श्री पीतांबरा पीठ बिलासपुर में गुप्त नवरात्रि का दिव्य प्रवाह: माँ षोडशी व माँ त्रिपुर भैरवी के बाद अब पाँचवीं तिथि को होगी माँ भुवनेश्वरी की पूजा
पीठाधीश्वर जी ने बताया आत्मज्ञान का मार्ग
बिलासपुर।सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महापर्व पूरे उत्साह, भव्यता और दिव्य साधना के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में सर्वप्रथम प्रातः 5:00 बजे श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन, श्रृंगार, श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक, श्री महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त षोडश मंत्र द्वारा दूधधारिया पूर्वक अभिषेक, मर्यादा पुरुषोत्तम परमब्रम्ह श्री रामचंद्र जी का पूजन श्रृंगार, तथा सिद्धिविनायक जी का दिव्य पूजन श्रृंगार निरंतर किया जा रहा है। मंदिर में रात्रि 8:00 बजे से लेकर 12:30 बजे तक श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ अनवरत चलता रहता है, जिसके तत्पश्चात रात्रि 12:30 बजे भव्य महाआरती के साथ दैनिक पूजन संपन्न होता है। पीतांबरा पीठ में नवरात्रि के विशेष दिनों पर माँ ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का तीसरी महाविद्या माँ षोडशी (ललिता त्रिपुरा सुंदरी) और चौथी महाविद्या माँ त्रिपुरभैरवी के अलौकिक स्वरूपों में विशेष पूजन, दिव्य श्रृंगार और गुप्त आराधना संपन्न की गई, जिसके बाद अब चौथे दिन पाँचवीं तिथि को पाँचवीं महाविद्या भुवनेश्वरी देवी के रूप में पूजन श्रृंगार किया जाएगा।
माँ भुवनेश्वरी साक्षात इस समस्त ब्रह्मांड (भुवन) की स्वामिनी और अधिष्ठात्री देवी हैं। संपूर्ण सृष्टि का सृजन, पालन और नियंत्रण इन्हीं के द्वारा होता है। ममतामयी स्वरूप वाली माँ भुवनेश्वरी की साधना से साधक को जीवन में कभी भी अन्न, धन या आश्रय की कमी नहीं होती। वे अपने भक्तों को वैभव, ऐश्वर्य और साम्राज्य प्रदान करने वाली शक्ति हैं। मानसिक शांति, गृह क्लेश से मुक्ति और संतान सुख के लिए इनकी पूजा अचूक मानी गई है।
*साधना और यज्ञ से कैसे बढ़ता है ‘आत्मज्ञान’?*
इस पावन अवसर पर हो रहे अनुष्ठान और यज्ञ के गूढ़ रहस्य को समझाते हुए पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि “हमारे शास्त्रों में यज्ञ को सबसे उत्तम कर्म माना गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव जीवन, प्रकृति और ईश्वर के बीच एक सीधा संबंध जोड़ना है। जब हम पवित्र मंत्रों के साथ अग्नि में आहुति देते हैं, तो वह सामग्री सूक्ष्म होकर पूरे वातावरण में फैल जाती है। यह एक ऐसा पावन अनुष्ठान है जो तन, मन और पर्यावरण तीनों को एक साथ पवित्र करता है।”
विशेष बात यह है कि गुप्त नवरात्रि की साधना और यज्ञ केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि ‘आत्मज्ञान’को बढ़ाने का सबसे तीव्र माध्यम हैं।जब साधक एकांत में बैठकर माँ की गुप्त साधना करता है, तो उसके भीतर का अज्ञान और अंधकार दूर होने लगता है। वहीं दूसरी ओर, यज्ञ की दिव्य अग्नि साधक के भीतर छिपे काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकारों को भस्म कर देती है। मंत्रों की गूंज और यज्ञ की पवित्र लपटें सीधे हमारे मन व चेतना पर असर डालती हैं, जिससे अवसाद और हीनभावना समाप्त होती है। जैसे-जैसे मन शुद्ध होता है, साधक को अपने वास्तविक स्वरूप यानी आत्मा का बोध होने लगता है, जिससे उसके भीतर प्रचंड सकारात्मक ऊर्जा और परम ज्ञान का उदय होता है।
पीतांबरा पीठ में चल रहे इस दिव्य महायज्ञ और पूजन दर्शन का लाभ उठाने के लिए मंदिर प्रबंधन ने सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया है, ताकि वे भी माँ ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी, श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव परमब्रह्म मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी की कृपा और यज्ञ की पावन ऊर्जा से अपना जीवन धन्य बना सकें।
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