ब्रह्मास्त्र रूपिणी माँ बगलामुखी का होगा विशेष पूजन: गुप्त नवरात्रि पर सरकंडा त्रिदेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

14
WhatsApp Image 2026-01-21 at 16.32.29 (1)

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): सरकंडा स्थित सुभाष चौक के प्रतिष्ठित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा हैं।इस अवसर पर अष्टमी को माँ श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का पूजन श्रृंगार किया जाएगा, इस अवसर पर प्रतिदिन प्रातःकालीन श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, पूजन एवं परमब्रह्म मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी का पूजन,श्रृंगार, श्री सिद्धिविनायक जी का पूजन श्रृंगार,एवं श्री महाकाली,महालक्ष्मी, महासरस्वती राजराजेश्वरी, त्रिपुरसुंदरी देवी का श्रीसूक्त षोडश मंत्र द्वारा दूधधारियाँ पूर्वक अभिषेक किया जा रहा है।

माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें ‘पीताम्बरा’ (पीले वस्त्र धारण करने वाली), ‘स्तंभन की देवी’ और ‘ब्रह्मास्त्र रूपिणी’ के नाम से भी जाना जाता है। माँ बगलामुखी का स्वरूप और उनकी महिमा शत्रुओं के विनाश और भक्तों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है।माँ बगलामुखी को शक्ति का वह स्वरूप माना जाता है जो ब्रह्मांड की सभी नकारात्मक शक्तियों को रोकने (स्तंभित करने) की क्षमता रखती हैं। ‘बगला’ शब्द संस्कृत के ‘वल्गा’ से निकला है, जिसका अर्थ है ‘लगाम’। जिस तरह लगाम घोड़े को नियंत्रित करती है, उसी प्रकार माँ अपने भक्तों के शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और गति को नियंत्रित कर उन्हें पंगु बना देती हैं।

पीताम्बरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि सतयुग में एक बार ब्रह्मांडीय तूफान (प्रलय) आया था, जिससे पूरी सृष्टि नष्ट हो रही थी। तब भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ बगलामुखी प्रकट हुईं और उन्होंने उस विनाशकारी तूफान को रोक दिया।माँ बगलामुखी का प्राकट्य एक विशेष असुर के वध और सृष्टि की रक्षा के लिए हुआ था एक बार ‘मदनासुर’ नाम के असुर ने वाक-सिद्धि प्राप्त कर ली थी, जिसका वह दुरुपयोग कर रहा था। वह अपनी वाणी से तीनों लोकों में तबाही मचा रहा था। माँ बगलामुखी ने प्रकट होकर उस राक्षस की जीभ (जिह्वा) पकड़ ली और उसे स्तंभित कर दिया। माँ ने उसका वध कर सृष्टि को उसके आतंक से मुक्त कराया।

पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि शक्ति की अधिष्ठात्री माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) दस महाविद्याओं में सर्वोपरि हैं। मां बगलामुखी देवी की उपासना विशेष रूप से वाद-विवाद, शास्त्रार्थ, मुकदमे में विजय प्राप्त करने के लिए, आप पर कोई आकारण अत्याचार कर रहा हो तो उसे रोकने सबक सिखाने, असाध्य रोगों से छुटकारा, बंधन मुक्त, संकट से उद्धार, उपद्रवो की शांति, ग्रह शांति, मनचाहे वर की प्राप्ति,संतान प्राप्ति,मोक्ष प्राप्ति आदि के लिए विशेष रूप से की जाती है।

सभी भक्तों को इस ‘सिद्धि काल’ में दर्शन और पूजन का लाभ उठाना चाहिए। इस दौरान माँ को पीले पुष्प, पीले वस्त्र और पीली मिठाई अर्पित करने का विशेष महत्व है।

भवदीय
ब्रह्मचारी मधुसूदन पाण्डेय व्यवस्थापक श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर, सुभाष चौक, सरकंडा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
मो.- 7354678899

About The Author

14 thoughts on “ब्रह्मास्त्र रूपिणी माँ बगलामुखी का होगा विशेष पूजन: गुप्त नवरात्रि पर सरकंडा त्रिदेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

  1. your article is amazing, i enjoy reading it, i want you to add me as your followers, how often do you post ? my blog is the top growing directory platform in germany, lokando24.de you can check it out. Thank you

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *