भुवन वर्मा, बिलासपुर 12 मई 2020

बद्रीनाथ धाम — कोरोना संकट के मद्देनजर केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद अब 15 मई को प्रात: 04:30 बजे विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट विधि विधान के साथ खोले जायेंगे। इसके कपाट 30 अप्रैल को खुलने थे लेकिन कोरोना की वजह से इसके खुलनें की तारीखें बढ़ा दी गयी थीं। मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी का कोरोना टेस्ट दो बार निगेटिव आ चुका है। वे दो हफ्ते का क्वारेंटाइन पूरा कर चुके हैं। केरल से लौटने की वजह से उन्हें क्वारेंटाइन किया गया था। इस बार बद्रीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी, नायब रावल, धर्माधिकारी, अपर धर्माधिकारी, बडवा पुजारी (डिमरी), लक्ष्मी मंदिर के पुजारी, मंदिर से जुड़े प्रमुख कर्मचारी और भोग सेवा के जुड़े लोग ही भगवान बद्रीनाथ की अखंड ज्योति के दर्शन कर सकेंगे। इस दौरान किसी भी व्हीआईपी और आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक रहेगी। कल 13 मई को रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी समेत अन्य लोग आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ जोशीमठ से पांडुकेश्वर के लिये रवाना होंगे। वहां से दूसरे दिन 14 मई को यात्रा उद्धव व कुबेर जी और शंकराचार्य की गद्दी सहित बदरीनाथ धाम पहुंँचेगी। धाम परिसर में सामाजिक दूरी का पूरी तरह से पालन किया जायेगा। प्रत्येक व्यक्ति को मास्क पहनना जरुरी होगा। वहीं बद्रीनाथ धाम के मुख्य प्रवेश द्वार, लक्ष्मी द्वार सहित विभिन्न स्थलों को सैनिटाइज किया जा चुका है। लॉकडाऊन की अवधि तक धाम में बद्रीनाथ पहुंँचे पुजारियों को बिना प्रशासन की अनुमति के बद्रीनाथ क्षेत्र से अन्यत्र जाने की अनुमति नहीं दी जायेगी। इससे पहले निर्धारित तिथि पर केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं।

भगवान विष्णु की प्रतिमा वाला यह मंदिर 3,133 मीटर की ऊंँचाई पर स्थित है जिसका निर्माण आदि शंकराचार्य ने कराया था। बद्रीनाथ धाम में भगवान के पाँच स्वरूपों की पूजा की जाती है। विष्णुजी के इन पंच स्वरूपों को ‘पंच बद्री’ कहा जाता है। बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा यहांँ पर अन्य चार अन्य स्वरूपों के मंदिर भी हैं जिनमें श्री विशाल बद्री पंच स्वरूपों में मुख्य हैं। व्यास जी ने महाभारत इसी जगह पर लिखी थी और नर-नारायण ने ही क्रमशः अगले जन्म में क्रमशः अर्जुन तथा कृष्ण के रूप में जन्म लिया था।इसके अलावा इसी स्थान पर पांडवों ने अपने पितरों का पिंडदान किया था। इसी कारण से बद्रीनाथ के ब्रह्मकपाली क्षेत्र में आज भी तीर्थयात्री अपने पितरों के आत्मा की शांति के लिये पिंडदान करते हैं।अलकनंदा नदी के किनारे स्थित बद्रीनाथ धाम हिंदू धर्म के चार धामों में शामिल है। यहांँ भगवान विष्णु 06 माह निद्रा में रहते हैं और 06 माह जागते हैं। बद्रीनाथ मंदिर को बद्रीनारायण मंदिर भी कहते हैं , यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बद्रीनाथ को समर्पित है, यहां अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा तय की गयी व्यवस्था के मुताबिक बद्रीनाथ मंदिर का मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से होता है। मंदिर हर साल अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर तक दर्शनों के लिये खुला रहता है।

अरविन्द तिवारी की रपट

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