चक्रवात ‘अर्नब’ का छत्तीसगढ़ में कहर: बस्तर में बाढ़ के हालात, कई जिलों में स्कूल बंद
रायपुर।बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात ‘अर्नब’ के ओडिशा और आंध्र प्रदेश तट से टकराने के बाद, छत्तीसगढ़ में पिछले 48 घंटों से लगातार भारी बारिश हो रही है। महानदी और इंद्रावती उफान पर हैं और मौसम विभाग ने राज्य के 20 से अधिक जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।
मुख्य प्रशासनिक कदम:
गरियाबंद, कांकेर, कोंडागांव और धमतरी में स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है और चल रही त्रैमासिक परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं।
आपदा प्रबंधन और बचाव टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
विभिन्न जिलों की स्थिति:
जगदलपुर (बस्तर): इंद्रावती की सहायक नदियां उफान पर हैं। अमगुड़ा की निचली बस्तियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। गोरियाबहार नाला भरने से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। वन विभाग के कार्यालय में भी पानी भर गया है, जिससे कई सरकारी रिकॉर्ड भीग गए हैं।
कांकेर: दूध नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। आमाबेड़ा और कुरना समेत कई अंदरूनी इलाकों में जलभराव है। प्रशासन मस्जिदों से अनाउंसमेंट कर लोगों को सतर्क कर रहा है।
कोंडागांव: पिछले तीन दिनों की बारिश से पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बह रहा है, जिससे कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। बचाव टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।
सुकमा: जिले में बाढ़ जैसे हालात हैं। कोंटा, डोंडरा और छिंदगढ़ क्षेत्र (ओलेर, नेतानार आदि) की निचली बस्तियों को खाली कराया जा रहा है। नेशनल हाईवे (दोरनापाल-कोंटा और सुकमा) पर पानी भरने से जाम की स्थिति बन गई है।
बांधों का बढ़ा जलस्तर और महानदी पर अलर्ट:
धमतरी: जिले के जलाशय लबालब हो चुके हैं।
गंगरेल बांध: 98.14% भर चुका है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए इसके 10 गेट खोलकर 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
अन्य जलाशयों में मुरुमसिल्ली (100%), दुधावा (97.21%) और सोढ़ुर (88.18%) भी भर चुके हैं, जहां से लगातार नदियों में पानी छोड़ा जा रहा है।
गरियाबंद: सिकासार बांध 87% भरने के कारण वहां से 15,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। देवभोग और अमलीपदर में तेल नदी समेत सभी बरसाती नाले उफान पर हैं और हजारों एकड़ खेत डूब गए हैं।
महानदी: बांधों से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने महानदी के किनारे बसे सभी गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है और निचले क्षेत्रों (जैसे राजिम, नवापारा) में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
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