कृषि महाविद्यालय बिलासपुर में नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए ‘दीक्षारंभ’ का शुभारंभ

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को शैक्षणिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन के लिए किया गया प्रेरित

बिलासपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, सरकंडा, बिलासपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के दिशानिर्देशों के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं उन्हें महाविद्यालयीन जीवन से सहज रूप से परिचित कराने के उद्देश्य से छात्र प्रेरण कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ’ का आयोजन किया जा रहा है।

‘दीक्षारंभ’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था एवं पाठ्यक्रम से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें अनुशासित, आत्मविश्वासी, संवेदनशील, जिम्मेदार एवं भविष्य के कुशल कृषि स्नातक के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं प्रेरणा प्रदान करना है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को उच्च कृषि शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, वित्तीय अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों से परिचित कराया जा रहा है।

प्रथम दिवस में हुए पांच महत्वपूर्ण सत्र

‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम के प्रथम दिवस 15 सितंबर 2026 को नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक, प्रेरणादायी एवं संवादात्मक गतिविधियों के अंतर्गत पांच प्रमुख सत्र आयोजित किए गए।

प्रथम सत्र में ‘विश्वविद्यालय में अध्ययन प्रक्रिया पर चर्चा’ विषय पर विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अध्ययन पद्धति, उच्च कृषि शिक्षा की संरचना तथा विश्वविद्यालय स्तर पर उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के दौरान नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन एवं अकादमिक अनुशासन के महत्व से भी अवगत कराया गया।

इसके पश्चात ‘विद्यार्थी जीवन का लक्ष्य’ विषय पर प्रेरणादायी सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में विद्यार्थियों को जीवन में स्पष्ट एवं सार्थक लक्ष्य निर्धारित करने, सकारात्मक सोच विकसित करने, आत्म-अनुशासन अपनाने तथा अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने हेतु प्रेरित किया गया।

तीसरे सत्र में ‘शैक्षणिक प्रक्रिया की विभिन्न जानकारी’ विषय पर विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम, शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षा प्रणाली, उपस्थिति, महाविद्यालयीन नियमों तथा उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक प्रणाली को समझने तथा उसका अधिकतम लाभ उठाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।

भोजनावकाश के पश्चात ‘वित्तीय प्रबंधन का महत्व एवं रणनीति’ विषय पर महत्वपूर्ण एवं उपयोगी सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को वित्तीय अनुशासन, आय-व्यय का संतुलन, बचत की आदत, बैंकिंग सेवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग तथा भविष्य के वित्तीय नियोजन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में ‘विद्यार्थी-अभिभावक-शिक्षक संवाद’ आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, उनकी अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं तथा महाविद्यालयीन जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के बीच सार्थक संवाद हुआ। इस संवाद के माध्यम से विद्यार्थी-अभिभावक-शिक्षक के बीच बेहतर समन्वय एवं सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।

महाविद्यालय एवं प्रयोगशालाओं का कराया गया भ्रमण

‘दीक्षारंभ’ के प्रथम दिवस विद्यार्थियों को महाविद्यालय के विभिन्न विभागों, प्रयोगशालाओं एवं उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं का भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने महाविद्यालय में संचालित शिक्षण, प्रयोगात्मक एवं अनुसंधान गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा तथा विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली एवं उपलब्ध संसाधनों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इससे नव-प्रवेशित विद्यार्थियों में अपने नए शैक्षणिक परिवेश को समझने तथा उसके प्रति आत्मीयता विकसित करने में सहायता मिली।

प्रमुख अतिथियों एवं विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन

कार्यक्रम में डॉ. एन. के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, बिलासपुर की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर डॉ. एस. एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, लोरमी-मुंगेली; सुश्री राखी ब्रह्माकुमारी दीदी; डॉ. एस. के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान, बिलासपुर तथा डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, बिलासपुर ने नव-प्रवेशित विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

‘विद्यार्थी जीवन का लक्ष्य’ विषय पर सुश्री राखी ब्रह्माकुमारी दीदी ने विद्यार्थियों को जीवन में लक्ष्य निर्धारण, सकारात्मक सोच, आत्म-अनुशासन तथा विद्यार्थी जीवन की ऊर्जा एवं समय का सदुपयोग करते हुए अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहते हुए सकारात्मक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।

वहीं ‘वित्तीय प्रबंधन का महत्व एवं रणनीति’ विषय पर भारतीय स्टेट बैंक, शाखा सरकंडा के शाखा प्रबंधक ने विद्यार्थियों को वित्तीय अनुशासन, आय-व्यय प्रबंधन, बचत, बैंकिंग सेवाओं तथा भविष्य के लिए वित्तीय नियोजन के संबंध में महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, सहायक प्राध्यापकगण, कृषि वैज्ञानिक, अतिथि शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे। वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं शिक्षकों ने नव-प्रवेशित विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें कृषि शिक्षा के महत्व, अनुशासन, व्यक्तित्व विकास तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार, उद्यमिता, अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा के विभिन्न अवसरों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया।

ज्ञान, प्रेरणा और नए संकल्प के साथ ‘दीक्षारंभ’ का पहला दिन

विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता से ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का प्रथम दिवस ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा। कार्यक्रम ने नव-प्रवेशित विद्यार्थियों को उनके नए शैक्षणिक परिवेश से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहने, अनुशासन एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने तथा कृषि एवं राष्ट्र के विकास में अपनी सार्थक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

‘दीक्षारंभ’ के माध्यम से महाविद्यालय द्वारा नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा से परिचय, संस्थान से जुड़ाव, व्यक्तित्व निर्माण और भविष्य की दिशा निर्धारण की एक सशक्त आधारभूमि तैयार की जा रही है। यह पहल विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, कुशल, संवेदनशील एवं नवाचारी कृषि स्नातक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है।

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