सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग का कारनामा– विभागीय निर्देशों की अनदेखी कर शिक्षकों को बनाया जा रहा अधीक्षक

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बिलासपुर।सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग बिलासपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद शिक्षकों को उनके मूल शिक्षण कार्य से मुक्त नहीं किया गया है। विभाग की ओर से प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना करते हुए बड़ी संख्या में शिक्षकों को छात्रावासों के प्रभारी अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार थमाया जा रहा है। जिले में कुल 84 छात्रावासों के सापेक्ष 60 से अधिक नियमित अधीक्षक कार्यरत हैं, इसके बावजूद बिल्हा, तखतपुर, चपोरा, कुरवार, शिवतराई, जरहाभाटा, बोड़सरा और मस्तूरी जैसे विकासखंडों में नियमित अधीक्षकों की मौजूदगी के बावजूद शिक्षकों को प्रभारी अधीक्षक के रूप में तैनात रखा गया है।

बिल्हा और तखतपुर जैसे क्षेत्रों में तो एक ही शिक्षक को दो-दो छात्रावासों का प्रभार दिया गया है, जबकि वहाँ पहले से ही नियमित अधीक्षक मौजूद हैं। जारहाभाटा कैंपस में तीन नियमित अधीक्षकों की उपलब्धता के बाद भी प्रभारी व्यवस्था बनाए रखना विभाग की मनमानी और प्रशासनिक अव्यवस्था को उजागर करता है। सहायक आयुक्त कार्यालय द्वारा नियमित अधीक्षकों को दरकिनार कर शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार देने का यह विकल्प विभागीय कार्य संस्कृति और शिक्षकों के मूल कर्तव्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

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