कुपोषण दूर करेगा छत्तीसगढ़ का “फुटू” अखिल भारतीय मशरूम अनुसंधान परियोजना के तहत् बीज तैयार करने रिसर्च चालू
भुवन वर्मा बिलासपुर 23 जुलाई 2020

रायपुर- प्रदेश में मिलने वाली मशरूम की 35 प्रजातियों में से कुछ प्रजातियों में औषधीय गुणों का खुलासा हुआ है। इस पर अनुसंधान का काम चालू हो चुका है। यह अनुसंधान अखिल भारतीय मशरूम अनुसंधान परियोजना के तहत किया जा रहा है। उम्मीद है कि रिसर्च के परिणाम जल्द मिल जाएंगे।
सीजन है मशरूम का, जिसे अपने प्रदेश में फुटू, बोडा ,पिहरी जैसे नाम से जाना जाता है। यह प्रदेश की परंपरागत प्रजातियां है जो केवल बारिश के मौसम में ही तैयार होती हैं तो कुछ उगते हैं दीमक की बांबियों, पैरा, साल के पेड़ों और बांस के ढेर में। इसके अलावा व्यवसायिक उत्पादन भी होता है। इसमें कुछ ऐसी प्रजातियां है जिनमें औषधीय गुणों के होने की जानकारी सामने आई है। ऐसी बीमारी जो शरीर को कमजोर होती प्रतिरोधक क्षमता के रूप में सामने आती है या फिर पोषक आहार की कमी से होने वाली बीमारी के रूप में परेशान करती है जैसी कई अन्य बीमारियों को या तो खत्म करती है या फिर नियंत्रित करती है मशरूम का सेवन। लिहाजा प्रदेश में मिलने वाली मशरूम की 35 प्रजातियों में से कुछ औषधीय गुणों से युक्त मशरूम पर रिसर्च चालू हो चुका है।

दुनिया, देश और प्रदेश में
अखिल भारतीय मशरूम अनुसंधान परियोजना द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में मशरूम की 42 हजार प्रजातियां है। इसमें भारत में 800 प्रजातियों के होने की पहचान की जा चुकी है। प्रदेश की स्थिति में मशरूम की 30 से 35 ऐसी प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है जिन्हें सेवन के योग्य माना गया है। कृत्रिम रूप से भी ली जाने वाली मशरूम की ऐसी 4 प्रजातियों की व्यवसायिक खेती की जा रही है जिन्हें स्वीकार्यता सबसे ज्यादा मिल चुकी है।
प्रारंभिक जांच में मिले यह परिणाम
अखिल भारतीय मशरूम अनुसंधान परियोजना के तहत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में किए जा रहे रिसर्च में आश्चर्यजनक परिणाम मिले हैं। जिसके बाद अब इन पर व्यापक रिसर्च चालू किया जा चुका है। जो परिणाम मिले हैं उसके पश्चात प्रदेश में मिलने वाली 30 से 35 प्रजातियों में से कुछ प्रजातियों में कमर दर्द, हड्डी की बीमारी या कैल्शियम की कमी ,अर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या दूर करने की क्षमता होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा इन में पोषक तत्व भी भरपूर है और विटामिन डी भी होते हैं।
इसलिए सेवन की सलाह
प्राकृतिक तौर पर जंगलों में मिलने वाली मशरूम में भरपूर प्रोटीन होते हैं। विटामिन और मिनरल्स से भरपूर मशरूम में अधिक मात्रा में फाइबर भी होते हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कब्ज, मोटापा और कुपोषण को दूर करने के लिए भी इसे लाभदायक माना गया है। इसके अलावा एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा होने से सर्दी खांसी को दूर रखता है। सेलेनियम, इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है। इतने सारे औषधीय गुणों के होने की वजह से यह विटामिन की कमी दूर करता है। और रोग निवारण की क्षमता को भी बढ़ाता है।
प्राकृतिक मशरूम के लिए हो रही रिसर्च
प्रदेश में मिलने वाली मशरूम की कुल प्रजातियों में से 30 से 35 प्रजातियों को खाने के योग्य माना गया है। कुछ प्रजातियों में औषधीय गुणों की जानकारी सामने आने के बाद इनके प्राकृतिक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बीज तैयार करने का काम अखिल भारतीय मशरूम अनुसंधान परियोजना के तहत चालू किया जा चुका है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि रिसर्च के बाद तैयार बीज से पूरे साल खेती की जा कर इसकी उपलब्धता हर समय सुनिश्चित करवाना। यह इसलिए क्योंकि अब इसकी खरीदी और बिक्री डिब्बाबंद पैक में भी की जा रही है।
” प्रदेश में मिलने वाली मशरूम की प्रजातियों में से 30 से 35 प्रजातियां खाने के योग्य हैं। इनमें से कुछ में औषधीय गुणों की जानकारी सामने आने के बाद अनुसंधान का काम किया जा रहा है। अलग-अलग प्रजातियों के बीज तैयार करने में सफलता के बाद इसके बीज व्यावसायिक उत्पादन के लिए उपलब्ध होंगे ” – डॉक्टर सी एस शुक्ला, प्रोफेसर, प्लांट पैथोलॉजी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर।
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