पूर्व राष्ट्रपति प्रणव के निधन पर सात दिन का राष्ट्रीय शोक
पूर्व राष्ट्रपति प्रणव के निधन पर सात दिन का राष्ट्रीय शोक
भुवन वर्मा बिलासपुर 31 अगस्त 2020
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली – भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का 84 वर्ष की उम्र में आज देर शाम सैन्य अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले के मिराती नामक गांव में कामदा किंकर मुखर्जी और श्रीमति राजलक्ष्मी मुखर्जी के घर में हुआ। उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे और बाद में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया। वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य भी रहे। साल 1952 से 1964 तक प्रणब के पिता कामदा पश्चिम बंगाल विधानपरिषद के सदस्य भी रहे। प्रणब मुखर्जी ने वीरभूमि जिले के सुरी विद्यासागर कॉलेज से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर और विधि में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
प्रणब मुखर्जी 13 जुलाई, 1957 को सुव्रा मुखर्जी के साथ परिणय सूत्र में बंधे, जो बांग्लादेश में स्थित नरायल की रहने वाले थीं और 10 वर्ष की उम्र में अपने परिवार के साथ तत्कालीन कोलकाता जो अब कलकत्ता के नाम से जाना जाता है, आई थीं। इन दोनों के दो पुत्र और एक पुत्री हैं। पुत्रों का नाम है अभिषेक मुखर्जी और अभिजीत मुखर्जी। पुत्री का नाम है शर्मिष्ठा मुखर्जी। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद प्रणब मुखर्जी कलकत्ते में ही पोस्ट एंड टेलिग्राफ विभाग में अपर डिविजन क्लर्क थे। प्रणब दा ने 1963 में पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में स्थित विद्यानगर कॉलेज में कुछ समय के लिये राजनीति शास्त्र भी पढ़ाया। उन्होंने कुछ समय के लिये देशे डाक नामक समाचार पत्र में पत्रकार की भूमिका भी निभायी। प्रणब मुखर्जी का राजनीति से पहला वास्ता तब पड़ा जब उन्होंने 1969 में मिदनापुर उपचुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदावर के तौर पर खड़े वीके कृष्ण मेनन के लिये चुनाव प्रचार किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उस उपचुनाव में प्रणब मुखर्जी के चुनावी रणनीतिक कौशल से बहुत ज्यादा प्रभावित हुईं और उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का सदस्य बना दिया। इसी साल जुलाई में प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस ने राज्यसभा भेज दिया। और इस तरह प्रणब मुखर्जी का राजनीति में औपचारिक रूप से प्रवेश हुआ। प्रणव दा साल 1969 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर पहली बार उच्च सदन यानी राज्यसभा पहुंँचे। इसके बाद कई विभागों में मंत्री भी बने।उन्होंने यूपीए उम्मदीवार के तौर पर प्रतिपक्षी उम्मीदवार पीए संगमा को हराकर 25 जुलाई 2012 को भारत के तेरहवें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस प्रकार राष्ट्रपति बनने के साथ ही प्रणब दा का लगभग 45 वर्ष लंबे राजनीतिक कैरियर पर विराम लगा। वर्ष 2019 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। उनकी निधन के बाद केंद्र सरकार ने सात दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कल सुबह 10:00 बजे प्रणब मुखर्जी का पार्थिव शरीर उनके घर पर लाया जयेगा। जहाँ अंतिम दर्शन के लिये पार्थिव शरीर रखे जायेंगे और उनका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत होगा।
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