राजधानी रायपुर में लागू होगी पुलिस कमिश्नर प्रणाली मुख्यमंत्री ने की स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा

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कमिश्नरेट मॉडल शहर-केंद्रित कानून-व्यवस्था के लिए तेज़, केंद्रीकृत और जवाबदेह फ्रेमवर्क देता है। रायपुर में इसका अर्थ होगा—घटनाओं पर फौरन निर्णय, बेहतर भीड़/ट्रैफिक प्रबंधन और लाइसेंसिंग-प्रक्रियाओं में सुव्यवस्था; साथ ही, शक्तियों के संकेंद्रण पर नागरिक निगरानी और पारदर्शिता के मजबूत उपाय भी समान रूप से ज़रूरी होंगे।

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की घोषणा की है। यह छत्तीसगढ़ में पहली बार है जब किसी जिले/संभाग में कमिश्नरेट मॉडल लागू होगा। उद्देश्य—तेज़ और एकीकृत कमांड के साथ शहर की कानून-व्यवस्था को और चुस्त बनाना है।

पुलिस कमिश्नर प्रणाली क्या है?

कमिश्नरेट मॉडल में शहर की पुलिस का एकीकृत कमांड सीधे कमिश्नर ऑफ पुलिस (CP) के हाथ में होता है। पारंपरिक SP–DM (जिला पुलिस अधीक्षकजिलाधीश) व्यवस्था में पुलिस संचालन और कार्यपालन (मैजिस्ट्रेसी) अलग-अलग हाथों में होते हैं, जबकि कमिश्नरेट में प्रमुख पुलिस अधिकारी को कुछ कार्यकारी मजिस्ट्रियल अधिकार भी दिए जाते हैं—यही इसे तेज़-प्रतिक्रिया वाला बनाता है।

कब और क्यों ज़रूरत महसूस होती है?

तेज़ी से बढ़ते महानगरीय क्षेत्रों में भीड़-प्रबंधन, सांप्रदायिक तनाव, वीआईपी सुरक्षा, बड़े आयोजनों, ट्रैफिक और साइबर अपराध जैसे मामलों में त्वरित निर्णय और एक-स्रोत जवाबदेही की आवश्यकता होती है। एक ही कमांड के अंतर्गत पुलिस व मजिस्ट्रियल शक्तियाँ आने से 144 जैसे प्रतिबंधात्मक आदेश, जुलूस/इवेंट की अनुमति, हथियार लाइसेंसिंग और भीड़-नियंत्रण पर मिनटों में निर्णय संभव होता है।

नए अधिकार—कौन और कैसे मिलते हैं?

कानून व्यवस्था संभालने के लिए कमिश्नरेट में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता) के तहत मजिस्ट्रियल शक्तियाँ सौंपी जाती हैं:

  • CrPC की धारा 20(5): राज्य सरकार, कमिश्नर ऑफ पुलिस को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समस्त/आंशिक अधिकार दे सकती है (कमिश्नरेट क्षेत्र में)।
  • CrPC की धारा 21: संयुक्त/अतिरिक्त/उप पुलिस आयुक्त (Jt/Adl/DCP) को स्पेशल एग्ज़िक्यूटिव मैजिस्ट्रेट के रूप में अधिकार दिए जा सकते हैं।
  • धारा 144, 107–110 जैसे प्रावधान—अमन-चैन भंग होने की आशंका पर तात्कालिक आदेश/बंधपत्र की कार्रवाई—इन मजिस्ट्रियल शक्तियों के दायरे में आती हैं।
  • Arms Act, 1959: कमिश्नरेट क्षेत्र में “जिला मजिस्ट्रेट” की परिभाषा में कमिश्नर ऑफ पुलिस सम्मिलित होते हैं; अतः हथियार लाइसेंसिंग/नियमन जैसे अनेक कार्य CP के पास आते हैं।

सरल शब्दों में—कमिश्नरेट बनने पर CP और उनके वरिष्ठ अधिकारियों को लॉ-एंड-ऑर्डर पर वही निर्णायक शक्तियाँ मिलती हैं जो सामान्यतः DM/Executive Magistrate के पास होती हैं; इसलिए पुलिस निर्णय, आदेश, और क्रियान्वयन एक ही शृंखला में कर पाती है।

यह प्रणाली किस एक्ट/कानून के तहत लागू होगी?

छत्तीसगढ़ में ढांचा मुख्यतः Chhattisgarh Police Act, 2007 और CrPC के प्रावधानों के जरिए अधिसूचना द्वारा बनाया जाता है। राज्य सरकार कमिश्नरेट क्षेत्र, पदों/अधिकारों और सीमा-रेखाओं को अधिसूचित करती है; साथ ही CrPC की धारा 20(5) व 21 के अनुसार पुलिस अधिकारियों को मजिस्ट्रियल शक्तियाँ प्रदान करती है। हथियार-लाइसेंसिंग जैसे विषयों पर Arms Act, 1959 स्वयमेव CP को सक्षम प्राधिकारी मानता है (कमिश्नरेट क्षेत्र में)।

कमिश्नरेट का सेटअप कैसा होता है?

