छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान को छेड़ेने की कोशिश न करे…छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बदलो अभियान पर अति शीघ्र लगे विराम: इसे पंजाब राजस्थान व दिल्ली न बनाएं – आलाकमान को खुद ही करनी चाहिए गंभीरता से पहल

0

छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान को छेड़ेने की कोशिश न करे…छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बदलो अभियान पर अति शीघ्र लगे विराम: इसे पंजाब राजस्थान व दिल्ली न बनाएं – आलाकमान को खुद ही करनी चाहिए गंभीरता से पहल

भुवन वर्मा बिलासपुर 31 अगस्त 2021

रायपुर । छत्तीसगढ़ीयों द्वारा कांग्रेस के आलाकमान के मौन रवैया से बेहद नाराजगी देखी जा रही है। भारी बहुमत की सरकार को अस्थिर की कोशिश करने वाले लोगों को सह ना दे । वरना छत्तीसगढ़ भी अन्य राज्यों की तरह स्थिरता के साथ हाथ से ना निकल जाए ,,,,। विदित हो कि केंद्रीय नेतृत्व के बल पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता हासिल नहीं की है ! वरन छत्तीसगढ़ीया नेतृत्व के बलबूते पर छत्तीसगढ़ में अपनी मजबूत सरकार बनाई है ।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ की सत्ता पार्टी की राजनीति में काफी उथल-पुथल चल रही है । भारी बहुमत से जीत कर सरकार बनाने वाले भूपेश अपनी ही पार्टी के स्वास्थ्य मंत्री टी एस बाबा के बीच एक तरह का वाक युद्ध चल रहा है ।


इस पूरे घटनाक्रम के प्रकरण की शीघ्र पटाक्षेप होनी चाहिए । आलाकमान अपने सरकार वाले अन्य राज्यों पर नजर डाले पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश की स्थिति छत्तीसगढ़ में निर्मित ना हो । मूल छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के साथ सरकार चलाने वाले भूपेश को अस्थिर करने में एक वर्ग विशेष पूरे देश भर में लगे हुए हैं । सत्ता पार्टी के कुछ सदशयों के अलावा विपक्षी पार्टी भी उन्हें अस्थित / अपदस्थ करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में छत्तीसगढ़ का विकास एक तरफ से थम सा गया है । छत्तीसगढ़ के मूल छत्तीसगढ़ीया अपने आप को अपमानित और ठगा सा महसूस कर रहे हैं । 70 विधायकों की भारी बहुमत भूपेश बघेल अपने नेतृत्व में जीतकर 15 साल के भाजपा सरकार को परास्त कर सत्ता हासिल किये है ।


डोल रहा है.. खड़ा है…अड़ा है …अभियान पर अति शीघ्र विराम लगनी चाहिए और आलाकमान को खुद ही यह घोषणा करनी चाहिए की वर्तमान भूपेश सरकार अपनी कार्यकाल पूर्ण करेंगे ।
अभी दो साल का कार्यकाल शेष रह गया है । इस बीच मुख्यमंत्री बदलाव का अभियान कांग्रेस के लिए भी घातक साबित हो सकती है ।

छत्तीसगढ़ का हाल भी दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब और दूसरा राज्य की तरह करना हैं तो बदल देना चाहिए यहां का भी मुख्यमंत्री… समझ में नहीं आता कांग्रेस अपनी गलतियों से सीखती क्यों नहीं… इसी छत्तीसगढ़ में शुक्ल बंधुओं और दिवंगत अजीत जोगी की महत्वाकांक्षा के कारण कांग्रेस बिखरी थी. तब भूपेश बघेल ही इनके खिलाफ दमदारी से खड़े रहे..

यह बात जगजाहिर है कि भाजपा वालों को आरएसएस नागपुर का और कांग्रेस वालों को 10 जनपद पथ का डर दिखाकर कुछ लोग अपनी राजनीति देश में चला रहे हैं..
कुल मिलाकर बात है छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान का… अभिमान का

इसी प्रकरण पर अपनी तीखी टिप्पणी देते डॉ निर्मल नायक प्रदेश अध्यक्ष कुर्मी क्षत्रिय चेतना मंच एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने विज्ञप्ति के माध्यम से अपनी मन की बात रखे हैं जो निम्नानुसार हैछत्तीसगढ़ राज्य में पहली बार ऐसा लगा है कि छत्तीसगढ़ीयो का राज है, अगर इसे बदलकर किसी भी गैर छत्तीसगढ़ी को मुख्यमंत्री बनाया जाता हैं तो ये छत्तीसगढ़ीयों का हत्या के समान होगा,हम ऐसा होने नही देंगे। भाजपा शासन काल मे परदेशिया मुख्यमंत्री व उनके मंत्री मंडल में गैर छत्तीसगढ़ीयो की भरमार रहा उसी तरह कांग्रेस में भी बाबा को सामने कर गैर छत्तीसगढ़ी लाम्बी हावी होने के प्रयास में दिखाई दे रहा है, इसे बिल्कुल भी बरदास्त नही किया जाएगा क्योंकि अब ये छत्तीसगढ़ियों का अस्मिता और स्वाभिमान का सवाल है

जिस संघर्ष और दिन रात मेहनत करके कांग्रेस को भूपेश बघेल के कारण ही सत्ता मिला है वरना छत्तीसगढ़ में किसी का भी कोई वजूद था ही नही, जो कांग्रेस को बहुमत दिला सके,आज उसी को हटाने की चर्चा जोरों पर है ये बेहद गलत बात है।

छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 30 लाख कूर्मि आबादी है, आदिवासियों और ज जा का भी पूरा समर्थन भूपेश बघेल जी को है, OBC और कूर्मि तो उनके साथ है ही, सोचे जब ये सड़क पर उतर जाए तो क्या होगा,इसलिए बेहतर होगा, नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा की ही विराम दे दिया जाए

दिल्ली में बैठे लोग भूपेश बघेल को हटाते है तो छत्तीसगढ़ से आगामी चुनाव में कांग्रेस साफ हो जायेगा, हमें कांग्रेस या भाजपा से कोई लेना देना नही हमे छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री ही चाहिए, गैर छत्तीसगढ़िया को बर्दास्त करने की क्षमता अब किसी भी छत्तीसगढ़िया में नही है, भूपेश बघेल के हटने से राज्य में तनाव पूर्व माहौल के लिए कौन जिम्मेदार होगा, किसी भी सरकार और उसके मंत्री मंडल का सर्वत्र विरोध संभव है, कार्यक्रम तो दूर की बात,मंत्रियों का घर से निकलना मुश्किल हो सकता है क्योंकि छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री ही चाहिए ये हर छत्तीसगढ़ियों का एकमात्र उद्देश्य बन चुका है

छत्तीसगढ़ कूर्मि क्षत्रिय चेतनामंच के प्रदेशाध्यक्ष डॉ निर्मल नायक एवम मंच के सभी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समेत केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की ओर से यही विचार धारा की विज्ञप्ति जारी किया गया है :

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *