चरवाहों को ₹10916 व गौ-सेवकों को ₹13126 मिलेंगे हर माह 36 गौधामों में से 29 में काम शुरू : स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़कों पर घूमने वाले गौ-वंशीय पशुओं के सरंक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रदेश में 1460 गौधाम बनाने की योजना है। लेकिन अभी तक सिर्फ 36 गौधाम ही स्वीकृत किए गए हैं जबकि इनमें से 32 गौधामों का पंजीयन हो पाया है। दरअसल प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम बनाने की योजना है। पहले चरण में बिलासपुर समेत 11 जिलों के 29 गौधामों का उद्घाटन किया गया है। जबकि अन्य गौधामों में काम की गति सुस्त है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 14 मार्च, 2026 को बिलासपुर जिले के लखासर गांव में ‘गौधाम योजना’ का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य आवारा और परित्यक्त पशुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना और गाय आधारित जैविक उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। बताया है कि गौधामों में रखरखाव और मरम्मत के लिए प्रति सुविधा प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये आवंटित करेगी। इसी तरह गौवंशों की सुरक्षा करने वाले चरवाहों को 10,916 और गौ-सेवकों 13,126 रुपए का मासिक भुगतान का प्रावधान किया गया है।

कृत्रिम गर्भाधान को भी बढ़ावा-पशु संवर्धन कार्यक्रम कृत्रिम गर्भाधान एवं वत्सोंत्पादन का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। कृत्रिम गर्भाधान का क्षेत्र विस्तार हेतु परिवहन आदि का भी सुचारू व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किये गये हैं। वहीं राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत सेक्स शॉर्टेज सीमेन से कृत्रि गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2026-2 में इसके लिए हितग्राही अंशदान में छूट दिए जाने क प्रावधान किया गया है।
बताया गया है कि इन गौधामों को ‘सुरभि गौधाम’ के नाम से जाना जाएगा। ये सभी गौधाम पशुपालन और वर्मीकम्पोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशकों जैसे मूल्यवर्धित-उत्पादों के उत्पादन के लिए प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में भी काम करेंगे। यह योजना स्थानीय स्वरोजगार प्रदान करने के लिए गाय आधारित सूक्ष्म उद्यम और जैविक खेती की ओर बदलाव को उजागर करती है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है। इसी तरह सरकारी वित्त पोषित सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन के लिए पंजीकृत समितियों और गैर सरकारी संगठनों के उपयोग को प्रदर्शित करता है।

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