सीएमडी महाविद्यालय के भूले बिसरे मित्र मिले मन की बातों के साथ स्मरण किये अपने अध्ययन काल को

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बिलासपुर।अविभाजित मध्यप्रदेश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सी० एम० डी० स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना 31 जुलाई वर्ष 1956 को सागर विश्व विद्यालय सागर (अब हरिसिंह गौर वि. वि.) के तत्कालीन कुलपति- पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र के कर कमलों के द्वारा किया गया था।इस महाविद्यालय को बिलासपुर के प्रतिष्ठित छितानी प्रसाद-मितानी प्रसाद दुबे के परिवार के द्वारा स्थापित किया गया था।महाविद्यालय के स्थापना काल से यहाँ पर वाणिज्य एवं कला संकाय का ही शिक्षण प्रारंभ किया गया था। तत्पश्चात वर्ष 1961 में विज्ञान संकाय की शुरुआत हुई।यह महाविद्यालय प्रारंभिक समय में “सागर विश्वविद्यालय” सागर, वर्ष 1961 से “पं. रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय” रायपुर , वर्ष1983 से “गुरु घासीदास विश्व विद्यालय” बिलासपुर,और अब 2012 से “अटल बिहारी वाजपेयी विश्व विद्यालय” बिलासपुर से संबद्ध है।

इसी प्रतिष्ठित महाविद्यालय से वर्ष 1971-72 में वाणिज्य संकाय से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले 102 विद्यार्थीगण अपने-अपने कर्म क्षेत्र की ओर अग्रसर हुए। कुछ ने तो स्नातकोत्तर डिग्री के लिए पुनः इसी महाविद्यालय में प्रवेश ले लिया। वहीं अधिकांश विद्यार्थी विभिन्न शासकीय सेवा और बैंकर्स के रूप में जीविकोपार्जन करते हुए प्रशासन के अभिन्न अंग हो गए। कुछ तो अभी भी व्यवसाय के उच्चतम मापदण्ड के साथ देश की अर्थव्यवस्था में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। कुछ अधिवक्ता बन गए तो वहीं कुछ साथी रेडियो, लेखन और मीडिया के माध्यम से अभी भी देश और प्रदेश में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वर्ष 1971-72 में वाणिज्य स्नातक डिग्री प्राप्ति के स्वर्ण जयंती वर्ष में बिलासपुर निवासी कुछ उत्साही साथियों नें अपने सहपाठियों का Re Union. कराने के विचार से आपस में विचार विमर्श किया। फलस्वरूप लगभग 30 साथियों के नाम चिन्हित किए गये और उनसे सम्पर्क हेतु उनके मोबाइल नंबर की खोज प्रारंभ हुई। लेकिन वैश्विक महामारी कोविड के कारण यह अभियान थम सा गया। कुछ साथियों ने इस वर्ष इस दिशा में पुनः संज्ञान लेकर पूरी गंभीरता से अभियान चलाया। फलस्वरूप 75 साथियों के नाम की सूची बनी, और 37 के मोबाइल नंबर ज्ञात कर उनसे बात की गई और उनके निवास में जाकर प्रत्यक्ष सम्पर्क भी किया गया । ज्ञात साथियों में से 18 साथी स्मृति शेष हैं। शेष 20 साथीगण के मोबाइल नंबर का पता कर भविष्य में उनसे भी सम्पर्क किया जाएगा।

महाविद्यालय में वाणिज्य संकाय के विभाग प्रमुख स्वनामधन्य स्वः जे० के० अग्रवाल जी सहित 8 व्याख्यातागणों के माध्यम से हम सबने शिक्षा प्राप्त किया था। वर्तमान में डा० प्रभाकर पाण्डेय जी बिलासपुर में निवासरत है और बाकी सभी स्मृतिशेष हैं।
स्वर्ण जयंती कार्यक्रम को मूर्त-रूप देने की दिशा में हम सबने एक बैठक आयोजित करने की योजना बनाई। अतः हमारे बीच के उर्जावान साथीगण बी० आर.कौशिक, हकीकत राय अरोरा, अविनाश भुरंगी के द्वारा ज्ञात-साथियों के निवास में जाकर सतत् सम्पर्क किया गया और फोन से भी सम्पर्क कर दिनांक 27 जुलाई 2025 को एक महत्त्वपूर्ण बैठक इंडियन काफी हाऊस शिव टाकीज परिसर बिलासपुर में आयोजित किया गया।

इस बैठक में बिलासपुर में निवासरत 20 एवं रायपुर के 2 साथी विशेष रूप से उपस्थित हुए। बैठक में उपस्थित सभी साथी आपस में 53 वर्षों के बाद बड़ी उर्जा, उत्साह एवं प्रेम से मिले। उनका उत्साह देखते ही बन रहा था। सभी आपस में गलबहियां कर रहे थे। साथी मेंहदी हसन में तो *”ईद और दीवाली मिलन”* का नाम ही दे डाला। वहीं पर कुछ ने इसे *”उर्जा संचार के लिए संजीवनी”* बताया। इतने वर्षों के बाद सबने आपस में एक-दूसरे के दु:ख सुख और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी लिए। आगामी बैठक त्रैमासिक करने पर सहमती बनी जो कि 26 अक्टूबर 2025 को बिलासपुर में ही सम्पन्न होगी। वास्तव में उम्र के इस दौर में ऐसे आयोजनों के माध्यम से उर्जा के नव संचार की अनुभूति होती है। मिलने का सिलसिला जारी रहना चाहिए।
इस समाचार के माध्यम से हम यह संदेश भी देना चाहते है कि सी० एम० डी० महा विद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़ से वर्ष, 1971-72 में वाणिज्य संकाय से स्नातक करने वाले साथी कृपया बी०आर कौशिक के मोबाइल नंबर 9424153582 पर सम्पर्क कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं ताकि उनके नाम को भी सूची बद्ध किया जा सके और इस माध्यम से उन्हें भी हमारी गतिविधियों की जानकारियां मिलती रहेगी। सभी साथियों से सम्पर्क उपरांत एक विशेष आयोजन के माध्यम से अपने व्याख्याता डा. प्रभाकर पाण्डेय सर को आमंत्रित कर स्नेह मिलन कार्यक्रम को मूर्तरूप दिया जाएगा। आयोजन स्थल और तिथि की घोषणा आमसहमति से बाद में घोषित की जाएंगी।बैठक के अंत में सभी स्मृति शेष व्याख्याता गण एवं साथियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सर्वश्री हकीकत राय अरोरा, कैलाश चंद्र अग्रवाल, शशीकांत जानी, अविनाश भुरंगी, चितरू प्रसाद अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, अरुण मेंढेकर, अनिल भुरंगी, मेंहदी हसन, द्वारिका प्रसाद अग्रवाल, बजरंग अग्रवाल, सी गोपाल राव, सुरेश मुरारका, ओम प्रकाश मोटवानी, धनश्याम अग्रवाल, शशीभूषण सिंह, तेजपाल सिंह अरोरा, वेंकटेश गाड़ोदिया, हिमांशु मित्रा, बिसाहू कौशिक सभी बिलासपुर एवं रघुवीर सिंह गुम्बर व अशोक चौकसे रायपुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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