मिट्टी की सेहत सँवारने गांव-गांव पहुंचेगा ‘खेत बचाओ अभियान’

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22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक जिले के 100 ग्राम पंचायत भवनों में होंगे कार्यक्रम

संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को किया जाएगा जागरूक

बिलासपुर, 21 अक्टूबर 2026/ खेत की मिट्टी स्वस्थ रहे, पानी की हर बूंद सहेजी जाए और फसल कटने के बाद भी जमीन का बेहतर उपयोग हो—इन्हीं उद्देश्यों के साथ जिले में 22 अक्टूबर से ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू होगा। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह अभियान 30 नवंबर तक चलेगा। अभियान के तहत किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा।

जिले के चारों विकासखंड बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा में अभियान के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक विकासखंड के 25 ग्राम पंचायत भवनों में आयोजन होगा। इस प्रकार जिले में कुल 100 ग्राम पंचायत भवनों में किसानों तक खेती की उपयोगी जानकारी पहुंचाई जाएगी। प्रत्येक कार्यक्रम में लगभग 50 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।

उप संचालक कृषि ने वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और किसानों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों, महिला कृषक स्व-सहायता समूहों, कृषि उत्पादक संगठनों, कृषि सखियों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को भी जोड़ा जाएगा।

अभियान का प्रमुख संदेश होगा—मिट्टी की जरूरत समझें और उसी के अनुरूप खाद का उपयोग करें। किसानों को मृदा परीक्षण का महत्व बताते हुए उर्वरकों एवं अन्य कृषि आदानों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग की जानकारी दी जाएगी। जल संरक्षण एवं संचयन के साथ भूमि की उर्वरता बनाए रखने वाली टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों के समुचित उपयोग पर भी विशेष जोर रहेगा। तिलहन, दलहन एवं बागवानी मिशन के माध्यम से किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा। फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी देते हुए उनके बेहतर प्रबंधन के उपाय बताए जाएंगे।

अभियान के दौरान किसानों को जैविक एवं जीवांश उत्पादों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण और खेतों में प्रदर्शन के माध्यम से प्राकृतिक खेती की जानकारी पहुंचाई जाएगी, ताकि किसान अपनी जमीन की सेहत सँवारते हुए उसकी उत्पादकता लंबे समय तक बनाए रख सकें।

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