स्वाधीनता सेनानियों को सादर नमन: आजादी का अमृत महोत्सव भारत की जनता को समर्पित – द्रोपति मुर्मू महामहिम राष्ट्रपति

भुवन वर्मा बिलासपुर 14 अगस्त 2022

अरविन्द तिवारी ने की रिपोर्ट

नई दिल्ली – चौदह अगस्त के दिन को विभाजन-विभीषिका स्मृति-दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस स्मृति दिवस को मनाने का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव , मानव सशक्तीकरण और एकता को बढ़ावा देना है। हमने 15 अगस्त 1947 के दिन औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों को काट दिया था। उस दिन हमने अपनी नियति को नया स्वरूप देने का निर्णय लिया था। उस शुभ-दिवस की वर्षगांठ मनाते हुये हम लोग सभी स्वाधीनता सेनानियों को सादर नमन करते हैं। उन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया ताकि हम सब एक स्वाधीन भारत में सांस ले सकें।
उक्त बातें महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत की आज़ादी के पचहत्तर साल पूरे होने के उपलक्ष्य में स्वतंत्रता दिवस के पूर्व संध्या राष्ट्र को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने छिहत्तरवें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को मैं हार्दिक बधाई भी दी। उन्होंने कहा भारत की आजादी हमारे साथ-साथ विश्व में लोकतंत्र के हर समर्थक के लिये उत्सव का विषय है। जब भारत स्वाधीन हुआ तो अनेक अंतरराष्ट्रीय नेताओं और विचारकों ने हमारी लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली की सफलता के विषय में आशंका व्यक्त की थी , उनकी इस आशंका के कई कारण भी थे। उन दिनों लोकतंत्र आर्थिक रूप से उन्नत राष्ट्रों तक ही सीमित था. विदेशी शासकों ने वर्षों तक भारत का शोषण किया था , इस कारण भारत के लोग गरीबी और अशिक्षा से जूझ रहे थे। लेकिन भारतवासियों ने उन लोगों की आशंकाओं को गलत साबित कर दिया। भारत की मिट्टी में लोकतंत्र की जड़ें लगातार गहरी और मजबूत होती गईं। राष्ट्रपति ने कहा अधिकांश लोकतान्त्रिक देशों में वोट देने का अधिकार प्राप्त करने के लिये महिलाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था। लेकिन हमारे गणतंत्र की शुरुआत से ही भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया। इस प्रकार आधुनिक भारत के निर्माताओं ने प्रत्येक वयस्क नागरिक को राष्ट्र-निर्माण की सामूहिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर प्रदान किया। भारत को यह श्रेय जाता है कि उसने विश्व समुदाय को लोकतंत्र की वास्तविक क्षमता से परिचित कराया. मैं मानती हूं कि भारत की यह उपलब्धि केवल संयोग नहीं थी। सभ्यता के आरंभ में ही भारत-भूमि के संतों और महात्माओं ने सभी प्राणियों की समानता व एकता पर आधारित जीवन-दृष्टि विकसित कर ली थी। महात्मा गांधी जैसे महानायकों के नेतृत्व में हुये स्वाधीनता संग्राम के दौरान हमारे प्राचीन जीवन-मूल्यों को आधुनिक युग में फिर से स्थापित किया गया। इसी कारण से हमारे लोकतंत्र में भारतीयता के तत्व दिखाई देते हैं। गांधीजी सत्ता के विकेंद्रीकरण और जन-साधारण को अधिकार-सम्पन्न बनाने के पक्षधर थे। महामहिम ने कहा पिछले 75 सप्ताह से हमारे देश में स्वाधीनता संग्राम के महान आदर्शों का स्मरण किया जा रहा है। आज़ादी का अमृत महोत्सव मार्च 2021 में दांडी यात्रा की स्मृति को फिर से जीवंत रूप देकर शुरू किया गया। उस युगांतरकारी आंदोलन ने हमारे संघर्ष को विश्व-पटल पर स्थापित किया , उसे सम्मान देकर हमारे इस महोत्सव की शुरुआत की गई। यह महोत्सव भारत की जनता को समर्पित है। देशवासियों द्वारा हासिल की गई सफलता के आधार पर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण का संकल्प भी इस उत्सव का हिस्सा है। हर आयु वर्ग के नागरिक पूरे देश में आयोजित इस महोत्सव के कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। यह भव्य महोत्सव अब ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के साथ आगे बढ़ रहा है और आज देश के कोने-कोने में हमारा तिरंगा शान से लहरा रहा है। स्वाधीनता आंदोलन के आदर्शों के प्रति इतने व्यापक स्तर पर लोगों में जागरूकता को देखकर हमारे स्वाधीनता सेनानी अवश्य प्रफुल्लित हुये होते। