क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में अनुसंधान कार्यों की समीक्षा, किसानों की प्राथमिकताओं के अनुरूप शोध पर जोर
कृषि अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ें वैज्ञानिक, दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ाने तथा प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने पर दिया गया जोर
बिलासपुर, 23 अक्टूबर 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, सरकंडा, बिलासपुर में संचालित विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन एवं समीक्षा की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी, निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस.एस. टुटेजा तथा निदेशक प्रक्षेत्र डॉ. एन.के. रस्तोगी ने केंद्र में किए जा रहे अनुसंधान कार्यों, खरीफ फसलों पर आधारित प्रयोगों तथा उनकी उपयोगिता का जायजा लिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान को क्षेत्र की कृषि परिस्थितियों, किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं और शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित करने का आह्वान किया।
खरीफ प्रयोगों का अवलोकन एवं अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा
केंद्र पहुंचने पर तीनों अधिकारियों ने खरीफ मौसम में स्थापित विभिन्न प्रयोगों का अवलोकन किया तथा संबंधित वैज्ञानिकों से उनके उद्देश्य, कार्यप्रणाली, प्रगति और संभावित परिणामों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अनुसंधान कार्यों की उपयोगिता, स्थानीय कृषि परिस्थितियों में उनकी प्रासंगिकता तथा किसानों तक उनके लाभ पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
इसके पश्चात समीक्षा बैठक का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। बैठक में कृषि अनुसंधान को अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुखी और किसान-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
कृषि अनुसंधान का लक्ष्य किसानों की समृद्धि : डॉ. एन.के. चौरे
अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. एन.के. चौरे, अधिष्ठाता, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र में संचालित अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान का मूल उद्देश्य किसानों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजना, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना तथा कृषि को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाना है।
इस हेतु अनुसंधान, कृषि शिक्षा और विस्तार सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय कर वैज्ञानिक उपलब्धियों को खेतों तक पहुंचाने और किसानों को नवीन तकनीकों से जोड़ने के लिए संस्थागत सहयोग तथा निरंतर प्रयास किया जा रहा हैं।
प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने पर जोर : डॉ. एन.के. रस्तोगी
निदेशक प्रक्षेत्र डॉ. एन.के. रस्तोगी ने केंद्र में किए जा रहे अनुसंधान कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने वैज्ञानिकों को प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कृषि प्रणालियों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अनुसंधान परिणामों को व्यावहारिक कृषि परिस्थितियों में परखने तथा ऐसी तकनीकों के विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई, जिन्हें किसान आसानी से अपना सकें और जिनसे उन्हें दीर्घकालिक लाभ प्राप्त हो।
अनुसंधान एवं विस्तार सेवाओं में समन्वय आवश्यक : डॉ. एस.एस. टुटेजा
निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस.एस. टुटेजा ने क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर द्वारा जिले के किसानों के हित में किए जा रहे संयुक्त प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान की सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब विकसित तकनीकें किसानों तक पहुंचें और उनके खेतों में प्रभावी परिणाम दें।
उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्र तथा विस्तार तंत्र के बीच समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसानों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी मार्गदर्शन मिल सके और वैज्ञानिक नवाचारों का लाभ व्यापक स्तर पर प्राप्त हो सके।
किसानों की प्राथमिकताओं पर आधारित हों अनुसंधान कार्य : डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी
निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुसंधान कार्यों का चयन क्षेत्र के किसानों की प्राथमिकताओं, स्थानीय कृषि समस्याओं तथा उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि प्रत्येक अनुसंधान कार्य स्पष्ट उद्देश्य, सुनियोजित कार्ययोजना और निर्धारित लक्ष्यों के साथ संचालित किया जाए, ताकि उसके परिणामों का आकलन किया जा सके और किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
उन्होंने जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना कृषि विविधीकरण, किसानों की आय में वृद्धि तथा क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त तकनीकों, बेहतर उत्पादन पद्धतियों और प्रभावी प्रसार गतिविधियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि वैज्ञानिकों को अनुसंधान की पूरी योजना बनाकर कार्य करना चाहिए, जिससे प्रत्येक प्रयोग का उद्देश्य स्पष्ट हो, उसके परिणाम उपयोगी हों और उनकी जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अनुसंधान की उपलब्धियां केवल प्रयोगों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव खेतों में दिखाई दे। उन्होंने वैज्ञानिकों से अपेक्षा की कि वे शासन की प्राथमिकताओं और किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान करते हुए कृषि विकास में सार्थक योगदान दें।
डॉ. एस.के. वर्मा ने व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम के अंत में क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस.के. वर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने केंद्र की अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा करने, वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करने तथा अनुसंधान को किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक उपयोगी बनाने के लिए दिए गए सुझावों हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्राप्त मार्गदर्शन से केंद्र के अनुसंधान कार्यों को नई दिशा मिलेगी और जिले के कृषकों को लाभान्वित करने के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. एस.एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, लोरमी-मुंगेली; डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर सहित कृषि महाविद्यालय, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर के प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
समग्र रूप से, समीक्षा कार्यक्रम ने कृषि अनुसंधान को किसान-केंद्रित, योजनाबद्ध और परिणामोन्मुखी बनाने, प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने तथा दलहन एवं तिलहन फसलों के विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ की कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में कार्य करने का संदेश दिया।
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