दशकों बाद मिले दोस्त – छलक पड़े जज्बात:आप सभी का दोस्त होना ही मेरी शान है – खगेश्वर चौबे

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अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

रायपुर – शासकीय तकनीकी विद्यालय रायगढ के वर्ष 1984 बैच के सहपाठियों का बयालीस वर्षों बाद दो दिवसीय आयोजित भव्य पुनर्मिलन समारोह नया रायपुर स्थित मेफेयर गोल्फ रिसॉर्ट नया रायपुर में अत्यंत आत्मीय , ऐतिहासिक और अविस्मरणीय माहौल में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक औपचारिक मिलन नहीं , बल्कि चार दशक पुरानी दोस्ती , अपनत्व और भाईचारे के पुनर्जागरण का भावपूर्ण उत्सव बन गया। रिज़ॉर्ट के मनोरम वातावरण , नीले स्विमिंग पुल के किनारे गूंजती हंसी , झील में शांत बोटिंग , क्रिकेट के मैदान में पुरानी फुर्ती , हल्की-फुल्की नोकझोंक , कैमरे में कैद होती मुस्कुराहटें और रात की दूधिया रोशनी में नहाया नया विधानसभा भवन—इन सबने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। बयालीस वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद जब सहपाठी एक-दूसरे से मिले , तो ऐसा लगा मानो समय अचानक पीछे लौट गया हो। चेहरों पर उम्र की रेखायें अवश्य थीं लेकिन दिलों में वही बचपन , वही शरारत , वही स्नेह और वही अटूट मित्रता आज भी जीवंत दिखाई दी। किसी ने गले लगाकर पुरानी यादें ताजा की , किसी ने दशकों पुराने किस्सों को ठहाकों में दोहराया , तो किसी की आंखों में आज भी वही चमक दिखाई दी जो केवल सच्चे मित्रों के मिलन पर ही झलकती है। समारोह के दौरान स्वादिष्ट भोजन के साथ पुराने दिनों की शरारतों , शिक्षकों की यादों और स्कूल जीवन के रोचक प्रसंगों ने माहौल को और अधिक आत्मीय बना दिया। उपस्थित साथियों ने एक स्वर में कहा कि बयालीस साल के अंतराल एक पल में सिमट गया और ऐसा लगा कि हम आज भी वहीं हैं , बस कैलेंडर बदल गया है।

आठ रायपुरवासी मेजबानों की भूमिका रही सराहनीय

इस भव्य एवं ऐतिहासिक पुनर्मिलन को सफल और यादगार बनाने में रायपुरवासी आठों मेजबान मित्रों की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। इनमें विशेष रूप से प्रिय जितेंद्र भाई सीनियर आईएएस मार्कफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं जलग्रहण मिशन संचालक द्वारा मित्रता के प्रति आत्मीयपूर्ण समर्पण , डॉ. अश्वनी भाई का कुशल संचालन , नलिन भाई (अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सतर्कता) का आत्मीय अपनत्व , विनोद भाई (आर्किटेक्ट इंजीनियर) का अनवरत उत्साह , मोहन भाई (मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी) की सक्रिय भूमिका , महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा सम्मानित भू-वैज्ञानिक , जीएसआई नागपुर के उप महानिदेशक दिनेश भाई का मित्रों के प्रति अगाध प्रेम , नरेंद्र भाई ( सीएसएम रेल्वे रायपुर) की आत्मीयता एवं उदारता तथा अरुण भाई (रेल्वे) का उत्साहपूर्ण योगदान ने कार्यक्रम को शानदार , ऐतिहासिक और भव्य बनाया।

विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे सहपाठियों ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा

इस पुनर्मिलन में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न स्थानों से पहुंचे सहपाठियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक जीवंत बना दिया। उपस्थित प्रमुख साथियों में अमिताभ (प्रोफेसर) , डॉ. रमेश मिश्रा (प्रोफेसर) , संजय अग्रवाल (एसडीओ) , अशोक (प्रधानाध्यापक) , संजय तिवारी (रेल्वे बिलासपुर) , सुनील अग्रवाल , सतीश पांडेय (प्राचार्य) , यज्ञेश (एसईसीएल कोरबा) , प्रताप (व्याख्याता) , श्रीकांत (मूवी डायरेक्टर) , मदन राजवाड़े (केमिस्ट) , राजीव (व्याख्याता) , छोटेलाल चंद्रा (फारेस्टर) , आशुतोष चंद्रा , रविंद्र शुक्ला , सपन गोयल इत्यादि की उत्साहपूर्ण तथा प्रेमशंकर पटेल की विशिष्ट गरिमामयी उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान नव आगंतुक भूपेंद्र पटेल एवं वाचस्पति गुप्ता भी विशेष आकर्षण के केंद्र बने रहे। सिर्फ रियूनियन नहीं , दिलों का पुनर्मिलन कार्यक्रम में उपस्थित साथियों ने कहा कि यह केवल एक रियूनियन नहीं था , बल्कि दिलों का पुनर्मिलन , समय को मात देती दोस्ती का उत्सव और उन रिश्तों की जीत थी जो वर्षों की दूरी के बावजूद कभी फीके नहीं पड़ते। सहपाठी संजय अग्रवाल के शब्दों में – वक्त बदलता है , पर यारियां हमेशा जवान रहती हैं। समारोह के अंत में सभी साथियों ने रायपुर के मेजबान मित्रों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि यह पुनर्मिलन जीवन की उन अनमोल स्मृतियों में शामिल हो गया है , जिन्हें केवल याद नहीं किया जायेगा , बल्कि बार-बार जिया जायेगा। इस दौरान खगेश्वर प्रसाद चौबे ने इस पलों में भावुक होकर कहा – लोग कहते हैं ज़मीन पर किसी को ख़ुदा नही मिलता , शायद उन्हें दोस्त कोई तुम सा नही मिलता।। उन्होंने कहा कि कई सहपाठी आज उच्च पदों पर आसीन होने के बावजूद अपने पुराने मित्रों से विद्यार्थी जीवन जैसे प्रेम और सादगी से मिले। आज सभी ने यह सिद्ध कर दिया कि पद और प्रतिष्ठा बदल सकती है , लेकिन सच्ची दोस्ती कभी नहीं बदलती। हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि यह मिलन केवल एक दिन की स्मृति बनकर ना रह जाये ,बल्कि आगे भी हम सभी समय-समय पर एक-दूसरे से जुड़े रहें , एक-दूसरे की खुशियों और संघर्षों में साथ रहें तथा इस मित्रता के बंधन को और अधिक मजबूत बनायें। अंत में उन्होंने अपने शायराना अंदाज में अपनी वाणी को विराम देते हुये कहा –
ना कुर्सियों का गुरूर है , ना ओहदों का अभिमान ,
हर दोस्त के दिल में बसा है , वही बचपन का सम्मान।
जो गले मिलकर कह उठे – यार , तू आज भी वैसा ही है ,
बस वही पल बन गया इस मिलन की असली पहचान।।
आप सभी की मुस्कुराहट ही मेरी पहचान है ,
आप सभी की खुशी ही मेरी जान है।
कुछ भी नहीं मेरी जिंदगी में , बस इतना समझ लें ,
आप सभी का दोस्त होना ही मेरी शान है , मेरी शान है।।

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