मन की बात हमेशा सद्भावना, सेवा और कर्तव्य भावना से ही बढ़ा है आगे – प्रधानमंत्री मोदी

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मन की बात हमेशा सद्भावना, सेवा और कर्तव्य भावना से ही बढ़ा है आगे – प्रधानमंत्री मोदी

भुवन वर्मा बिलासपुर 30 अप्रैल 2023

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

नई दिल्ली – मेरे लिये “मन की बात” एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आस्था , पूजा और व्रत है। जैसे लोग ईश्वर की पूजा करने जाते हैं और प्रसाद की थाल लाते हैं , वैसे ही मेरे लिये ‘मन की बात’ ईश्वर रूपी जनता जनार्दन के चरणों में प्रसाद की थाल की तरह है। ‘मन की बात’ मेरे मन की आध्यात्मिक यात्रा बन गया है। ‘मन की बात’ स्व से समिष्टि की यात्रा है। ‘मन की बात’ अहम् से वयम् की यात्रा है। यह एक ऐसा पर्व है , जो हर महीने आता है और जिसका सभी वर्ग के लोग इंतजार करते हैं। हम इसमें सकारात्मकता और लोगों की भागीदारी का जश्न मनाते हैं। यह कोटि- कोटि भारतीयों के मन की बात है , उनकी भावनाओं का प्रकटीकरण है।

उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 100 वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुये कही। पीएम ने कहा मुझे आप सबकी हजारों चिट्ठियां मिली हैं , लाखों सन्देश मिले हैं और मैंने कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा चिट्ठियों को पढ़ पाऊं , देख पाऊं , संदेशों को जरा समझने की कोशिश करूं। ये चिठ्ठियां पढ़कर मन भावुक हो गया। मुझे मन की बात के 100 एपिसोड पूरे होने पर बधाई दी है लेकिन असल बधाई के पात्र तो इसके श्रोता ही हैं। उन्होंने कहा चरैवेति चरैवेति चरैवेति यानि चलते रहो-चलते रहो-चलते रहो की बात के साथ कहा आज हम इसी चरैवेति चरैवेति की भावना के साथ ‘मन की बात’ का 100वां एपिसोड पूरा कर रहे हैं। इसका हर एपिसोड में देशवासियों के सेवा और सामर्थ्य ने दूसरों को प्रेरणा दी है। एक तरह से ‘मन की बात’ का हर एपिसोड अगले एपिसोड के लिए जमीन तैयार करता है। ‘मन की बात’ हमेशा सद्भावना , सेवा-भावना और कर्तव्य-भावना से ही आगे बढ़ा है। आजादी के अमृतकाल में यही पॉजिटिविटी देश को आगे ले जायेगी , नई ऊंचाई पर ले जायेगी और मुझे खुशी है कि ‘मन की बात’ से जो शुरुआत हुई , वो आज देश की नई परंपरा भी बन रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ जिस विषय से जुड़ा , उसे लोगों ने जन आंदोलन बना दिया। चाहे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम हो , स्वच्छता आंदोलन हो , खादी प्रेम हो या फिर प्रकृति की बात या आजादी का अमृत महोत्सव हो, जो भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम से जुड़ा , वह जन आंदोलन बन गया। ऐसे ही हमने स्वच्छ सियाचिन , सिंगल यूज प्लास्टिक और ई-वेस्ट जैसे गंभीर विषयों पर भी लगातार बात की है। आज पूरी दुनियां पर्यावरण के जिस मुद्दे को लेकर इतना परेशान है , उसके समाधान में मन की बात के प्रयास बहुत अहम है। मेरा अटूट विश्वास है कि सामूहिक प्रयास से बड़े से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा इस साल हम जहां आजादी के अमृतकाल में आगे बढ़ रहे हैं , वहीं जी-20 की अध्यक्षता भी कर रहे हैं। यह भी एक वजह है कि एजुकेशन के साथ-साथ डाइवर्स ग्लोबल कल्चर्स को समृद्ध करने के लिये हमारा संकल्प और मजबूत हुआ है।

