श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में सावन के प्रथम सोमवार को हुआ श्रद्धापूर्वक हुआ आयोजन

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प्रथम मंगलवार पर पीठाधीश्वर ने बताया मंगला गौरी व्रत का आध्यात्मिक एवं शास्त्रीय महत्व

बिलासपुर ।सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में परमपूज्य गुरुदेव भगवान के पावन आशीर्वाद एवं पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित चतुर्थ सावन महोत्सव एवं श्री महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपरा के साथ निरंतर संपन्न हो रहा है। 30 जुलाई से प्रारंभ हुआ यह आध्यात्मिक आयोजन 28 अगस्त 2026 (श्रावण शुक्ल पूर्णिमा) तक प्रतिदिन विविध धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जारी रहेगा।सावन के प्रथम सोमवार को श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का यजुर्वेदीय ‘नमकम-चमकम’ महारुद्राभिषेक, महाआरती एवं श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक एवं पूजन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

सावन के प्रथम मंगलवार के अवसर पर पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने श्रद्धालुओं को मंगला गौरी व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि सावन का पवित्र महीना केवल भगवान शिव की आराधना का ही नहीं, बल्कि आदिशक्ति माँ मंगला गौरी की विशेष उपासना का भी श्रेष्ठ काल है। जिस प्रकार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, उसी प्रकार प्रत्येक मंगलवार माँ मंगला गौरी की आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि मंगला गौरी, माता पार्वती का मंगलमयी एवं कल्याणकारी स्वरूप हैं। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी तप, श्रद्धा एवं समर्पण की स्मृति में सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का विधान किया गया है।

आचार्य श्री ने कहा कि यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु, सुखी एवं समृद्ध दाम्पत्य जीवन तथा परिवार के कल्याण के लिए किया जाता है। वहीं अविवाहित कन्याएँ योग्य एवं मनोनुकूल वर की प्राप्ति तथा विवाह में आने वाली बाधाओं के निवारण हेतु यह व्रत करती हैं।आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने कहा कि श्रद्धा एवं विधिपूर्वक किए गए मंगला गौरी व्रत से विवाह संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं, दाम्पत्य जीवन में प्रेम एवं मधुरता बढ़ती है, संतान सुख की प्राप्ति होती है तथा मंगल सहित अन्य ग्रहदोषों का शमन होता है। माँ मंगला गौरी की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति, आरोग्य एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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