हर्षोल्लास से मनाई गई आजादी की 79वीं वर्षगांठ एवं 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह
कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर की पहल
बिलासपुर। देश की आजादी की 79वीं वर्षगांठ और 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लास, गरिमा और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। परिसर में देशभक्ति के गीतों और नारों से वातावरण राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों तथा श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समारोह के मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। उपस्थित जनसमुदाय को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या, संघर्ष और बलिदान का अमूल्य परिणाम है। देश की आजादी के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, धर्म और समुदाय के लोगों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। इसलिए स्वतंत्रता की रक्षा करना और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान देना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
स्वतंत्रता का अर्थ जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में डॉ. चौरे ने कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब हम अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें। आज का भारत स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, कृषि, खाद्यान्न उत्पादन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और डिजिटल तकनीक सहित अनेक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” का संकल्प केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक अवसरों से जोड़ते हुए समग्र एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों तक नवीन तकनीकों का प्रभावी प्रसार अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कृषि क्षेत्र की उपलब्धियां देश की आत्मनिर्भरता का आधार
डॉ. चौरे ने देश की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी प्रकार श्वेत क्रांति ने दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं, जबकि नीली क्रांति ने मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में देश को मजबूत बनाया। आज कृषि में आधुनिक तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा जलवायु-सहिष्णु कृषि की दिशा में नए प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच कृषि वैज्ञानिकों और युवाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। हमें वैज्ञानिक सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण, नवाचार और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।
कृषि महाविद्यालय ने स्थापित किए नए आयाम
महाविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. चौरे ने कहा कि अपनी स्थापना से ही कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर ने शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य किया है। महाविद्यालय द्वारा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए अनुसंधान एवं तकनीकी प्रसार का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान की उपलब्धियां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के गौरव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
देशभक्ति प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इसके पश्चात ध्वजारोहण, वंदे मातरम् का सामूहिक गायन तथा राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रगान के दौरान पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से भर उठा।
इसके बाद छात्र-छात्राओं एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायी प्रस्तुतियां दीं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिनेश पांडे, छात्र गर्वित जैन एवं राज प्रताप सिंह भदोरिया की प्रस्तुतियों ने विशेष रूप से उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। इन प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों, राष्ट्रप्रेम और देश के प्रति कर्तव्य की भावना को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला में भी हुआ ध्वजारोहण
चोरभट्टी स्थित राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। यहां डॉ. एस.के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर ने ध्वजारोहण कर उपस्थित वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं अन्य सदस्यों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की कृषि एवं वैज्ञानिक प्रगति में अनुसंधान संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से किसानों के हित में नवीन तकनीकों के विकास एवं प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे महाविद्यालय परिवार के सदस्य
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने किया। इस अवसर पर डॉ. एस.एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली; डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर सहित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं श्रमिक भाई बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। तिरंगे की शान, देशभक्ति के नारों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के बीच मनाया गया यह स्वतंत्रता दिवस समारोह महाविद्यालय परिवार के लिए प्रेरणा, गौरव और राष्ट्रीय चेतना का स्मरणीय अवसर बन गया।
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