बुधवार को श्री पीताम्बरा पीठ में महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ और प्रदोषकाल में विशेष प्रदोष पूजन का आयोजन शाम 5:00 बजे
बिलासपुर।सरकण्डा स्थित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में सावन महोत्सव श्रावण मास मे महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ नमक चमक विधि द्वारा निरंतर किया जा रहा हैं।11 जुलाई 2025 से आरंभ सावन के अवसर पर त्रिदेव मंदिर में महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा हैं। यह आयोजन 9 अगस्त सावन शुक्ल पूर्णिमा तक निरंतर चलेगा। इस अवसर पर नित्य प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक नमक चमक विधि से किया जा रहा है।
इसी कड़ी में बुधवार को प्रातः 9:00 से 1:30 तक महारुद्राभिषेक किया जाएगा तत्पश्चात प्रदोष काल में त्रयोदशी प्रदोष पूजा सायं 5:00 बजे प्रारंभ होगा जिसमें 3000 पुष्प महादेव को शिव सहस्त्रनाम द्वारा समर्पित किया जाएगा।
पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने कहा कि
प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो भगवान शिव की पूजा और आराधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है। संक्षेप में यह कि चंद्र को क्षय रोग था, जिसके चलते उन्हें मृत्युतुल्य कष्टों हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन पुन:जीवन प्रदान किया अत: इसीलिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा। प्रत्येक माह में जिस तरह दो एकदशी होती है उसी तरह दो प्रदोष भी होते हैं। त्रयोदशी (तेरस) को प्रदोष कहते हैं।
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा से व्यक्ति को अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्रत रखने से व्यक्ति के सभी दोष मिट जाते हैं और उसे अपने जीवन में सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत के प्रकार
प्रदोष व्रत के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशेष महत्व है। इनमें से कुछ प्रमुख प्रकार हैं:
– रवि प्रदोष: रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति को लंबी उम्र और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
– सोम प्रदोष: सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है।
– भौम प्रदोष: मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति को स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
– बुध प्रदोष: बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति को अपनी इच्छा अनुसार फल की प्राप्ति होती है।
– गुरु प्रदोष: गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति को अपने दुश्मनों से छुटकारा मिलता है।
– शुक्र प्रदोष: शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति को सौभाग्य की वृद्धि होती है।
– शनि प्रदोष: शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति को शनि की बाधा से मुक्ति मिलती है और संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत उत्तम माना गया है।
प्रदोष व्रत रखने के लाभ
प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को कई लाभ होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख लाभ हैं:
– भगवान शिव की कृपा: प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
– सुख और शांति: प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को अपने जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति होती है।
– समृद्धि: प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को अपने जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है।
– स्वास्थ्य: प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
– सफलता: प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह व्रत रखने से व्यक्ति को अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसलिए, यदि आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो प्रदोष व्रत जरूर रखें।
इसी कड़ी में श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव के महारुद्राभिषेक में श्री छत्रप्रताप सिंह, छाया सिंह, सुपर्णा सिंह उपस्थित हो पूजन कर पुण्य लाभ प्राप्त किए।
भवदीय
पं.मधुसूदन पाण्डेय व्यवस्थापक
श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर सुभाष चौक सरकंडा बिलासपुर छत्तीसगढ़
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