छत्तीसगढ़ का भला चाहने वाला हर व्यक्ति है छत्तीसगढ़िया; कुर्मी समाज ने हाटगुड़ा में मनाई गई डॉ खूबचंद बघेल की जयंती

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जगदलपुर।कुर्मी क्षत्रिय समाज द्वारा रविवार को हाटगुड़ा स्थित सामाजिक भवन में छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नदृष्टा प्रणेता डॉ. खूबचंद बघेल की जयंती मनाई गई। मौके पर डॉ. बघेल के आदर्शों पर चर्चा करते हुए समाज के संरक्षक जेपी कौशिक ने कहा कि डॉ. साहब ने कहा था कि जो व्यक्ति छत्तीसगढ़ का भला चाहता है। वह छत्तीसगढ़िया है। चाहे वह किसी भी जाति पंथ या राज्य का हो। सदियों से छत्तीसगढ़ ने लाखों लोगों को आश्रय दिया है।छत्तीसगढ़ सिर्फ एक भूखंड नहीं अपितु आत्मीय भावनाओं से परिपूर्ण मां की गोद है।

सामाजिक बैठक में सबसे पहले डॉ खूबचंद बघेल की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। तत्पश्चात वक्ताओं ने डा. खूबचंद बघेल के सामाजिक सरोकारों पर अपनी बात रखी। संरक्षक जेपी कौशिक, रामेश्वर चंद्र ने बताया कि कृषक परिवार में जन्म लेने वाले डा. खूबचंद बघेल शासकीय सेवा छोड़ कर स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेने वाले अद्भुत और अग्रणी सेनानी थे।वे अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय समाज के दो बार अध्यक्ष रहे। छत्तीसगढ़ का शोषण, यहाँ के लोगों का अपमान एवं अत्याचार से आहत होकर उन्होंने छत्तीसगढ़ भ्रातृसंघ की स्थापना की थी। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नदृष्टा डा. खूबचन्द बघेल बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। समाज सेवा के अलावा सहकारिता, शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। 22 फरवरी 1969 को दिल्ली में आयोजित संसद सत्र के दौरान हृदयाघात से उनका निधन हो गया था।

दिल्ली की तत्कालीन संसदीय कार्यसमिति ने उनके पार्थिव शरीर को मालगाड़ी से रायपुर भिजवा दिया था। इस अपमानजनक घटना के चलते ही पूरा छत्तीसगढ़ आंदोलित हो उठा था। इस अपमान जनक कृत्य के बाद ही केन्द्र सरकार ने यह कानून बनाया गया कि सत्र के दौरान किसी सांसद का निधन होता है तो उनके पार्थिव शरीर को ससम्मान हवाई जहाज से अथवा रेल से भेजा जाए। तब से किसी जनप्रतिनिधि की आकस्मिक मौत पर उनके पार्थिव देह को ससम्मान उनके घर तक शासन द्वारा पहुंचाने की व्यवस्था जारी है।

जयंती समारोह में मुख्यत: केपी कौशिक, राजेश वर्मा, शिव वर्मा, गजेंद्र दिल्लीवार, संतोष वर्मा, श्रीमती कृष्णा वर्मा, श्रीमती रूखमणी कौशिक, श्रीमती वैदेही कौशिक, श्रीमती अन्नूलता चंद्रा, लव्य कुमार चंद्रा आदि मौजूद रहे।

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