मन की बात कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यह कार्यक्रम देश ही नहीं दुनियां में भी काफी मशहूर हुआ। मैंने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से संयुक्त मन की बात की थी। इस दौरान अपने मार्गदर्शक लक्ष्मण राव को याद करते हुये कहा कि हमें दूसरों के अच्छे गुणों की पूजा करनी चाहिये। फिर वह चाहे वह आपका विरोधी हो , कोई साथी हो हमें उनसे अच्छे गुणों को जानने का , उनसे सीखने का प्रयास करना चाहिये। उनकी इस बात ने मुझे हमेशा प्रेरणा दी है। पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में लोगों को गुजरात से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हुये बताया कि जब मैं गुजरात के मुख्यमंत्री था तो वहां सामान्य जन से मिलना-जुलना स्वाभाविक रूप से हो ही जाता था। लेकिन 2014 में दिल्ली आने के बाद मैंने पाया कि यहां का जीवन तो बहुत अलग है। शुरूआती दिनों में कुछ अलग महसूस करता था , खाली-खाली महसूस करता था। ‘मन की बात’ ने मुझे इस चुनौती का समाधान दिया , सामान्य मानवी से जुड़ने का रास्ता दिया। पदभार और प्रोटोकॉल , व्यवस्था तक ही सीमित रहा और जनभाव , कोटि-कोटि जनों से साथ मेरे भाव , विश्व का अटूट अंग बन गया। मन की बात’ को संबोधित करते हुये पीएम मोदी ने कहा कि इसका हर एपिसोड खास रहा है , हर बार नये उदाहरण की नवीनता दिखाई दी। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से लोग जुड़े , हर आयु वर्ग के लोग जुड़े। पीएम मोदी ने कहा कि मन की बात के जरिये कितने की आंदोलन खड़े हुये। हमारे भारतीय श्वान यानि देसी डॉग्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने की शुरुआत भी मन की बात से ही शुरू हुई थी। इसके साथ ही गरीब और छोटे दुकानदारों से झगड़ा ना करने की मुहिम भी शुरू की गई थी। ऐसे हर प्रयास समाज में बदलाव का कारण बने हैं। उन्होंने कहा इस प्रोग्राम ने महिला सशक्तीकरण से जुड़ी कई कहानियां कवर की है। इनमें छत्तीसगढ़ के देउरा गांव की महिला , तेराकोटा कप बनाने वाली तमिलनाडु की आदिवासी महिला , वेल्लेर झील का कायाकल्प करने वाली महिला। मन की बात कार्यक्रम ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी कला का नायूब नमूना दिखाने वाले लोगों की कहानियों को दिखाया गया है। मन की बात कार्यक्रम ही था जिसमें खिलौने के उद्योग को पुन: स्थापित करने में मदद मिली। इसमें आत्मनिर्भर भारत और स्टार्टअप इंडिया तक को प्रोत्साहित किया गया। पीएम ने कहा आज देश में टूरिज्म बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है। हमारे ये प्राकृतिक संसाधन हों , नदियां , पहाड़ , तालाब या फिर हमारे तीर्थ स्थल हों , उन्हें साफ रखना बहुत जरूरी है। ये टूरिज्म इंडस्ट्री की बहुत मदद करेगा। पर्यटन में स्वच्छता के साथ-साथ हमने इन्क्रिडिबल इंडिया मूवमेंट की भी कई बार चर्चा की है। इस मूवमेंट से लोगों को पहली बार ऐसे कितनी ही जगहों के बारे में पता चला , जो उनके आस-पास ही थे। मैं हमेशा ही कहता हूं कि हमें विदेशों में टूरिज्म पर जाने से पहले हमारे देश के कम से कम 15 टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जरूर जाना चाहिये और यह डेस्टिनेशन जिस राज्य में आप रहते हैं , वहां के नहीं बल्कि आपके राज्य के बाहर के होने चाहिये।

मन की बात के पहले कार्यक्रम को याद करते हुये पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 का अक्टूबर महीना और विजयादशमी का पर्व था। विजयाजशमी मतलब बुराई पर अच्छाई का पर्व। वैसे ही मन की बात भी देशवासियों की अच्छाईयों का , उनकी सकारात्मकता का पर्व बन गया है। हम इसमें पॉॉजिटिविटी को सेलिब्रेट करते हैं। यही नहीं हम इसमें पीपल्स पार्टिपिशेन को भी सेलिब्रेट करते हैं। कई बार यकीन नहीं होता की मन की बात को इतने साल और इतने महीने गुजर गये। उन्होंने मन की बात की उपलब्धियों की बात करते हुये कहा कि इस कार्यक्रम से हर आयु-वर्ग के लोग जुड़ें। पीएम ने कहा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत मैंने हरियाणा से ही की थी। ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान ने मुझे बहुत प्रभावित किया और मैंने अपने एपिसोड में इसका जिक्र किया। जल्द ही यह ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान वैश्विक हो गया। इस अभियान का मकसद लोगों को जीवन में बेटी के महत्व को समझाना था। मन की बात कार्यक्रम के 100वें एपिसोड में पीएम मोदी ने देश भर में वोकल फॉर लोकल से जुड़ने वाले कई लोगों से चर्चा की। जम्मू कश्मीर के मंजूर अहमद ने बताया कि वे पेंसिल स्‍लेट बनाने का काम करते हैं। उनका ये काम अब बड़ा हो गया है , बहुत लोगों का रोजगार भी है। अभी इस रोजगार में 200 प्लस लोग काम कर रहे हैं और आगे 200 लोगों को और जोड़ने की योजना है। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने मणिपुर की विजय शांति की चर्चा की और उनसे फोन पर बातचीत की। पीएम ने बताया कि कैसे विजय शांति कमल के फूल के रेसे से कपड़े बनाती हैं और कितने कम समय में अपने छोटे से व्यापार को बड़ा बना दिया।

‘मन की बात’ कार्यक्रम में पहले भी पीएम मोदी ने विजय शांति से बात की थी और उनके काम की सराहना की थी।विजय शांति ने बताया कि उनके काम की चर्चा मन की बात कार्यक्रम में होने के बाद उन्हें काफी फायदा हुआ। कई महिलायें उनके साथ व्यापार में जुड़ गईं और काफी कम समय में उनका व्यापार बड़ा हो गया। विजय शांति ने बताया कि पीएम मोदी के वोकल फॉर लोकल की सोच से प्रभावित होकर उन्होंने यह काम शुरू किया था। पीएम मोदी ने विजय शांति को वोकल फॉर लोकल से लोकल फॉर ग्लोबल तक अपने व्यापार को पहुंचाने की चर्चा की।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का यह 100वां एपिसोड था। भाजपा ने देश की हर विधानसभा में 100 स्थानों पर इस कार्यक्रम को सुनने की व्यवस्था की थी। ‘मन की बात’ के लाइव प्रसारण के लिये देश भर में बूथ स्तर पर चार लाख सेंटर बनाये गये थे , जहां रेडियो कार्यक्रम को प्रसारित किया गया।

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