समतामूलक समाज के निर्माण में महात्मा फूले का योगदान महत्वपूर्ण – मुख्यमंत्री बघेल

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समतामूलक समाज के निर्माण में महात्मा फूले का योगदान महत्वपूर्ण – मुख्यमंत्री बघेल

भुवन वर्मा बिलासपुर 28 नवम्बर 2021

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

पुणे – महात्मा फुले और श्रीमती सावित्री बाई फुले ने समाज के वंचितों , पीड़ितों , शोषितों और तिरस्कृत लोगों के लिये जीवन भर काम किया , उन्हें जीवन की राह दिखायी और समाज में सम्मान दिलाया। महात्मा फुले का जीवन एक उत्कृष्ट क्रांतिकारी का जीवन था। उन्होंने अपने समय की समस्याओं को नजदीक से देखा , समझा और उनका निदान भी खोजा। उन्होंने समाज में व्याप्त रूढ़ियों पर सीधे तौर पर प्रबल प्रहार किया। उस समय की शिक्षा , चिकित्सा और समता की समस्याओं के निदान का काम करते हुये समतामूलक समाज के निर्माण के लिये महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उक्त बातें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुणे में “महात्मा फूले समता पुरस्कार” से सम्मानित होने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुये कहा। उन्होंने इस अवसर पर महाराष्ट्र की पुण्य भूमि को नमन करते हुये कहा कि यह भूमि महात्मा ज्योतिबा फूले , बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर सहित अनेक संत महात्माओं की और वैचारिक क्रांति भूमि है। उन्होंने कहा हिन्दुस्तान के पांच हजार साल के इतिहास में साढ़े तीन हजार साल पिछड़ों का राज रहा। लोग खेती किसानी करते थे , और हुनरमंद शिल्पकार और कारीगर शिल्पकारी और कारीगिरी करते थे।
प्राचीन काल में हिन्दुस्तान का व्यापार देश दुनियां में खूब फला-फूला इसलिये हिन्दुस्तान सोने की चिड़िया कहलाया। यह स्थिति मुगलकाल में भी रही लेकिन अंग्रेजों के शासन काल में देश की अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई। खेती किसानी नष्ट होने लगी , हुनरमंद लोगों के पास काम नहीं रहा। ऐसे में एक ज्योति महात्मा ज्योतिबा फुले के रूप में सामने आई। जिन्होंने समाज सुधार के माध्यम से समतामूलक समाज की स्थापना के लिये कार्य किया। वंचितों , तिरस्कृतों को सम्मान दिलाया और शिक्षा पर जोर दिया। विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की। उन्होंने आगे कहा कि महात्मा फुले सामाजिक क्रांति के अग्रणी नेता थे , तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी राजनीतिक क्रांति के अग्रणी समाज सुधारक थे। महात्मा गांधी ने लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिये कुटीर उद्योगों पर जोर दिया। चरखा और तकली को हथियार बनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू ने महात्मा फुले के काम को आगे बढ़ाया। उन्होंने समाज के उत्पादक समाज को आगे बढ़ाने का काम किया। सीएम बघेल ने भारत के संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को नमन करते हुये कहा कि उन्होंने संविधान के माध्यम से हमें बराबरी का , समानता का अधिकार दिलाया। उन्होंने आज की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुये कहा कि आज हमारा संविधान और संस्थायें खतरे में हैं , इन्हें बचाने की जरूरत है। उन्होंने आज की परिस्थितियों में पूंजीवाद और बाजारवाद से लड़ने के लिये छोटे कारीगरों द्वारा उत्पादि वस्तुओं के उपयोग को आवश्यक बताया। सीएम बघेल ने छग के गोधन न्याय योजना का उल्लेख करते हुये कहा कि इस योजना में दो रूपये किलो में गोबर खरीद कर गौठानों में स्व-सहायता समूहों द्वारा जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है जिसमें हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। अब जैविक खाद के साथ गोबर से बिजली भी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्मी खाद का उत्पादन कर हम जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इस अवसर पर महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रूपाली ताई , बापू भुजबल , हरि नरके , सिद्धार्थ कुशवाहा सहित अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद् के अनेक पदाधिकारी जन प्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
गौरतलब है कि समता दिवस के मौके पर अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद द्वारा सामाजिक, राजनीतिक, साहित्य, पत्रकारिता जैसे कई क्षेत्रों में योगदान देने वाली हस्तियों को महात्मा फुले समता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल को अपने कार्यकाल के दौरान समाज के वंचित वर्गों को न्याय दिलाने की दिशा में किये गये असाधारण महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इस वर्ष के पुरस्कार के लिये चुना गया है। सीएम बघेल को आज महात्मा ज्योतिबा फुले की 131वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पुणे में ’महात्मा फुले समता पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। पुणे के महात्मा फुले स्मारक ’समता भूमि’ में अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद् द्वारा आयोजित समारोह में परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष छगन भुजबल ने फुले पगड़ी , मानद शाल , सम्मान निधि और स्मृति चिन्ह प्रदान कर ’महात्मा फुले समता पुरस्कार’ से सम्मानित किया। बताते चलें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपने कार्यकाल के दौरान समाज के वंचित वर्गों को न्याय दिलाने की दिशा में लिये गये फैसलों और असाधारण महत्वपूर्ण कार्यों के लिये इस वर्ष के ’महात्मा फुले समता पुरस्कार’ के लिये चुना गया है। मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में महात्मा ज्योतिबा फुले की पुस्तक ’किसान का कोड़ा’ की प्रति भेंट की गई। इसके पहले मुख्यमंत्री ने महात्मा फुले स्मारक ’समता भूमि’ में महात्मा फुले और श्रीमती सावित्री बाई फुले की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

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