणिक या अन्य चिकित्सा संस्थानों में समान समर्पण के साथ दिन-रात सेवा दे रहे हैं और केवल अपनी योग्यता के बल पर इस कठिन परीक्षा में प्रतिस्पर्धा करते हैं।
देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है सीधा असर
काउंसलिंग में हो रही इस अनिश्चितकालीन देरी का असर सिर्फ डॉक्टरों के करियर पर ही नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि काउंसलिंग में देरी से:
* डॉक्टरों के प्रशिक्षण कार्यक्रम (Training Schedule) प्रभावित हो रहे हैं।
* अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों की कार्ययोजना पर असर पड़ रहा है।
* भविष्य में देश के मरीजों को मिलने वाली विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं में कमी आ सकती है।
अभ्यर्थियों ने केंद्र सरकार, DGHS, MCC और संबंधित राज्य सरकारों से अपील की है कि डॉक्टरों के भविष्य और देश की स्वास्थ्य सेवा को ध्यान में रखते हुए NEET-SS 2025 की काउंसलिंग तत्काल प्रभाव से शुरू की जाए।

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