जीवन का सबसे बड़ा मार्गदर्शक होता है साहित्य – डॉ सुषमा पंड्या
लेखन: साहित्यकार सुषमा पंड्या का कहना है हर व्यक्ति साहित्य से जुड़ जाता है।
बिलासपुर। साहित्यकार सुषमा पंड्या का कहना है कि अंतरंग विचारों को समेटता हुआ साहित्य स्वयं बोलता है। मैं साहित्य के बारे में जितना भी लिखना चाहूँ कम है। हर व्यक्ति जन्म से ही साहित्य से जुड़ जाता है। सुषमा पंड्या का कहना है कि कैसे हमारी मां का कोख तो एक आवरण है, हमें सुरक्षित रखने के लिए और मां का एक-एक क्रियाकलाप हमारा साहित्य बन जाता है। वे कहती हैं कि आप अभिमन्यु का उदहारण लीजिये, उन्होंने साहित्य पढ़कर चक्रव्यूह तोड़ना नहीं सीखा था। मां की कोख के अंदर से ही मां के क्रियाकलाप से चक्रव्यूह तोड़ना सीखा था, तो सबसे बड़ा जीवित साहित्य तो हमारी मां हुई ना। हां, जब हम विद्यालय जाते हैं, पढ़ना-लिखना सीखते हैं तब जाकर हमारा लिखित पुस्तकों के रूप में साहित्य से परिचय होता है, हमारे अंतरंग वैचारिक साहित्य के साथ सामंजस्य होता है। जैसे-जैसे हम लिखित साहित्यिक पुस्तकों से नाता जोड़ते जाते हैं, हमारे विचार प्रस्फुटित होकर कलमबद्ध होने लगते हैं। वे कहती हैं, मैंने कक्षा आठवीं में पढ़ाई के दौरान लिखना शुरू किया। अपनी एक सहेली के लिए वह बहुत गोरी थी और मैं श्याम वर्ण। न गोरी सी, न काली सी, मैं तो हूं दिलवाली सी। ये मेरी कविता थी। फिर मैंने 1993 में पीड़ा शीर्षक पर एक सत्य आधारित कविता लिखी। मेरी कविताओं में अंतरंग भावनाओं का समावेश था। कुछ गद्य भी लिखे लेकिन अपने स्वयं के नाम से पुस्तक नहीं छपवा पाई। सुषमा बताती हैं, मेरे दो साझा संकलन हैं कि एक लोकोक्तियों का लोक छत्तीसगढ़ी लोकोक्तियां एवं मुहावरे में मेरा लेख छत्तीसगढ़ी कहावतों में रोग और चिकित्सा विचार छपा है और दूसरा विश्वरत्न बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर नमक साझा संग्रह में भीमराव बन तुम हमरे भगवान और आओ, उठो जागो धर्म को मानो नमक शीर्षक कविता छपी है।
रचित कृति
अन्तः करण की निर्मलता अन्तः करण की निर्मलता भय का हो सर्वथा अभाव, अन्तः करण की पूर्ण निर्मलता हो, ध्यान योग की हो दृढ़ता, सात्विकता की हो प्रधानता, इन्द्रियों का हो दमन वेद शास्त्रों का हो पठन, उत्तम कर्मों का है आचरण, देवता और गुरुजन का पूजन कष्ट सहन और इन्द्रिय दमन से स्वधर्म पालन करें जतन हम यही है मेरे अन्तः करण की सरलता जो है मेरे जन्मों के कर्म फल का प्रदर्पण मैं तो हूं एक नन्ही सी बालिका मन हर दम करती नैतिक कर्म स्व श्रद्धांजलि से प्राप्त ये जीवन सुषमा करती स्वधर्म पालन हरदम । अंतःकरण की है ये महिमा, त्याग अहंकार का आवरण, लिए वाणी की मैं मृदुता, यथार्थ सत्यभाषण है मेरा आभूषण ||
जानिए डा सुषमा पंड्या को
0 शैक्षणिक योग्यता डिप्लोमा इन टीचिंग, बीए, बीएड, एमए, एम फिल, पीएचडी अर्थशास्त्र, डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसिल केंद्रीय विद्यालय बिलासपुर से प्रशिक्षित स्नातकोत्तर शिक्षिका के पद से सितम्बर 2021 में सेवानिवृत्तं ।
0 सेवानिवृत्ति के बाद वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में सफलता विश्व की सबसे उम्रदराज महिला जो स्वयं बुलेट चलाकर विश्व के सबसे ऊंची रोड उमलिंगळा पास तक पहुंची। इंटरनेशनल बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज है।
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