लॉकडाउन ने तोड़ी मध्यवर्गीय परिवारों की कमर: ये वर्ग न रो सकता है न हस,इनका दर्द न जाने कोई,
भुवन वर्मा बिलासपुर 7 जुलाई 2020

चंचल अवस्थी की रपट बिलासपुर
बिलासपुर। जिस कोरोना वायरस महामारी ने आज पूरे विश्व में अपने पैर पसार लिये है । वहीं दूसरी ओर गरीबी व भूखमरी भी बढ़ती जा रही है । जिसके चलते लोग कोरोना से तो नहीं पर शायद लोग भूखमरी से जरुर मर जायेंगे । सरकार द्वारा गरीबों को मुफ्त में राशन दिया जा रहा है पर क्या सिर्फ चावल से ही गरीबों की भूख मिट

पायेगी । जिन लोगों का राशन कार्ड एक रुपये का है उनको चावल के साथ – साथ दाल चना और नमक तो मिल रहा है पर जिनका कार्ड 10 रुपये वाले हैं , उनको सिर्फ चावल ही मिल पाती है बाकी कुछ भी नहीं तो क्या इतना काफी है । सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। इस आर्थिक स्थिति से आज मध्यवर्गीय परिवार जूझ रहे हैं । देखा जाए तो सभी इस आर्थिक समास्या का सामना कर रहे हैं पर जिनके पास आय का कोई भी साधन नहीं है जो भी काम कर के वह लोग अपना तथा अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे थे वह भी इस कोरोना वायरस महामारी के चलते बंद हो गया था और अब कोई काम है ही नहीं तो इस स्थिति में मध्यवर्गीय परिवार क्या कर सकता है जो कहीं रोजी मजदूरी भी नहीं कर सकता । सामान्य वर्ग के लोगों पर सरकार का ध्यान केंद्रीत करने की आवश्यकता हैं क्योंकि इस आर्थिक समास्या से सभी वर्ग लड़ रहे हैं , सभी वर्गों के लोगों की आर्थिक स्थिति सोचनीय विषय बन गया है । सरकार को सभी वर्गों पर ध्यान देना चाहिए इस महामारी से निपटने के लिए सभी का एकजुट होकर चलना भी अति आवश्यक है ।
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