कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की कहानियों पर उनकी उपस्थिति में जे.एन.यू. नई दिल्ली में कार्यशाला
दिल्ली।प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में 15 से 17 मार्च 2026 को हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मलखान सिंह के आमंत्रण पर भिलाई के साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने विभिन्न सत्रों में आयोजित वैचारिक गोष्ठी एवं कथा पाठ में भाग लिया । जे.एन.यू. के अनुवाद प्रवीण शोधार्थियों के बीच डॉ. परदेशीराम वर्मा ने अपनी चुनिंदा चार कहानियों पर विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब दिया । एम.ए. हिन्दी के विद्यार्थियों तथा शोधार्थी विद्यार्थियों ने लेखक की कहानियों पर भी विचार दिया । इन कहानियों के अतिरिक्त डॉ. परदेशीराम वर्मा के कथा संग्रह दिन-प्रतिदिन, बुधिया की तीन रातें, फैसला, मेरी प्रिय कहानियों तथा माटीपुत्र से चयनित कथाओं पर भी चर्चा हुई । कमलेश्वर द्वारा चयनित एवं राजपाल से चार खंड़ों में की प्रकाशित सदी की कालजयी कहानियों में प्रकाशित कहानी दिन प्रतिदिन, साप्ताहिक हिन्दुस्तान के सर्वभाषा कहानी विशेषांक में प्रकाशित तथा रमेश नैयर द्वारा संपादित बीसवीं सदी की कालजयी कहानियाँ में संकलित पकड़, ज्ञानरंजन द्वारा पहल में प्रकाशित कहानी झालर और माटीपुत्र का पाठ डॉ.परदेशीराम वर्मा ने किया । जे.एन.यू. के विद्यार्थियों एवं डॉ. मलखान सिंह ने इन कहानियों के विविध पक्षों पर विचार दिया ।
पीयूष प्रखर, प्रशांत कुमार सिंह, कंचन राय शोध छात्रों सहित डॉ. पूजा, आकिल खाँ, गोविन्द भारती (उर्दु), अनुराग कुमार, (रूसी भाषा), भरत कुमार, (पश्तो) भाषा, विश्वजीत कलता, (कोशली भाषा), मिलिन्द साहू, शिवांगी पटेल, प्रीति, कृष्णा केशरवानी, देवंतिका साहू, दिव्यांश तिवारी, जयशंकर, त्रावणी वर्मा ने सत्रों में कहानियों पर विचार दिया । लेखक से प्रश्न का सत्र दूसरे दिन भी हुआ । विश्वजीत कोलता, नेशनल कॉलेज नुआपाड़ा में हिन्दी के व्याख्यता हैं तथा डॉ. पूजा जे.एन.यू में प्रोफेसर हैं । डॉ. मलखान सिंह के निर्देशन में पीयूश प्रखर, प्रशांत सिंह तथा कंचन राय शोधकार्य कर रहे हैं । विराट एक हजार एकड़ के क्षेत्र में फैले जे.एन.यू. में वाचनालय तथा विभिन्न छात्रावासों सहित सभागार और खुले वातावरण में सत्रों का संयोजन डॉ. मलखान सिंह ने किया । लेखक डॉ. परदेशीराम वर्मा को विभिन्न सत्रो में आत्मीय स्वागत एवं भेंट अनुवादक शोधार्थियों एवं प्रोफेसर मलखान सिंह ने प्रदान किया ।
डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा कि मेरे लिए यह अनोखा अनुभव है विगत 55 वर्षों से मेरी कहानियाँ विभिन्न पत्रिकाओं के साथ देश की प्रतिष्ठित प्रकाशन गृहों के द्वारा संकलनों में आई । डॉ. मलखान सिंह ने संकलनों से कहानियों को पढ़कर मेरी कहानियों के अनुवाद के लिए साल भर पहले चुना । आभारी हूँ कि मेरी कहानियाँ जो छत्तीसगढ़ी जीवन और संस्कृति पर ही अधिकतर केन्द्रित हैं उन्हें इस तरह आपने महत्व दिया । डॉ. मलखान सिंह ने कहा कि किसी जनपद किसी विशेष क्षेत्र के जीवन से कहानियों का ढांचा हर प्रतिभाशाली कथाकार चुनता है मगर जो वैश्विक प्रभाव उन कहानियों में निहित होता उससे कहानियाँ सम्मोहन रचती है । प्रेमचंद, रेणु से लेकर डॉ. परदेशीराम वर्मा अपने अपने क्षेत्रों के गहन जानकार हैं । लेकिन कहानियों में बीज रूप में जो बड़ा आसमान है वह चमत्कारिक है । इस साहित्यिक यात्रा में साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की व्याख्याता बिटिया श्रीमती स्मिता वर्मा तथा नाती नीतीश कुमार भी साथ रहे । जे.एन.यू की साहित्यिक यात्रा के बाद इन्होंने श्रीनगर और अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा एक सप्ताह तक की ।
डॉ. परदेशीराम वर्मा
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