मां सतबहनियां दाई मंदिर कुदुदण्ड चांदनी चौक में चैत नवरात्रि पर्व हुआ धूमधाम से
धूमधाम से ज्वारा विसर्जन महामाया तलाब सकरी में किया गया
बिलासपुर। मां सतबहनियां महिला सेवा समिति कुदुदण्ड के महिलाओं द्वारा चैत नवरात्रि पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया| नवरात्रि पर्व आरंभ 19 मार्च को मंदिर में विराजमान जगत जननी दुर्गा मां की और मां सतबहनियां दाई की श्रृंगार कर पूजा अर्चना कर नवरात्रि पर्व आरंभ किये| पहला दिन विधिपूर्वक पूजन कर मां दुर्गा और सतबहनियां दाई की श्रृंगार कर सभी समिति के सदस्यों ने किये| मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश पं. बद्री प्रसाद मिश्रा द्वारा प्रज्वलित करवा गया और फिर ज्वारा बोवाई सभी सदस्यों के करवा गया| प्रतिदिन मंदिर में सुबह शाम विधि विधान से पूजा पाठ पंडित बद्री प्रसाद मिश्रा जी द्वारा करवाया गया| महिला समिति द्वारा भजन कीर्तन और जसगीत का आयोजन रोज मां के दरबार में किया जाता रहा| पंचमी, सप्तमी पर्व विशेष रहा जिसमें लोग मां के दरबार में दूर दूर से दर्शन करने पहुंचे| पूरा मोहल्ला भक्ति मय वातावरण में डूबा रहा।
दुर्गा अष्टमी पर्व पर शाम 5 बजे हवन कार्यक्रम में सभी समिति और मोहल्ले वाले भाग लिए| समिति के महिलाओं ने सुबह से ही तैयारी में लगे रहे| मां सतबहनियां दाई और मंदिर प्रांगण में विराजमान जगत जननी मां दुर्गा जी का श्रृंगार किया गया| उसके बाद विधि-विधान से पूजा-पाठ किया गया| मां को अठवाई और 56 भोग लगाया गया| पूजा अर्चना के कर हवन का कार्य किया गया| नवमीं के दिन मंदिर प्रांगण में कन्या भोज का आयोजन किया गया था, जिसमें मां दुर्गा रूप में छोटे छोटे बच्चों ने भाग लिए| सभी बच्चों को समिति के तरफ से और अपने तरफ कुछ गिफ्ट और नगद राशि दे दुर्गा स्वरूप बच्चों से आर्शीवाद लिए| सभी सदस्यों ने भोग प्रसाद का आनंद लिए| उसके बाद शाम को मंदिर में ज्वारा विसर्जन का कार्यक्रम किया| मंदिर प्रांगण में पूजा-अर्चना कर ज्वारा विसर्जन समिति और मोहल्ले वालों के सहयोग से धूमधाम से ज्वारा निकाला गया| मंदिर से निकलकर कुदुदण्ड चांदनी चौक, शिव मंदिर होते हुए सेफर स्कूल तक सभी लोग जयकारा लगाते हुए ले गए| सभी लोग बहुत उत्साहित नजर आये| पूरा कुदुदण्ड भक्ति मय वातावरण में डूब गया था |
पं बद्री प्रसाद मिश्रा जी द्वारा सुबह-शाम विधि विधान से पूजा पाठ किया गया| पंडित जी द्वारा प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ मंदिर प्रांगण में किया गया| हमारे पंडा जी भोगी राम यादव और राधे मरावी थे| मंदिर में प्रज्ज्वलित मनोकामनाएं ज्योति कलश का देख रेख किया है| माईक संचालक ईश्वर सोनी थे | रोज मोहल्ले और आसपास के लोग दर्शन करने के लिए पहुंच रहे थे| प्रति दिन सभी सदस्यों के द्वारा भोग प्रसाद लगाया जा रहा था| सभी मोहल्ले वाले कन्या भोज के लिए सहयोग भी किया| पूरे मोहल्ले में भक्ति मय वातावरण था| दोपहर में महिला द्वारा भजन-कीर्तन किया जा था | रात में प्रति दिन जस गीत का आयोजन किया गया था दूर दूर से जस गीत मंडली मां के दरबार में सेवा करने पहुंच रहे थे|
इस आयोजन में महिला समिति और मोहल्ले के लोगों बढ़ चढ़ हिस्सा लिया|
समिति के सदस्यों में जमुना सोनी, सुशीला सोनी, सरिता वासिंग, सहोदया सोनी, किशोरी वासिंग, सुभ्रा वासिंग, श्यामा उपाध्याय, इंद्राणी गहलोत, आशा दुबे, रिता वासिंग, गंगोत्री निर्मलकर, माधवी मानिकपुरी, काजल कश्यप, शिवानी कश्यप, सुषमा मराठा, सीमा चौहान, रमा तिवारी, राजकुमारी कश्यप, अन्नपूर्णा कश्यप, सीता कश्यप, शिव कुमारी पाठक, रानी सोनी, सुनीता सोनी, सुनीता वासिंग, सीता कश्यप, रूखमणी तिवारी, सरला मानिकपुरी , सहुरमती यादव, सुनीता वासिंग, सीमा चंद्रवंशी, लता चंद्रा के सखी सहेली ग्रुप के सदस्यों एवं मोहल्ले के लोग विसर्जन में भाग लिए| पवन सोनी, ईश्वर सोनी, भोगीराम यादव , बद्री प्रसाद मिश्रा, सुरित राम कश्यप, राधे मरावी, बाबा सोनी एवं समस्त मोहल्ले वाले की उपस्थिति में ज्वारा विसर्जन महामाया तलाब सकरी में विधि विधान से किया गया |
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