पूर्वी हवाओं के सहारे अमरावती पहुंचा टिड्डी दल मुनगा, बबूल, अमलतास और शिरीष के पेड़ों पर हमला
भुवन वर्मा, बिलासपुर 28 मई 2020
कान्हा किसली के रास्ते छत्तीसगढ़ प्रवेश की आशंका
बिलासपुर- राजस्थान में तबाही फैलाने के बाद लो कास्ट स्वर्ण प्रजाति का टिड्डी दल महाराष्ट्र में दस्तक दे दी है। पूर्वी हवाओं की मदद से यह कई दल में बट कर इस समय अमरावती के पास मोर की तालुका में विचरण कर रहा है। रबी फसलों की कटाई होने के बाद खाली मैदान बन चुके खेतों से हटकर यह टिड्डी दल हरे भरे पेड़ों पर हमला बोल चुका है। निशाने पर मुनगा, बबूल, अमलतास और शिरीष के पेड़ हैं जिनमें नई पत्तियां फैलने लगी है। कई झुंड में विभक्त होकर बढ़ता यह दल तेजी से कान्हा किसली के रास्ते कबीरधाम का रास्ता पकड़ चुका है।
पाकिस्तान से चला खतरनाक टिड्डी दल महाराष्ट्र के अमरावती जिले में पहुंच चुका है। पूर्वी हवाओं के चलने से फसलों को चट करने वाला यह टिड्डी दल पूरी तरह हवा के बहाव का रास्ता अपनाता हुआ आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में पूर्वी हवाएं चल रही है और महाराष्ट्र के अमरावती से छत्तीसगढ़ के कबीरधाम की महज 300 किलोमीटर है। ऐसे में कई दल में फैल चुके इस स्टडी दल की पहुंच कबीरधाम में कभी भी होने की आशंका है। इस जिले में खतरनाक स्थिति से बचाव के लिए जरूरी सारे जतन किए जा चुके हैं। कोशिश इस बात की है कि जवाबी हमला इतना मजबूत होगी इसका फैलाव छत्तीसगढ़ में और हो सके।

निशाने पर मुनगा बबूल और अमलतास
देश में रबी फसलों का सीजन खत्म हो चुका है। मूलता हरियाली से अपना आहार ग्रहण करने वाला यह टिड्डी दल खेतों की जगह अब हरे भरे पेड़ों को निशाना बना रहा है। इसमें मुनगा, बबूल अमलतास और शिरीष के पेड़ मुख्य हैं जिन की पत्तियों का स्वाद इन टिड्डी दल को बेहद प्रिय है। अमरावती में इस दल ने जो तबाही मचाई है इसके बाद इन चारों प्रजातियों के पेड़ों में पत्तियों की जगह अब केवल ठुंठ ही नजर आने लगी है।
कान्हा किसली के रास्ते छत्तीसगढ़
मेरी तरह हवा की गति को अपना रास्ता बनाने वाला कई दलों में विभक्त यह टिड्डी दल इस समय पूर्वी हवाओं के सहारे आगे बढ़ रहा है। अमरावती से इस हवा का रास्ता पकड़ कर मध्यप्रदेश के कान्हा किसली के रास्ते छत्तीसगढ़ प्रवेश कर सकता है। जहां यह कबीरधाम पहुंचेगा। रास्ते का आकलन कर रहे इस जिले में इस टिड्डी दल का सामना करने की पूरी तैयारी की जा रही है। प्रयास इस बात के हैं कि यह और आगे ना फैले इसलिए इनका पूरी तरह खात्मा करने की तैयारी हो चुकी है।
हवा की दिशा और छत्तीसगढ़
कृषि विभाग के अलर्ट को देखा जाए तो पूर्वी हवा होने पर यह टिड्डी दल कबीरधाम के रास्ते छत्तीसगढ़ प्रवेश कर सकता है। पश्चिमी हवा चली तो प्रवेश बेमेतरा दुर्ग और रायपुर जिला के रास्ते से हो सकता है। उत्तरी हवाएं चली तो यह दल मुंगेली और बिलासपुर से पूरे प्रदेश में फैल सकता है। दक्षिणी हवाएं चलने पर यह टिड्डी दल राजनांदगांव से छत्तीसगढ़ में फैल सकता है। इस समय प्रदेश में पूर्वी हवाएं चल रही है इसलिए संभावित प्रवेश के लिए कबीरधाम जिला सबसे संवेदनशील माना जा रहा है।
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