नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल समापन: आतंकवाद पर कड़ा प्रहार, स्थानीय मुद्रा में व्यापार पर मुहर

Modi - 1

नई दिल्ली: प्रगति मैदान स्थित भव्य ‘भारत मंडपम’ में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का शानदार समापन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन के अंत में सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को अपनाया गया। ब्रिक्स समूह की स्थापना के 20 साल पूरे होने पर आयोजित यह सम्मेलन भारत की कूटनीतिक ताकत और ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में उसकी बढ़ती भूमिका का गवाह बना। इस वर्ष की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रही।

आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ और कूटनीतिक जीत

भारत के लिए इस सम्मेलन की एक बड़ी कूटनीतिक जीत सीमा पार आतंकवाद पर समूह का सख्त रुख रहा। घोषणापत्र में आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा की गई है। टेरर फंडिंग और आतंकियों को पनाह देने वाले देशों को स्पष्ट संदेश देते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर मुहर लगाई गई। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे वैश्विक संस्थानों में तत्काल सुधार की मांग की गई है ताकि वे आज की दुनिया का सही प्रतिनिधित्व कर सकें।

तकनीक के शस्त्रीकरण पर पीएम मोदी की चेतावनी

सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नई तकनीकों और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन के भू-राजनीतिक शस्त्रीकरण (Weaponisation) को लेकर दुनिया को आगाह किया। उन्होंने किसी एक देश पर निर्भरता कम करने और एक पारदर्शी, लचीली वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

साझा मुद्रा नहीं, स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा

लंबे समय से चल रही ‘ब्रिक्स करेंसी’ की अटकलों पर विराम लगाते हुए, सदस्य देशों ने साझा मुद्रा के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने का फैसला किया। इसके तहत क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन को आसान और सस्ता बनाने के लिए सदस्य देशों के पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने (Interoperable Payment Systems) पर भी सहमति बनी।

भारत की डिजिटल और स्वास्थ्य पहल की छाप

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में भारत की सफलता को वैश्विक पटल पर रखते हुए एक ‘ब्रिक्स DPI रिपॉजिटरी’ बनाने का निर्णय लिया गया। इससे विकासशील और गरीब देशों को भारत के डिजिटल मॉडल से सीधा लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, बेंगलुरु के निमहंस (NIMHANS) के नेतृत्व में एक ‘ब्रिक्स मेंटल हेल्थ नेटवर्क’ की स्थापना की भी घोषणा की गई।

वैश्विक तनाव और ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठकें

सम्मेलन में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और गाजा में बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील की गई। सदस्य देशों ने एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और कार्बन बॉर्डर टैक्स जैसे भेदभावपूर्ण व्यापार नियमों का भी कड़ा विरोध किया।

इस भव्य आयोजन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (2019 के बाद पहली भारत यात्रा) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई शीर्ष नेता शामिल हुए। सम्मेलन के इतर हुई इन नेताओं की उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं ने सीमा शांति, ऊर्जा सुरक्षा और नए ट्रेड कॉरिडोर के भविष्य की रूपरेखा तय की। कुल मिलाकर, 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नए वैश्विक समीकरणों को गढ़ने में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

About The Author