विचारों की मशाल थामे बदलाव के सारथी: डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंगरौल
रायपुर।”सच्ची समाज सेवा किसी पद या प्रतिष्ठा की मोहताज नहीं होती, वह तो अंतर्मन से उपजी एक ऐसी पुकार है; जो दूसरों के आंसुओं को पोंछने और समाज को नई दिशा देने के लिए विवश कर देती है।”
छत्तीसगढ़ की पावन माटी ने हमेशा से ऐसे सपूतों को जन्म दिया है( जिन्होंने अपनी बौद्धिक क्षमता और नि:स्वार्थ कर्मों से न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इसी गौरवमयी कड़ी में एक सशक्त और सम्मानित नाम उभरकर सामने आता है— डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंगरौल। वे महज एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, उत्कृष्ट लेखन और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक चलता-फिरता संस्थान हैं।
संघर्ष से शिखर तक का सफर
डॉ. जीतेंद्र सिंगरौल का जीवन यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो परिस्थितियां कभी भी आपके कदमों को नहीं रोक सकतीं। एक साधारण ग्रामीण परिवेश के साथ किसान परिवार के पृष्ठभूमि से निकलकर उच्च शैक्षणिक और सामाजिक स्तर प्राप्त करने तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। छात्र जीवन से ही उनके भीतर समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करने का जो जज्बा था, उसने आगे चलकर उन्हें एक मुकम्मल सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक के रूप में स्थापित किया।
लेखन और वैचारिक क्रांति की धार
एक संवेदनशील लेखक के रूप में डॉ. सिंगरौल की कलम हमेशा समाज की विसंगतियों पर प्रहार करती है और सकारात्मक बदलाव की वकालत करती है। उनके आलेखों में छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, लोकजीवन के साथ-साथ समसामयिक सामाजिक चुनौतियों की गहरी समझ दिखाई देती है। सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर भी वे लगातार सक्रिय रहते हैं। विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन और युवाओं में बढ़ती अवसाद व आत्महत्या की प्रवृत्तियों जैसे संवेदनशील विषयों पर उनके व्यावहारिक विचार और वीडियो लोगों को जीवन जीने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। उनके नेतृत्व में सामाजिक अंकेक्षण से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम, ग्राम स्तरीय संवाद, जन-जागरूकता अभियान और क्षमता विकास गतिविधियों ने अनेक लोगों को शासन की योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे युवाओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पारदर्शिता एवं जवाबदेही के मूल्यों के प्रति प्रेरित करते रहे हैं।
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का गौरव
डॉ. सिंगरौल की नि:स्वार्थ सामाजिक सेवाओं और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को देश की सर्वोच्च संस्थाओं ने भी स्वीकार किया है। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा उन्हें कई राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है:
1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार (2000-01): युवा गतिविधियों और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए।
2. राष्ट्रीय युवा पुरस्कार (2007-08): देश के विकास और समाज सेवा में उनके अद्वितीय योगदान को रेखांकित करते हुए।
3. जिला युवा पुरस्कार: बिलासपुर जिला प्रशासन द्वारा उनके स्थानीय स्तर पर किए गए जमीनी कार्यों के प्रोत्साहन स्वरूप।
युवा पीढ़ी के मार्गदर्शक
आज जब युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के आभासी संसार और भटकाव के दौर से गुजर रही है, डॉ. सिंगरौल उनके बीच जाकर उन्हें रचनात्मकता से जोड़ने का काम कर रहे हैं। विभिन्न कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों और संवेदीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से वे युवाओं को राष्ट्र हित और सामाजिक उत्तरदायित्वों का पाठ पढ़ाते हैं।
डॉ. सिंगरौल का जीवन संघर्ष और संकल्प की कहानी है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सूचना प्रौद्योगिकी से लेकर सामाजिक विकास तक अनेक क्षेत्रों में काम किया। युवा अवस्था में ही उन्होंने ग्रामीण युवाओं के संगठन, कौशल विकास, विधिक साक्षरता और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से समाज को जोड़ने का प्रयास किया।
पारदर्शिता, जनभागीदारी और सुशासन के सजग प्रहरी
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सफलता तभी संभव है जब योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी सुनिश्चित हो। इन्हीं मूल्यों को व्यवहार में उतारने के लिए समर्पित व्यक्तित्वों में डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंगरौल का नाम उल्लेखनीय है। उन्होंने सामाजिक अंकेक्षण को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर जनसशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया है। डॉ. सिंगरौल ने ग्रामीण विकास, मनरेगा, पंचायत व्यवस्था तथा सामाजिक अंकेक्षण के क्षेत्र में जागरूकता, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया है। उनका मानना है कि जब नागरिक अपने अधिकारों और योजनाओं की जानकारी रखते हैं तथा उनके क्रियान्वयन की समीक्षा में भाग लेते हैं, तभी सुशासन की वास्तविक स्थापना होती है।
डॉ. सिंगरौल का व्यक्तित्व प्रशासनिक दक्षता, संवेदनशील नेतृत्व और सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। वे मानते हैं कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और जनता स्वयं विकास प्रक्रिया की सहभागी बने। आज जब सुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है, तब डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंगरौल जैसे कर्मयोगी समाज और प्रशासन के बीच विश्वास का सेतु बनकर कार्य कर रहे हैं। उनका योगदान न केवल सामाजिक अंकेक्षण को मजबूत बना रहा है, बल्कि पारदर्शी एवं सहभागी शासन व्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रेरणा प्रदान कर रहा है।
एक मुकम्मल इंसानियत का नाम
डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंगरौल की सबसे बड़ी खूबी उनका सहज और सुलभ होना है। ज्ञान का अहंकार उन्हें छू तक नहीं गया है। डॉ. सिंगरौल का पूरा जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि इरादे मजबूत हों और दिल में समाज के लिए कुछ गुजरने का जज्बा हो, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ को उनके जैसे समर्पित विचारकों और सामाजिक योद्धाओं पर गर्व है, जो चुपचाप धरातल पर बदलाव की एक नई कहानी लिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ को अपने इस बौद्धिक योद्धा और सामाजिक प्रहरी पर गर्व है, जो अपनी कलम और कर्म, दोनों से समाज को एक सुंदर आकार देने में जुटे हैं।
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