दीक्षारंभ 2026-27 का सातवां एवं अंतिम दिवस:कृषि शिक्षा के साथ नवाचार, स्वरोजगार, ग्रामीण विकास और अनुशासन का दिया संदेश

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बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में बी.एससी. कृषि प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित सात दिवसीय दीक्षारंभ 2026-27 कार्यक्रम का सातवां एवं अंतिम दिवस विविध शैक्षणिक, प्रेरणात्मक एवं रचनात्मक गतिविधियों के साथ संपन्न हुआ। सात दिनों तक चले इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा की व्यापक संभावनाओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें महाविद्यालयीन जीवन, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता, ग्रामीण विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम के अंतिम दिन के प्रथम सत्र में ‘कृषि के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कृषि के पारंपरिक स्वरूप को आधुनिक, वैज्ञानिक और अधिक दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि मौसम पूर्वानुमान, फसल एवं मृदा निगरानी, रोग एवं कीटों की समय पर पहचान, सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन, उपज का अनुमान तथा बाजार संबंधी निर्णयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे कृषि विज्ञान के साथ आधुनिक तकनीकों का ज्ञान प्राप्त करें और भविष्य की कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं जलवायु-सहिष्णु बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।

इसके पश्चात ‘ग्रामीण विकास में कृषि स्नातकों की भूमिका’ विषय पर अतिथि शिक्षक (कृषि विस्तार) डॉ. हेम प्रकाश वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कृषि स्नातक केवल कृषि उत्पादन की तकनीक जानने वाले विशेषज्ञ नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक हैं। उन्होंने किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने, कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए कृषि स्नातकों की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को गांवों की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके स्थानीय एवं वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया।

‘कृषि में कृषि अभियांत्रिकी का महत्व एवं भूमिका’ विषय पर अतिथि वैज्ञानिक (कृषि अभियांत्रिकी) डॉ. कार्मेंद्र चक्रधारी ने कृषि में तकनीकी एवं यांत्रिक हस्तक्षेप की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कृषि यंत्रीकरण, जल प्रबंधन, ऊर्जा के कुशल उपयोग, फसल कटाई एवं प्रसंस्करण तथा श्रम एवं लागत को कम करने में कृषि अभियांत्रिकी की भूमिका समझाई। उन्होंने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में कृषि विज्ञान और अभियांत्रिकी का समन्वय उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के समय, श्रम और संसाधनों की बचत में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

भोजन अवकाश के पश्चात आयोजित द्वितीय सत्र में ‘मशरूम उत्पादन—स्वरोजगार का साधन’ विषय पर प्रमुख वैज्ञानिक (पादप रोग) डॉ. आर.के.एस. तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने मशरूम उत्पादन की संभावनाओं, आवश्यक तकनीक, उत्पादन प्रक्रिया, पोषण महत्व तथा इसके माध्यम से स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमित भूमि, कम संसाधन और अपेक्षाकृत कम अवधि में उत्पादन की संभावना के कारण मशरूम उत्पादन युवाओं के लिए कृषि आधारित उद्यम का एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा के साथ मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद ‘रैगिंग : परिभाषा, नियंत्रण एवं परिणाम’ विषय पर सहायक प्राध्यापक (कीट विज्ञान) डॉ. यशपाल सिंह निराला ने विद्यार्थियों को जागरूक किया। उन्होंने रैगिंग के स्वरूप, इसके दुष्परिणामों तथा महाविद्यालय में स्वस्थ, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से आपसी सम्मान, अनुशासन, सहयोग एवं सकारात्मक व्यवहार को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि महाविद्यालयीन जीवन सीखने, मित्रता और व्यक्तित्व विकास का अवसर है, जिसे सभी विद्यार्थियों को गरिमा एवं जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।

सीख, सहभागिता और संकल्प के साथ हुआ समापन

सात दिवसीय दीक्षारंभ कार्यक्रम के समापन अवसर पर ‘सीख, सहभागिता और संकल्प’ विषयक विशेष गतिविधि आयोजित की गई। इस दौरान पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सहभागिता, अभिव्यक्ति, रचनात्मकता, सक्रियता एवं व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखते हुए छह विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किया गया।

सर्वश्रेष्ठ वक्ता (बालिका) के लिए ज्येष्ठा परिधि, सर्वश्रेष्ठ वक्ता (बालक) के लिए प्रेम कुमार रात्रे, सर्वश्रेष्ठ रचनात्मक विचार के लिए नीलम मीना, सर्वाधिक सक्रिय विद्यार्थी के लिए भूमिका पटेल, उत्कृष्ट प्रथम प्रभाव के लिए आदित्य पटेल तथा सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी के रूप में करन केशरवानी को पुरस्कृत किया गया।

पुरस्कार वितरण ने विद्यार्थियों में उत्साह एवं आत्मविश्वास का संचार किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से फीडबैक भी लिया गया, जिसमें उन्होंने सात दिनों के दौरान प्राप्त अनुभवों, सीख और गतिविधियों को साझा किया। विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर आयोजित व्याख्यानों, संवादात्मक गतिविधियों, प्रश्नोत्तरी, सहभागिता आधारित कार्यक्रमों तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन को अपने लिए उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।

“कृषि केवल विषय नहीं, समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है”—डॉ. चौरे

समापन उद्बोधन में अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश उनके जीवन की एक नई यात्रा का शुभारंभ है। कृषि शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित न रखते हुए इसे किसान, गांव, पर्यावरण और समाज से जोड़कर देखने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुशासन, संवेदनशीलता, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता का विकास करें।

उन्होंने कहा कि आज का कृषि स्नातक केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुसंधान, कृषि व्यवसाय, प्रसंस्करण, उद्यमिता, डिजिटल कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासन सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को दीक्षारंभ कार्यक्रम से प्राप्त सीख को अपने आगामी महाविद्यालयीन जीवन में व्यवहार में उतारने तथा निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया।

सामूहिक सहयोग से सफल हुआ सात दिवसीय आयोजन

सात दिवसीय दीक्षारंभ 2026-27 कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक वैज्ञानिक अजीत विलियम्स, सह-संयोजक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. अजय टेगर, अकादमिक प्रभारी डॉ. युष्मा मारू, डॉ. यशपाल सिंह निराला, डॉ. हेम प्रकाश वर्मा, डॉ. कार्मेंद्र चक्रधारी, डॉ. मनीषा सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं का सराहनीय सहयोग रहा।

कार्यक्रम ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को महाविद्यालयीन जीवन की नई शुरुआत के साथ ज्ञान, अनुशासन, सहभागिता, नवाचार, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। सात दिनों की यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए केवल परिचय कार्यक्रम न रहकर उनके शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास की दिशा में एक प्रेरणादायी शुरुआत सिद्ध हुई।

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