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा हमारा गौरवशाली स्वाधीनता संग्राम इस विशाल भारत-भूमि में बहादुरी के साथ संचालित होता रहा। अनेक महान स्वाधीनता सेनानियों ने वीरता के उदाहरण प्रस्तुत किये और राष्ट्र-जागरण की मशाल अगली पीढ़ी को सौंपी। अनेक वीर योद्धाओं तथा उनके संघर्षों विशेषकर किसानों और आदिवासी समुदाय के वीरों का योगदान एक लंबे समय तक सामूहिक स्मृति से बाहर रहा। पिछले वर्ष से हर 15 नवंबर को ‘जन-जातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का सरकार का निर्णय स्वागत-योग्य है। हमारे जन-जातीय महानायक केवल स्थानीय या क्षेत्रीय प्रतीक नहीं हैं बल्कि वे पूरे देश के लिये प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा एक राष्ट्र के लिये , विशेष रूप से भारत जैसे प्राचीन देश के लंबे इतिहास में 75 वर्ष का समय बहुत छोटा प्रतीत होता है। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर यह काल-खंड एक जीवन-यात्रा जैसा है। हमारे वरिष्ठ नागरिकों ने अपने जीवनकाल में अद्भुत परिवर्तन देखे हैं , वे गवाह हैं कि कैसे आजादी के बाद सभी पीढ़ियों ने कड़ी मेहनत की। विशाल चुनौतियों का सामना किया और स्वयं अपने भाग्य-विधाता बने। इस दौर में हमने जो कुछ सीखा है वह सब उपयोगी साबित होगा क्योंकि हम राष्ट्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव की ओर आगे बढ़ रहे हैं। हम सब 2047 में स्वाधीनता के शताब्दी-उत्सव तक की 25 वर्ष की अवधि यानि भारत के अमृत-काल में प्रवेश कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा, हमारा संकल्प है कि वर्ष 2047 तक हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को पूरी तरह साकार कर लेंगे। इसी काल-खंड में हम बाबासाहब भीमराव आम्बेडकर के नेतृत्व में संविधान का निर्माण करने वाली विभूतियों के विजन को साकार कर चुके होंगे। एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में हम पहले से ही तत्पर हैं। वह एक ऐसा भारत होगा जो अपनी संभावनाओं को साकार कर चुका होगा। उन्होंने कहा कि दुनियां ने हाल के वर्षों में एक नये भारत को उभरते हुये देखा है , खासकर कोविड -19 के प्रकोप के बाद इस महामारी का सामना हमने जिस तरह किया है उसकी सर्वत्र सराहना की गई है। हमने देश में ही निर्मित वैक्सीन के साथ मानव इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया। पिछले महीने हमने दो सौ करोड़ वैक्सीन कवरेज का आंकड़ा पार कर लिया है। इस महामारी का सामना करने में हमारी उपलब्धियां विश्व के अनेक विकसित देशों से अधिक रही हैं। इस प्रशंसनीय उपलब्धि के लिये हम अपने वैज्ञानिकों , डॉक्टरों , नर्सों , पैरामेडिक्स और टीकाकरण से जुड़े कर्मचारियों के आभारी हैं। इस आपदा में कोरोना योद्धाओं द्वारा किया गया योगदान विशेष रूप से प्रशंसनीय है। कोरोना महामारी ने पूरे विश्व में मानव-जीवन और अर्थ-व्यवस्थाओं पर कठोर प्रहार किया है। जब दुनियां इस गंभीर संकट के आर्थिक परिणामों से जूझ रही थी तब भारत ने स्वयं को सम्हाला और अब पुनः तीव्र गति से आगे बढ़ने लगा है। राष्ट्रपति ने कहा इस समय भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक है , भारत के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का विश्व में ऊंचा स्थान है। हमारे देश में स्टार्ट-अप्स की सफलता , विशेषकर यूनिकॉर्नस की बढ़ती हुई संख्या , हमारी औद्योगिक प्रगति