उद्यानिकी में महिलाओं की भागीदारी एवं रोजगार के अवसर
जशपुर।महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के अंतर्गत संचालित उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सिलफिली के द्वारा “उद्यानिकी में महिलाओं की भागीदारी एवं रोजगार के अवसर” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सरगुजा एवं सूरजपुर क्षेत्र की कुल 24 महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उद्यानिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना तथा उन्हें स्वरोजगार एवं आयवृद्धि के अवसरों से जोड़ना है।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रविन्द्र तिग्गा द्वारा नवीन शाक-सब्जी, फल, फूल एवं कंदीय वर्ग की फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए उत्पादन वृद्धि एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त करने हेतु अधिक से अधिक जैविक पदार्थों के उपयोग पर विशेष बल दिया गया। फलदार पौधों में वैज्ञानिक विधि से कटाई-छंटाई (प्रूनिंग) एवं उचित जल प्रबंधन की तकनीकों की जानकारी दी गई। महिलाओं को फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे वर्ष भर रोजगार एवं आय के अवसर सुनिश्चित हो सकें। संतुलित पोषण को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों को अपनी बाड़ी में किचन गार्डन विकसित करने की सलाह दी गई। हरी पत्तेदार सब्जियों एवं वर्ष भर उपलब्ध होने वाले फलदार पौधों के उत्पादन के माध्यम से घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ अधिशेष उत्पादन को बाजार में विक्रय कर निरंतर आय प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया गया। साथ ही महाविद्यालय के डॉ. शुभी सिंह के द्वारा महाविद्यालय से प्रकाशित कैलेंडर “प्रकृति की पाठशाला” के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रतिभागी महिलाएं QR कोड स्कैन कर प्रत्येक माह विभिन्न फल, फूल, सब्जी, मसालों एवं शासकीय योजनाओं की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकती हैं। यह पहल डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया एवं भविष्य में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा के साथ हुआ।
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