ऑफर से इंकार, नहीं चाहिए बाॅय वन -गेट वन !

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ऑफर से इंकार, नहीं चाहिए बाॅय वन -गेट वन ; कोरोना संक्रमण के फैलाव नें छिनी बाजार की रौनक

भुवन वर्मा बिलासपुर 24 अगस्त 2020

रायपुर/बिलासपुर- पर्व त्यौहारों पर ग्रहण के बाद अब उस बाजार पर भी कोरोना की नजर लग चुकी है जिसके दम पर बाजार में रौनक रहती आई है। यह बाजार है “सेल और ऑफर “ का। यह बाजार है “बाय वन- गेट वन“ का जहा सामान्य दिनों में इस तरह के स्लोगन लिखे बोर्ड और विज्ञापन हर चौक- चौराहों में नजर आ जाते थे। अब ये सभी इन जगहों से गायब हैं। असर का पड़ना स्वाभाविक था। पड़ने भी लगा है क्योंकि खरीददारों ने दूरी बना ली है। इसलिए यह बाजार अब खरीददारों के इंतजार में है।

कोरोना ने न केवल जन-जीवन अस्त व्यस्त किया है बल्कि खान-पान सहित दैनिक दिनचर्या पर भी गहरा असर डाला है। शुरूआत सुबह की चाय से लेकर रात तक यह असर कदम-कदम पर महसूस किया जा सकता है जहां हर कोने में कोरोना का भय अपनी पहुॅच बना चुका है। यह अब उस बाजार तक भी पहुॅच चुका है जहां से होती हुई रौनक कभी घर के कोने-कोने तक पहुॅचा करती थी। खरीदी के क्रम में इस वक्त केवल दैनिक उपयोग के काम आने वाली चीजें ही खरीदी जा रही है जबकि 30 प्रतिशत छूट या 40 प्रतिशत राहत या 50 प्रतिशत छूट देने वाली संस्थानों के काउंटर सूने पड़े है। सबसे बुरा हाल “बाॅय वन-गेट वन“ जैसे ऑफर देने वाली संस्थानों का है जहां ग्राहक के लिए तरसते सेल्समेल को दरवाजे की तरफ झांकते हुए देखा जा रहा है।

ऑफर मंजूर नहीं

रेडिमेड क्लाॅथ काउंटर या कपड़ों की विभिन्न वैरायटी वाले लगभग 30 प्रतिशत ऑफर में बिक्री करने वाली संस्थानों में ग्राहक पहुॅच तो रहें है लेकिन खरीदी की मात्रा इतनी सीमित है कि ऑफर का असर पूरी तरह गायब है। हैरत में है ।ऑफर देने वाला यह बाजार क्योंकि तीज पर्व ने जैसी स्थिति और दृश्य दिखाए है उसके बाद विज्ञापन या होर्डिंग्स तो दूर अखबार के पन्नों के भीतर आने वाले पाॅम्पलेट तक से परहेज किया जाने लगा है क्योंकि इस पर की गई खर्च की राशि निकल नहीं पा रही है। यह इस बात को बता रहा है कि उपभोक्ताओं को अब ‘ऑफर‘ जैसे शब्द भी लुभा नहीं पा रहे है।

नहीं चाहिए “बाॅय वन-गेट वन

मार्च के पहले होली त्यौहार के लिए बाॅय वन-गेट वन जैसे शब्दों के साथ आसानी से ग्राहक खींच लाने वाले रेडिमेड शाँप, जूते चप्पल की दुकानें, इलेक्ट्रानिक गुड्स या टीवी बेचने वाली संस्थानें ऑफर की बदहाली के बाद बाॅय वन-गेट वन के माध्यम से ग्राहकों तक पहुॅच तो रहीे है लेकिन इसमें अब बेहद चुनिंदा चीजें ही शामिल हो रही है। इसमें भी ऐसी वस्तुओं को रखा जा रहा है जिनके बिना दिनचर्या की शुरूआत नहीं की जा सकती। यही वजह है कि ऐसी संस्थानो के सामने से ये होर्डिंग्स हटा दिये गये है। जहां हैं वे बहुत ज्यादा उम्मीद लेकर नहीं चल रहे है। इसलिए यह बाजार कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता।

यहां पूरी तरह खत्म

कोरोना काल में खाद्य सामग्री निमार्ण करने वाली कम्पनियों ने ऐसी छूट में भारी कटौती कर दी है। जहा दी जा रही है वहां डीलर, प्लान की जानकारी रिटेल काउंटर को नहीं दे रहे है। इस क्षेत्र में बिस्किट, चाॅकलेट, टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू जैसी सामग्रियां मुख्य है। बिक्री में प्रोत्साहन देने वाली चीजें चल तो रही है लेकिन मात्रा तेजी से कम की जा रही है। जो बची हुई स्कीम है उसे होलसेल काउंटर हजम कर दे रहें है और इसकी जानकारी रिटेल काउंटर को नहीं दी जा रही हैं। इसका दोहरा नुकसान हो रहा है क्योंकि रिटेल काउंटर ने खरीदी कम करनी चालू कर दी है तो उपभोक्ताओं को ये चीजें ज्यादा कीमत पर खरीदनी पड़़ रही है याने अब बाजार का रंग पूरी तरह बदल चुका है।

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