वन अग्नि रोकथाम पर जनजागरूकता, संरक्षण की शपथ के साथ अभियान आयोजित
रायपुर, 19 फरवरी 2026/छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अंतर्गत बारनवापारा परियोजना मंडल की रायकेरा रेंज द्वारा ग्राम सुकुलबाय में वन अग्नि सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शासकीय विद्यालय परिसर एवं ग्राम में आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को जंगल में आग लगने के कारणों, उससे होने वाले नुकसान और बचाव के उपायों की सरल भाषा में जानकारी दी गई। विशेष रूप से महुआ बीनने के दौरान आग लगाने की परंपरा से होने वाले दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला गया और ग्रामीणों से इस आदत को छोड़ने की अपील की गई।
निगम के अधिकारियों ने बताया कि फायर सीजन सामान्यतः फरवरी से जून तक रहता है। इस अवधि में तापमान अधिक होने और जंगल में सूखी पत्तियों की मात्रा बढ़ने के कारण आग लगने की संभावना अधिक रहती है।
जंगल में आग लगने से होने वाले प्रमुख नुकसान
बहुमूल्य वन संपदा, पौधों और वृक्षों का नष्ट होना। वन्यजीवों के आवास को नुकसान और उनकी मृत्यु, मिट्टी की उर्वरता में कमी, पर्यावरण प्रदूषण और तापमान में वृद्धि और ग्रामीणों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि जानबूझकर जंगल में आग लगाना दंडनीय अपराध है। भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 एवं 33 के तहत वन क्षेत्र में आग लगाना या वनों को क्षति पहुँचाना अपराध है, जिसमें जुर्माना और कारावास का प्रावधान है।
आग से बचाव के लिए दिए गए सुझाव
इस जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को आग से बचाव के लिए सुझाव दिए गए जैसे जंगल में बीड़ी, सिगरेट या जलती हुई वस्तु न फेंकें। महुआ या तेंदूपत्ता संग्रह के दौरान आग का प्रयोग न करें। सूखी पत्तियों को हटाने के लिए विभाग को सूचना दें। साथ ही साथ किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें। फायर लाइन निर्माण और साफ-सफाई में सहयोग करें।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और निगम कर्मचारियों ने सभी ग्रामीणों को वन संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने अपील की कि वन हमारी साझा धरोहर है। यदि ग्रामवासी और निगम मिलकर समय पर सूचना दें, जागरूकता फैलाएं और फायर सीजन में सतर्क रहें, तो जंगल में आग की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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