सामान्यतः संरचना इस प्रकार रहती है (राज्य की अधिसूचना के अनुसार सूक्ष्म अंतर संभव):

  • कमिश्नर ऑफ पुलिस (CP) — अक्सर IG/ADG रैंक।
  • जॉइंट/एडिशनल CP (JCP/AdCP) — शहर-स्तरीय वर्टिकल्स (लॉ & ऑर्डर, क्राइम, ट्रैफिक, HQ) संभालते हैं।
  • डीसीपी (ज़ोन) — विभिन्न ज़ोनों/रेंज की कमान।
  • एसीपी/SDPO (डिविज़न/सर्किल) — थानों की देखरेख।
  • थाने: SHO/निरीक्षक/उप-निरीक्षक के नेतृत्व में; साथ में क्राइम ब्रांच, स्पेशल ब्रांच, साइबर, ट्रैफिक, वूमेन-एंड-चाइल्ड, लाइसेंसिंग, कंट्रोल रूम 112 जैसी विशेष इकाइयाँ।

कानून-व्यवस्था में क्या बड़े बदलाव आते हैं?

  • एकल कमांड, तेज़ निर्णय: धारा 144/इवेंट-नियमन जैसे आदेश CP/DCP स्तर पर तुरंत जारी हो सकते हैं—मैदान में “ऑर्डर-टू-एक्शन” समय घटता है।
  • भीड़/दंगा प्रबंधन: रूट डायवर्ज़न, ट्रैफिक, बल-तैनाती, ड्रोन/सीसीटीवी इंटीग्रेशन जैसी कार्रवाइयाँ एक ही कमान में समन्वित होती हैं।
  • लाइसेंसिंग/रेगुलेशन: हथियार, सार्वजनिक कार्यक्रमों के परमिट, दुकानों-स्थानों का नियमन CP की सुपरविजन में आता है—अनुमतियाँ तेज़ और जवाबदेह।
  • DM की भूमिका: राजस्व/भूमि/विकासात्मक प्रशासन DM के पास ही रहता है; लेकिन अमन-चैन से जुड़ी मजिस्ट्रियल शक्तियाँअधिसूचना के दायरे में CP/विधिक रूप से नामित पुलिस अधिकारियों को सौंपी जाती हैं।

नागरिकों को क्या फायदा—और संभावित चिंताएँ

फायदे

  1. सुरक्षा पर त्वरित प्रतिक्रिया—घटनास्थल पर आदेश और बल-तैनाती में देरी कम।
  2. एक दरवाज़ा, एक जवाबदेही—शहर पुलिस की नीतियाँ/अनुमतियाँ एक कमान से।
  3. विशेषीकृत इकाइयाँ—साइबर अपराध, ट्रैफिक, महिला-सुरक्षा, इंटेलिजेंस में बेहतर समन्वय।

संभावित चिंताएँ

  1. शक्तियों का संकेंद्रण—चेक्स-एंड-बैलेंसेज़ कमज़ोर पड़ने का खतरा; इसलिए मजबूत निगरानी/ग्रिवांस रिड्रेसल तंत्र ज़रूरी।
  2. प्रशिक्षण व क्षमता—मैदान में सफल संचालन के लिए सतत प्रशिक्षण, टेक्नोलॉजी और जन-सहभागिता अनिवार्य।

आगे की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी ?

राज्य सरकार को अधिसूचना जारी कर कमिश्नरेट की सीमाएँ, पद-ढाँचा, थानों/ज़ोनों का पुनर्संगठन, तथा CrPC की धारा 20(5) 21 के तहत मजिस्ट्रियल शक्तियों का आबंटन स्पष्ट करना होगा। हथियार-लाइसेंसिंग जैसे विषय Arms Act के अनुरूप CP के अधिकार-क्षेत्र में आएँगे। इसके बाद SOPs, इंटीग्रेटेड कंट्रोल-रूम, ट्रैफिक/क्राइम यूनिट्स का री-अलाइनमेंट और पब्लिक इंटरफ़ेस (परमिट/लाइसेंस ऑनलाइन) लागू होंगे।

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38 thoughts on “राजधानी रायपुर में लागू होगी पुलिस कमिश्नर प्रणाली मुख्यमंत्री ने की स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा

  1. naturally like your web site however you need to take a look at the spelling on several of your posts. A number of them are rife with spelling problems and I find it very bothersome to tell the truth on the other hand I will surely come again again.

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