राहत भरी खबर….’कोरोना से मौत’ मृत्यु प्रमाण पत्र में लिखा होना अब जरूरी नहीं : राज्य आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आदेश जारी

भुवन वर्मा बिलासपुर 10 अक्टूबर 2021

रायपुर । . सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना संक्रमण से मरने वालों को 50 हजार रुपए की सहायता देने जारी है। इसे लेकर पूर्व में राज्य आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आदेश में कोविड 19 डेथ एनालिसिस कमेटी (सीडीएसी) द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण- पत्र अनिवार्य था। मगर, आवेदकों को हो रही परेशानी को देखते हुए इस अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। गत शुक्रवार को राहत आपदा सचिव रीता शांडिल्य द्वारा सभी कलेक्टरों को जारी संशोधित आदेश के मुताबिक कोविड-19 से हुई मृत्यु के संबंध में मृत्यु प्रमाण-पत्र में लिखा गया, मृत्यु का कारण निर्णायक नहीं होगा। इस संबंध में ऐसे अन्य जांच या उपचार संबंधी दस्तावेज, जिससे यह स्पष्ट होता है, मृत्यु कोविड-19 के कारण हुई है। वह मान्य होगा। पूर्व में जारी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर मुआवजा के लिए इनकार नहीं किया जाएगा परिजन को 50 हजार मुआवजे की पात्रता होगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा-निर्देश के बाद राज्य ने यह संशोधन किया है। पूर्व में कमेटी द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र के बाद आवेदन करने पर मुआवजा मिलने का प्रावधान था।


नई गाइडलाइन इस प्रकार है:-

■ मृतकों के आरटीपीसीआर या मोलिकयुलर टेस्ट या आरएटी टेस्ट पॉजिटिव होंगे तो भी परिवार सहायता की पात्रता रखेंगे।

■ जांच की तारीख से कोरोना निर्धारित होने के 30 दिन के भीतर होने वाली मृत्यु को कोरोना के कारण होने वाली मृत्यु माना जाएगा, भले ही मृत्यु अस्पताल के बाहर ही क्यों न हुई हो।

अस्पताल में कोविड-19 के ऐसे मामले जिनमें मरीज 30 दिनों से अधिक समय तक भर्ती रहा और बाद में उसकी मृत्यु हो गई, उन्हें भी कोरोना से मृत्यु माना जाएगा।

कोरोना के ऐसे मामले जिसमें व्यक्तियों की मृत्यु अस्पताल या घर में हुई हो और जहां फॉर्म-4 एवं 4 (1) में मृत्यु के कारण का मेडिकल प्रमाण-पत्र पंजीकरण प्राधिकारी को जारी किया गया हो, उसे कोरोना से मृत्यु के रूप में माना जाएगा।
पहले बने मृत्यु प्रमाण पत्र में हो सकेगा सुधार

पहले से जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र के मामले मृतक के परिवार का कोई भी सदस्य मृत्यु प्रमाण-पत्र में लिखे गए मृत्यु के कारण से परेशान है। वह मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी से संपर्क करेगा। इसके बाद जांच और इलाज संबंधी दस्तावेजों के परीक्षण करके पंजीकरण अधिकारी मृत्यु प्रमाण-पत्र को संशोधित करेगा। यदि परिवार का सदस्य पंजीकरण प्राधिकारी के आदेश से संतुष्ट न हो तो शिकायत निवारण समिति के समक्ष आवेदन दे सकते हैं।

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