सफीना हुसैन के NGO को मिला रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड, Ramon Magsaysay Award जीतने वाला पहला भारतीय NGO Educate Girls
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार को अक्सर एशिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है. यह सम्मान उन व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने समाज की भलाई के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया हो. रेमन मैग्सेसे फाउंडेशन ने बताया कि यह अवॉर्ड Safeena Husain की ‘Educate Girls’ को लड़कियों और युवा महिलाओं की शिक्षा के जरिए समाज में बदलाव लाने के लिए दिया गया है.
भारत की एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) ‘एजुकेट गर्ल्स’ ने इतिहास रच दिया है. यह संस्था एशिया के सबसे बड़े सम्मान ‘रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड’ जीतने वाली पहली भारतीय NGO बन गई है. इस संस्था की शुरुआत सफीना हुसैन ने साल 2007 में राजस्थान के गांवों से की थी. उनका सपना था कि हर लड़की स्कूल जाए और अपनी पढ़ाई पूरी करे.
एजुकेट गर्ल्स’ संस्था ने अब तक 11 लाख से ज्यादा लड़कियों का स्कूल में दाखिल करवाया और देशभर में 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों पर असर डाला. यह संस्था ना सिर्फ लड़कियों को स्कूल भेजती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि वे स्कूल में जाती रहें और पढ़ाई पूरी करें. सफीना की संस्था ‘लड़कियों को पढ़ाने की जरूरत नहीं’ जैसी रूढ़िवादी सोच को बदलने का भी काम करती है.
सफीना हुसैन के पति मशहूर फिल्म निर्देशक हंसल मेहता हैं, जो सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. मीडिया से बात करते हुए सफीना हुसैन ने कहा,
“भारत की पहली गैर-सरकारी संस्था के तौर पर ‘रेमन मैग्सेसे अवार्ड’ पाना ‘एजुकेट गर्ल्स’ और देश के लिए ऐतिहासिक पल है.”
उन्होंने आगे कहा,
“यह सम्मान भारत की उस जन-आंदोलन की पहचान है, जो एक दूर-दराज के गांव की एक लड़की से शुरू हुआ और आज पूरे समाज को बदल रहा है.”
रेमन मैग्सेसे फाउंडेशन ने बताया कि यह अवॉर्ड ‘एजुकेट गर्ल्स’ को ‘लड़कियों और युवा महिलाओं की शिक्षा के जरिए समाज में बदलाव लाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनके अंदर आत्मविश्वास जगाने’ के लिए दिया गया है.
साल 2015 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ ने शिक्षा जगत में दुनिया का पहला ‘डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड’ (DIB) शुरू किया था, जिसमें पैसे तभी मिलते थे जब तय नतीजे सामने आएं. यह मॉडल इतना सफल रहा कि संस्था ने गांव के 50 पायलट स्कूलों से शुरुआत कर अब 30,000 गांवों तक पहुंच बना ली और 20 लाख से ज्यादा लड़कियों को इसका फायदा हुआ.
संस्था ने ‘प्रगति’ नाम का एक ओपन स्कूलिंग प्रोग्राम भी शुरू किया है, जिससे 15 से 29 साल की लड़कियां अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर सकती हैं. यह प्रोग्राम 300 से शुरू होकर आज 31,500 से ज्यादा लड़कियों तक पहुंच चुका है.
About The Author


ФизиотерапияФизиотерапия, Рехабилитация, Мануална терапия, Хиропрактика, Лечебен масаж, Иглотерапия, Хиджама (Кръвни вендузи), Лазерна епилация, Антицелулитен масаж, Антицелулитни терапии
Robocombo Teknolojiarduino, drone ve bileşenler, drone parçaları
Istanbul historical tour Highly recommend for couples and solo travelers. https://golitech.com/?p=2537
Istanbul heritage tour Excellent for first-time visitors to the city. https://adhfp.org/?p=4157
Istanbul Archaeological Museum tour We saw parts of Istanbul we’d never find alone. https://cirquevoyage.com/?p=3230
Sigara Bırakma | Kc Psikolojimoraterapi, sigara bıraktırma, Rezonans
Kes – Mak Bahçe Aksesuarları ve Yedek Parça | Malatya benzinli testere yedek parça, testere zinciri, ağaç kesme pala, klavuz, elektronik bobin, hava filtresi, stihl malatya bayi