का शानदार उदाहरण है। विश्व में चल रही आर्थिक कठिनाई के विपरीत भारत की अर्थ-व्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने का श्रेय सरकार तथा नीति-निर्माताओं को जाता है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री गति-शक्ति योजना के द्वारा कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा रहा है। परिवहन के जल , थल , वायु आदि पर आधारित सभी माध्यमों को भली-भांति एक दूसरे के साथ जोड़कर पूरे देश में आवागमन को सुगम बनाया जा रहा है। प्रगति के प्रति हमारे देश में दिखाई दे रहे उत्साह का श्रेय कड़ी मेहनत करने वाले हमारे किसान व मजदूर भाई-बहनों को भी जाता है। साथ ही व्यवसाय की सूझ-बूझ से समृद्धि का सृजन करने वाले हमारे उद्यमियों को भी जाता है। सबसे अधिक खुशी की बात यह है कि देश का आर्थिक विकास और अधिक समावेशी होता जा रहा है तथा क्षेत्रीय विषमतायें भी कम हो रही हैं। लेकिन यह तो केवल शुरुआत ही है , दूरगामी परिणामों वाले सुधारों और नीतियों द्वारा इन परिवर्तनों की आधार-भूमि पहले से ही तैयार की जा रही थी। उदाहरण के लिये डिजिटल इंडिया अभियान द्वारा ज्ञान पर आधारित अर्थ-व्यवस्था की आधारशिला स्थापित की जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भावी पीढ़ी को औद्योगिक क्रांति के अगले चरण के लिये तैयार करना तथा उन्हें हमारी विरासत के साथ फिर से जोड़ना भी है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा आर्थिक प्रगति से देशवासियों का जीवन और भी सुगम होता जा रहा है , आर्थिक सुधारों के साथ-साथ जन-कल्याण के नये कदम भी उठाये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना’ की सहायता से गरीब के पास स्वयं का घर होना अब एक सपना नहीं रह गया है बल्कि सच्चाई का रूप ले चुका है। इसी तरह जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल योजना पर कार्य चल रहा है। इन उपायों का और इसी तरह के अन्य प्रयासों का उद्देश्य सभी को विशेषकर गरीबों को , बुनियादी सुविधायें प्रदान करना है। भारत में आज संवेदनशीलता व करुणा के जीवन-मूल्यों को प्रमुखता दी जा रही है। इन जीवन-मूल्यों का मुख्य उद्देश्य हमारे वंचित, जरूरतमंद तथा समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के कल्याण हेतु कार्य करना है। हमारे राष्ट्रीय मूल्यों को , नागरिकों के मूल कर्तव्यों के रूप में भारत के संविधान में समाहित किया गया है। देश के प्रत्येक नागरिक से मेरा अनुरोध है कि वे अपने मूल कर्तव्यों के बारे में जानें , उनका पालन करें जिससे हमारा राष्ट्र नई ऊंचाइयों को छू सकें।
बताते चलें देश में स्वतंत्रता दिवस के पचहत्तर साल पूरे होने के मौके पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। ऐसे में महामहिम राष्ट्रपति का ये संबोधन कई मायनों में खास है। हाल ही में राष्ट्रपति पद सम्हालने के बाद ये पहला मौका है , जब बतौर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्र को संबोधित कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संबोधन की पुरानी परिपाटी रही है। इस दौरान राष्ट्रपति देश की उपलब्धियां और आने वाले कल की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हैं। मूर्मु देश में आदिवासी समुदाय से आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं , वहीं पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बाद वे देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। इन्होंने 25 जुलाई को देश के पंद्रहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। ये शीर्ष संवैधानिक पद पर आसीन होने वाली सबसे कम उम्र की और पहली आदिवासी हैं। ये ऐसी पहली राष्ट्रपति हैं , जिनका जन्म देश की आजादी के बाद हुआ है।

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