हजारी लाल वर्मा ने गांव को भेंट की गौ गोविंद गोपाल की प्रतिमा
सारागांव।गत सत्रह अप्रैल को ग्राम- निलजा (पो.आ.- सारागांव जिला रायपुर) में गोविंद गोपाल की प्रतिमा का मातर ठऊर में पवन महराज द्वारा विधि विधान से हवन पूजन पश्चात लोकार्पण किया गया। हजारी लाल वर्मा ने बताया कि मेरी कर्मभूमि भिलाई इस्पात संयंत्र की लौह अयस्क नगरी दल्ली राजहरा में रही। नौकरी से अवकाश प्राप्ति के बाद से मन में जन्मभूमि को स्मृति चिन्ह भेंट के विषय में लगातार विमर्श चलता रहा। आज प्रयास सार्थक हुआ। गांव में मातर मनाने की शुरुवात को याद करते हुए आपने बताया कि 1965 में ‘गोवर्धन पूजा समिति’ के नाम से हमने मातर मनाने की शुरूवात की थी तब मैं आठवीं क्लास में पढ़ता था। बातों बातों में हम चार मित्रों ने सोचा कि आसपास में कहीं मातर का आयोजन नहीं किया जाता क्यों न हम सब अपने गांव में इसका आयोजन करें। कुछ और मित्र सहर्ष तैयार हो गए।
हमनें गांव के सियानो से इस विषय में बात की उन्होंने कहा अभी तो तुम जोश में शुरू कर दोगे पर जब तुम सब पढ़ने या नौकरी में बाहर चले जाओगे तब यह आयोजन कैसे होगा। हमने कहा हम सब मिलकर यह आयोजन करेंगे और आगे भी इस जिम्मेदारी को निभाएंगे। और पारंपरिक गोवर्धन पूजा जिस तरह से होती आ रही है उसे वैसे ही चलने देंगे। उसके बाद से ही हम सभी मित्र सालों साल अपने खर्चे पर इसका आयोजन करते रहे। रात-रात भर जाग़ कर पुरानी मटकियों और बोरियों से गोवर्धन पहाड़ का रूप देते थे खुद ही रंग बनाकर उसे रंगते थे। पहले पहल खुद ही गायन और वादन कर कार्यक्रम भी करते बाद में आपस में चंदा करके बाहर से कलाकार बुलवाकर रात भर कार्यक्रम करवाते थे। यादव समाज के भाइयों ने भी कमान संभाल ली।वे मातर के दिन भांठा में सबको बिठाकर दूध भात खिलाते थे। उनके द्वारा अब भी सबको मीठा दूध पिलाया जाता है।
बाद में ग्राम सभा ने इसकी जिम्मेदारी ली और अब तक निरंतर यह आयोजन होता आ रहा है। धीरे-धीरे हमारे कई साथी दिवंगत हो गए। स्वर्गीय राम अवतार साहू, स्व.जीवन लाल सेन, स्व.लखन लाल साहू आदि के योगदान को याद कर उन्हें नमन करते हुए समिति के शेष सदस्यों रोम नाथ वर्मा ,रमेश कुमार देवांगन, नारद निर्मलकर,शत्रुघ्न वर्मा आदि को सम्मानित किया गया। तथा इस आयोजन को तब से अब तक निर्बाध रूप से सफलता पूर्वक आयोजित करने वाले यादव समाज के प्रमुख का आभार प्रकट करते हुए सम्मानित किया गया और आगे भी प्रतिमा की देखरेख और सफल आयोजन हेतु निवेदन किया गया।
पुरानी पीढ़ी द्वारा नई पीढ़ी को इन भावों के साथ हस्तांतरण किया गया कि –
नव पीढ़ी के नवल दीप, तुम सूरज बनकर चमको। अंधेरों की हर बिसात को, धरासाईं कर दमको।।
रखो मान अपनी संस्कृति का,धर्म ध्वजा लहराओ।
मात पिता गुरु से आशीष ले, रोज तिरंगा फहराओ।
जन्मभूमि की धूली , मस्तक पर रोज लगाओ
जन्म सफल करो अपना अपनों का मान बढ़ाओ।।
सभी ने मूर्तिकार राकेश कुमार साहू की कला की प्रशंसा की आयोजक हजारी लाल वर्मा और श्रीमती सुमन वर्मा ने उन्हें सम्मानित कर आशीर्वाद दिया तथा पंजीरी प्रसाद और गीता भेंट कर उपस्थित परिवारजनों और ग्रामवासियों का आभार प्रकट किया। भजन मंडली ने कृष्ण भजनों से आयोजन की गरिमा को पूर्णता देते हुए मंत्र मुग्ध कर दिया।
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