शिकार के लिए बैलाडीला के जंगलों और पहाड़ियों पर लगा दी है आग : नक्सलियों के बाद बस्तर के जंगलों में शिकारियों का राज !

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जगदलपुर.04 मई 2026/दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के भांसी से लगे बैलाडीला पहाड़ के राजा बंगला जंगल इन दिनों आग की चपेट में हैं। शिकारियों द्वारा दुर्लभ वन्यजीवों के शिकार के लिए जंगलों में आग लगा दी गई है। बाघों की मौजूदगी वाला यह जंगल लगभग एक सप्ताह से जल रहा है। आग के कारण वन्यजीव मैदानी इलाकों की ओर भागने को मजबूर हो रहे हैं, जहां पहले से शिकारी जाल और फंदे लगाकर घात लगाए बैठे हैं। बस्तर के जंगलों में नक्सलियों के बाद अब शिकारी अपना वर्चस्व स्थापित करते दिख रहे हैं।

ज्ञात हो कि भांसी से लगा डिपॉजिट-4 का जंगल बाघों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। दशकों से यहां बाधों की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है। हाल ही में बाघ द्वारा मवेशी के शिकार की घटना भी सामने आई थी। फरवरी महीने में लगाए गए ट्रैप कैमरों में भी बाघ की तस्वीरें कैद हुई थीं। वन विभाग ने राजा बंगला क्षेत्र के आसपास बाघों के लिए ऊंची घास लगवाई है। वन्यजीवों के लिए तालाब का निर्माण भी कराया है। इसी कारण गर्मी में पानी की तलाश में बड़ी संख्या में वन्यजीव यहां पहुंचते हैं। वन्यजीवों के इसी आवागमन का लाभ उठाकर शिकारी सक्रिय हो गए हैं। डिपॉजिट-4 के आसपास जंगल में आग लगा देने से यहां के वन्यजीव बाघ, हिरण, चीतल, सांभर, खरगोश, विशाल गिलहरी, जंगली सूअर आदि नीचे की ओर भागते हैं और शिकारियों द्वारा पहले से लगाए गए जाल और फंदों में फंस जाते हैं। फिर शिकारी तीर-धनुष और अन्य हथियारों से उनका शिकार कर लेते हैं।
जिले के भांसी से लगे राजा बंगला क्षेत्र के आसपास जंगल और पहाड़ियां इन दिनों आग की चपेट में हैं। बताया जा रहा है कि शिकारियों ने यहां पाए जाने वाले बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के शिकार के लिए यह आग लगाई है। लगभग सप्ताह भर से यह जंगल जल रहा है। बता दें कि भांसी के डिपॉजिट-4 क्षेत्र को बाधों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। यहां ट्रैप कैमरों में भी बाघ की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। वन विभाग ने वन्यजीवों के लिए यहां तालाब और ऊंची घास विकसित की है।
बताया जाता है कि शिकार के बाद कई मामलों में वन्यजीवों का मांस जंगल में ही पकाकर खाया जाता है। परंपरा और शिकार के नाम पर चल रहा यह खेल अब दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। हाल ही में जिले में बाप और तेंदुए की खाल के तीन मामले सामने आए थे, जबकि बारसूर क्षेत्र में दुर्लभ विशाल गिलहरियों की नौ खालें भी बरामद की गई थीं।
बस्तर अंचल के जंगलों में पिछले एक महीने में आधा दर्जन से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें शिकारियों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर ही हमला कर दिया है। बस्तर जिले के माचकोट जंगल में भी हिरण का शिकार करते पकड़े जाने पर शिकारियों के दल ने वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर हमले किए थे, जिसमें कुछ वनकर्मी घायल भी हुए थे। इसी तरह अन्य इलाकों से भी खबरें आती रहीं हैं कि शिकारी खतरनाक इरादों के साथ जंगल में सक्रिय हैं।
उल्लेखनीय है कि वनांचल बस्तर के घने जंगलों में चार दशक तक नक्सलियों का वर्चस्व रहा है। नक्सलियों की दहशत के चलते शिकारी जंगलों में प्रवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे, लेकिन अब नक्सली जब लगभग खत्म हो चुके हैं, शिकारियों ने अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया है। पिछले दो सप्ताह में ही बस्तर जिले के माचकोट जंगल सहित दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर जिले के जंगलों में अवैध शिकार की लगातार शिकायतें सामने आई हैं।
पुलिस की मदद ली जाएगी
रंगनाथा रामाकृष्णा वाय, डीएफओ, दंतेवाड़ा ने बताया कि जंगल में आग लगने की सूचना पर विभाग की एक टीम मौके पर भेजी गई थी, लेकिन शिकारियों की संख्या अधिक होने के कारण टीम को बैरंग लौटना पड़ा। शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस की मदद ली जाएगी।

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