राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का हुआ एक दिवसीय सम्मेलन : जनजाति आन्दोलन केवल गौरव गाथा नहीं है अपितु यह हमारी संस्कृति की ताकत की कहानी – प्रहलाद पटेल केंद्रीय मंत्री
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का हुआ एक दिवसीय सम्मेलन : जनजाति आन्दोलन केवल गौरव गाथा नहीं है अपितु यह हमारी संस्कृति की ताकत की कहानी – प्रहलाद पटेल केंद्रीय मंत्री
भुवन वर्मा बिलासपुर 9 सितंबर 2022

बिलासपुर । अटल बिहारी वाजपेई विश्व विद्यालय बिलासपुर और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संयुक्त तत्वाधान में “स्वतंत्रता आंदोलन में जनजाति नायकों का योगदान ” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अटल बिहारी वाजपेई विश्व विद्यालय के कोनी स्थित प्रशासनिक सभागार में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्री प्रहलाद पटेल केन्द्रीय मंत्री खाद्य प्रसंस्करण और उधोग थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति आचार्य अरूण दिवाकर नाथ बाजपेई जी ने किया। मुख्य वक्ता सत्येन्द्र सिंह वनवासी विकास परिषद थे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से रविशंकर विशिष्ट अतिथि थे। सर्वप्रथम अतिथियों ने स्वतंत्रता आंदोलन में शहीद जनजाति नायकों के प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उसके बाद वैभव सुरंग के द्वारा सम्मेलन की प्रस्तावना और उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया। तत्पश्चात कोमराम भीम के सक्षिप्त फिल्म दिखाया गया। मुख्य वक्ता सत्येन्द्र सिंह के द्वारा विस्तार पूर्वक सम्पूर्ण देश में जनजाति नायकों के द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ चलाए गए आंदोलन और बलिदान का तथ्य सहित व्याख्या की गई। मुख्य अतिथि प्रहलाद पटेल केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण और उधोग मंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि जनजाति आन्दोलन केवल गौरव गाथा नहीं है अपितु यह हमारी संस्कृति की ताकत की कहानी है। जनजाति समाज ने जितना बलिदान देश के लिए किया है अन्य समुदायों ने नहीं किया परन्तु दुर्भाग्यवश उन्हें वह सम्मान और स्थान इतिहास में नहीं मिल पाया। उसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली के द्वारा निर्मित फिल्म को सभी के समक्ष प्रदर्शित किया गया। तत्पश्चात राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के रविशंकर ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली के अधिकार और दायित्वों का व्याख्या किया और विद्यार्थी और गणमान्य नागरिकों के प्रश्नो का जवाब देते हुए उनके साथ संवाद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति आचार्य अरूण दिवाकर नाथ बाजपेई ने अपने उद्बोधन में कहा कि जनजाति समाज भारतीय समाज के अभिन्न अंग है जिन्होंने स्वतंत्रता के दौरान अंग्रेजों से मुकाबला किया और आज़ भी जल जंगल जमीन को बचाने संघर्ष कर रही है। उनके योगदान पर नया इतिहास लिखे जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन जनजाति आयोग के नितेश साहु ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ गौरव साहू विभागाध्यक्ष वाणिज्य विभाग और सहसंयोजक प्रशासनिक ने किया। इस कार्यक्रम में प्रशासनिक संयोजक वित्त अधिकारी अलेक्जेंडर कुजुर और शैक्षणिक संयोजक स्वाति रोज़ टोप्पो के विशेष भूमिका रही। इस कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ सुधीर शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ पी के पांडेय, उपकुलसचिव शैलेन्द्र दुबे, सहायक कुलसचिव रामेश्वर राठौर, प्रदीप सिंह, राष्ट्रीय सेवा योजना के डा मनोज सिन्हा, डॉ सुमोना भट्टाचार्य, डॉ पूजा पांडेय, डॉ सीमा बेरोलकर, डॉ लतिका भाटिया, डॉ रश्मि गुप्ता, डॉ हैरी जार्ज, डॉ हामिद अब्दुल्ला, डॉ सौमित्र तिवारी, डॉ यशवंत पटेल, डॉ धर्मेंद्र कश्यप,श्रीयक परिहार, मनीष सक्सेना, सहित विश्व विद्यालय के समस्त अधिकारी, प्राध्यापक कर्मचारी और विद्यार्थी गण तथा अटल बिहारी वाजपेई विश्व विद्यालय बिलासपुर से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्राध्यापक और विद्यार्थी गण उपस्थित थे



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