श्री पीतांबरा पीठ बिलासपुर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ, महायज्ञ के प्रथम दिन 16800 दीगई आहुतियां
प्रथम दिन माँ काली रूप में हुई बगलामुखी देवी की पूजा की जाएगी
सरकंडा ।स्थित सुभाष चौक के पास श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महापर्व भव्यता के साथ प्रारंभ होगा। पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सानिध्य में प्रथम दिवस पर माँ ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का प्रथम महाविद्या माँ काली के स्वरूप में विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। साथ ही महायज्ञ के प्रथम दिन अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना, अखंड ज्योति प्रज्वलन, ध्वजारोपण एवं ज्वारोपण की वैदिक विधियां संपन्न हुईं।
शक्ति की आराधना पर पीठाधीश्वर जी का दिव्य संदेश
गुप्त नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने कहा: -“सनातन संस्कृति में ‘शक्ति’ के बिना ‘शिव’ भी अपूर्ण हैं। जीवन में जब बाहरी परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों और आंतरिक बल क्षीण होने लगे, तब आदिशक्ति की शरण ही एकमात्र मार्ग है। गुप्त नवरात्रि बाहरी प्रदर्शन की नहीं, बल्कि अंतर्मुखी होकर अपनी सोई हुई आत्म-शक्ति को जगाने का महापर्व है। जब साधक पूर्ण गोपनीयता और सात्विकता के साथ आदिशक्ति की आराधना करता है, तो ब्रह्मांड की प्रचंड दैवीय ऊर्जा उसके भीतर प्रवाहित होने लगती है, जिससे बड़े से बड़ा संकट भी तिनके की तरह उड़ जाता है।”
प्रथम दिन माँ काली साधना के अद्भुत लाभ
महाराज जी के अनुसार प्रथम महाविद्या माँ काली की साधना से निम्न लाभ प्राप्त होते हैं:
1. शत्रु व बाधा नाश: जीवन के सभी दृश्य-अदृश्य शत्रुओं का शमन होता है और हर कार्य की बाधा दूर होती है।
2. भय व अकाल मृत्यु से सुरक्षा:’काल’ की स्वामिनी होने के कारण माँ काली साधक को अकाल मृत्यु के भय और आकस्मिक संकटों से बचाती हैं।
3. नकारात्मकता का अंत: जीवन से तंत्र-बाधा, बुरी नजर, मानसिक तनाव और अवसाद का नाश होता है।
4. प्रचंड आत्मविश्वास:साधक के भीतर की हीनभावना समाप्त होती है और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का साहस मिलता है।
16,800 आहुतियों के साथ महायज्ञ प्रारंभ
पीतांबरा पीठ में हवनात्मक महायज्ञ के प्रथम दिन 16,800 आहुतियां प्रदान की गईं। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पीठ ने सभी श्रद्धालुओं से इस ऐतिहासिक महायज्ञ में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का सादर आग्रह किया है।
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