कॉविड … . मध्य भारत का पहला प्रयोग बिलासपुर के केयर एंड क्योर हॉस्पिटल में एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी : डॉ सिद्धार्थ वर्मा के कुशल नेतृत्व में

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कॉविड … . मध्य भारत का पहला प्रयोग बिलासपुर के केयर एंड क्योर हॉस्पिटल में एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी : डॉ सिद्धार्थ वर्मा के कुशल नेतृत्व में

भुवन वर्मा बिलासपुर 28 मई 2021

बिलासपुर । कोरोना से साहसिक लड़ाई में अंचल के प्रख्यात चिकित्सक डॉ एस के वर्मा एवं ख्यातिप्राप्त गायनेकोलॉजिस्ट डॉ सुनीता वर्मा एक ऐसे योद्धा के रूप में हैं । जो की प्रारंभिक लक्षणों के सामने आते ही बिना देर किये हुए टेस्ट कराया और नतीजा कोरोना पॉजिटिव आने पर नतीजा कोरोना पॉजिटिव आने पर तत्काल होम आइसोलेट होकर अपना ट्रीटमेंट चालू किया, चूंकि वे स्वयं एक डॉ. दंपत्ति हैं और केयर एन क्योर हॉस्पिटल के संस्थापक है, उनका ट्रीटमेंट उनके पुत्र क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट और हॉस्पिटल डायरेक्टर डॉ सिद्धार्थ वर्मा और अन्य डॉक्टरों की देख रेख में चालू किया गया है ।

कोरोना जैसी बिमारी और उस पर उम्र और शुगर ब्लड प्रेशर हार्ट की बीमारी को देखते हुए डॉ. सिद्धार्थ वर्मा ने प्राम्भिक चिकित्सा के साथ साथ एक नए किस्म की मेडिसिन के उपयोग करने का फैसला किया यह मेडिसिन, डॉ सिद्धार्थ वर्मा के अनुसार

मेडिकल जगत में यह कैसीरिवीमैब, इमडेविमैब” के रूप में जानी जाती है और यह भी ज्ञात हो की सम्पूर्ण मध्य भारत के छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में यह मेडिसिन का प्रयोग पहली बार हमारे शहर में इसका उपयोग अपने माता पिता पर करने का फैसला लिया है।

इस मेडिसिन का सर्वप्रथम उपयोग उस वक्त अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर किया गया था और नतीजे काफी सकारात्मक थे। डॉ सिद्धार्थ वर्मा बताते हैं की उनके द्वारा यही दवा इस्तेमाल की गयी, डॉ सिद्धार्थ वर्मा इस दवा के इस्तेमाल के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि :

यह दवाई ऐसे मरीजों को दी जाती है जो की सामान्य या सामान्य से थोड़ा अधिक (माध्यम) रूप से ग्रसित है और जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं है और जो हॉस्पिटल में भर्ती नहीं है लेकिन इन मरीजों में हाई रिस्क कम्प्लीकेशन होने की संभावना बहुत ज्यादा है और हाई रिस्क जैसे की मोटापा, ब्लड प्रेशर की बीमारी, डॉयबिटीज़ कैंसर किडनी की बीमारी, ट्रांसप्लांट पेशेंट, प्रतिरोधक क्षमता का कम करने वाली दवाओं पर निर्भर मरीज, हृदय रोग, सी ओ पी डी सिकलिंग के मरीज, जन्मजात हृदय रोग, अस्थमा, कैंसर पीड़ित शामिल हैं। इन मरीजों का कोरोना होने पर गंभीर होने का खतरा काफी रहता है, यह दवाई इन मरीजों के इलाज़ में किसी भी जटिलता के कारण हॉस्पिटल में भर्ती होने की आवश्यकता को 70% तक कम कर देती है। यहाँ यह ज्ञात होने की आवश्यक है की यह दवाई वैक्सीन की जगह नहीं ले सकती क्योंकि वैक्सीन का अपना एक अलग महत्त्व है। यह दवाई 12 वर्ष से ऊपर के ऊपर बच्चों जिनका वजन 40 किलोग्राम से अधिक है के लिए भी कारगर है यह दवाई रिपोर्ट आने 3-5 दिन के अंदर ही लिया जाना आवश्यक है। मरीज के अधिक सीरियस हो जाने के पश्चात् अथवा रिपोर्ट आने के 5-7 दिन के बाद इस दवा का उपयोग प्राणघातक हो सकता है। यह इंजेक्शन मरीज को आई सी यू केयर में रह कर डे केयर थैरेपी के रूप में लगवाना होता है और मरीज उसी दिन अपने घर वापस जा सकता है।

यहाँ इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है की इंजेक्शन लगने के बादभी मरीज को आइसोलेशन प्रोटोकॉल के सारे नियमों का पालन करना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और हाथों को समय समय पर सेनिटाइज़ करना भी आवश्यक है।

यहाँ यह बताना आवश्यक है की की अभी हाल ही में भारत सरकार ने को इमर्जेन्सी उपयोग हेतु अनुमति प्रदान की है, इसके पहले यह दवा अमेरिका, सिंगापुर यूरोपीय देशो और दुबई में उपयोग किया जा रहा था, जो की वहां काफी कारगर सिद्ध हुई है और नतीजे काफी सकारात्मक मिले हैं, जिससे कोरोना के उपचार में एक नयी उम्मीद कि किरण दिखाई दी है।

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