“गायत्री शक्तिपीठ विनोबा नगर: दलदल भूमि से सिद्ध क्षेत्र बनने की प्रेरक गाथा” – डॉ. विनय पाठक

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“गायत्री परिवार ऐसी पहली संस्था है, जिसमें ‘परिवार’ शब्द जुड़ा है”

साहित्यकार रामकुमार श्रीवास द्वारा रचित ‘गायत्री शक्तिपीठ बिलासपुर: एक सिद्ध क्षेत्र’ पुस्तक का हुआ विमोचन अनेक वरिष्ठ साहित्यकार, कवि, संगीतकार, गीतकार एवं सामाजिक जन रहे उपस्थित

बिलासपुर:परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी (2026) के अवसर पर व्याख्याता एवं साहित्यकार श्री रामकुमार श्रीवास द्वारा लिखित पाँचवीं पुस्तक ‘गायत्री शक्तिपीठ बिलासपुर: एक सिद्ध क्षेत्र’ का भव्य विमोचन संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. विनय पाठक ने कहा— “मैं सर्वप्रथम रामकुमार श्रीवास जी को इस पुस्तक की रचना के लिए बधाई देता हूँ। मथुरा और हरिद्वार से लेकर देश-दुनिया भर के लोग इसे पढ़कर बिलासपुर के इस शक्तिपीठ के विषय में प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करेंगे। यह पुस्तक छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गायत्री शक्तिपीठ को व्यापक पहचान दिलाने में महती भूमिका निभाएगी।”उन्होंने आगे बताया कि इस शक्तिपीठ में पूज्य गुरुदेव ग्यारह बार पधारे थे। इस भूमि की रजिस्ट्री ट्रस्ट के नाम पर जूना बिलासपुर निवासी श्री मदन लाल सोनी जी के यहाँ सत्यनारायण कथा के दौरान प्राप्त दान राशि से कराई गई थी। निश्चित ही यह भूमि एक सिद्ध क्षेत्र है, जिसका भूमि-पूजन स्वयं आचार्य श्रीराम शर्मा जी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ था
कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ प्रज्ञा गीतों के साथ हुआ, जिसमें श्री उधोराम प्रजापति, मनोहर दास मानिकपुरी एवं गणेश श्रीवास ने संगीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक भाव से ओत-प्रोत कर दिया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (कुलपति, गोपालगंज विश्वविद्यालय), अध्यक्षता कर रहे श्री बृजेश साहू (ट्रस्टी, समाजसेवी, प्रसिद्ध बिल्डर एवं वरिष्ठ साहित्यकार), राष्ट्रकवि बृजेश सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ. राघवेंद्र दुबे (अध्यक्ष, प्रयास प्रकाशन), श्रीमती नंदिनी पाटनवार (जिला समन्वयक), श्री विष्णुकुमार तिवारी जी, मानस मर्मज्ञ श्री रमेश चंद्र श्रीवास्तव जी (पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी), गणेश श्रीवास जी (वरिष्ठ पदाधिकारी, गायत्री शक्तिपीठ), सालिक राम भारद्वाज (पूर्व शिक्षक, मार्गदर्शक श्रीवास समाज) तथा सुरेश श्रीवास (संभागीय अध्यक्ष, श्रीवास समाज) उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में इस पुस्तक को समाज उत्थान में मील का पत्थर सिद्ध होने की शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम के दौरान सभी मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों तथा उपस्थित गणमान्य जनों को दुपट्टा एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।

लेखक श्री रामकुमार श्रीवास ने अपनी अभिव्यक्ति में पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पुस्तक गायत्री परिवार सहित सभी पाठकों को शक्तिपीठ की पुरातन और प्रामाणिक जानकारियों से अवगत कराएगी।

इस अवसर पर सर्वश्री एस.के. शर्मा (सरकंडा ट्रस्टी), द्वारिका पटेल (वरिष्ठ कार्यकर्ता), रामगोपाल कश्यप (कोषाध्यक्ष), दाताराम, वेदराम सिन्हा (ट्रस्टी), नारायण पाली (युग पुरोहित), भुवनेश्वर श्रीवास (समन्वयक, बिल्हा), रामनिहोरा राजपूत (गौ रक्षक, गीतकार), फूल सिंह (प्रसिद्ध गायक), जनकराम साहू (प्रसिद्ध संगीतकार, रामचरित मानस मंडली), रंजीत गढ़ेवाल, नीलम पांडेय, प्रेमलता अग्रवाल, डॉ. एस.एन. अग्रवाल, अरुण कुमार पोद्दार (वरिष्ठ समाजसेवी), डॉ. हेमंत कौशिक (वरिष्ठ पदाधिकारी), श्रीमती सावित्री धीवर, नलिनी कश्यप, जागेश्वरी साहू (संयोजिका, भा.सं.ज्ञान परीक्षा), अमिता क्षत्री, प्रज्ञा, पुरुषोत्तम, देवलाल, बालगोविन्द अग्रवाल (वरिष्ठ समाजसेवी), सुनैना, सुनीता, सुशीला, विनोद, पद्मलोचन श्रीवास (प्राचार्य), शत्रुघ्न जैसवानी (वरिष्ठ साहित्यकार), बुधराम यादव (वरिष्ठ कवि), रामकुमार साहू (दिया ग्रुप), बी.पी. श्रीवास, वेद प्रकाश थवाईत, श्रीमती दत्ता मैडम (प्राचार्या) एवं रूमी दुबे (प्राचार्या, देव संस्कृति विद्यालय) सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिजन एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल मंच संचालन शीतल प्रसाद पाटनवार द्वारा किया गया।

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